आज पण्डित चन्द्रमणि पाण्डेय का जन्म दिवस है

पण्डित चंद्र मणि पांडेय 'चंद्र' आध्यात्मिक, सामाजिक एवं साहित्यिक चेतना के संवाहक थे। उनका एक विराट व्यक्तित्व था। साहित्यिक क्षेत्र में उनकी अपनी विशिष्ट पहचान थी। लोगों के साथ सहृदयतापूर्ण व्यवहार के साथ ही सभी से स्नेहयुक्त,आत्मीय सम्बन्ध के कारण वे सभी के प्रिय थे।

पण्डित चन्द्रमणि पाण्डेय का जन्म दिवस

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
राज्य संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

पण्डित चंद्र मणि पांडेय ‘चंद्र’ आध्यात्मिक, सामाजिक एवं साहित्यिक चेतना के संवाहक थे। उनका एक विराट व्यक्तित्व था। साहित्यिक क्षेत्र में उनकी अपनी विशिष्ट पहचान थी |लोगों के साथ सहृदयतापूर्ण व्यवहार के साथ ही सभी से स्नेहयुक्त,आत्मीय सम्बन्ध के कारण वे सभी के प्रिय थे।

उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज की अनेक ज्वलंत समस्याओं का चित्रण किया| जब गांव की बात आती है तो “ले चल प्रिय उस गांव हमारे जहां प्रकृति के वैभव सारे” कविता के माध्यम से भारत के संस्कृति का चित्रण किया। समाज के सभी वर्गों के प्रति उनका समरस चिंतन रहता था।

भगवान शिव के अनन्य भक्त पंडित चंद्रमणि पांडेय “चंद्र” ने समय-समय पर काव्य गोष्ठियों के माध्यम से साहित्य को एक नई दिशा देने का कार्य कियाआध्यात्मिक चिंतन के प्रवाह में संतों, कथाकारों के साथ सहज सान्निध्य था।अनेक कथाओं का आयोजन अपने जीवन मे किया। सभी को संबल प्रदान करने के साथ ही समाज के प्रति अपने दायित्वों का सतत निर्वहन करते रहे।

पंडित उमाकान्त पाण्डेय के पुत्र चंद्रमणि पाण्डेय का जन्म 1956 में अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतापगढ़ के मान्धाता विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम पूरे रामदत्त में हुआ था। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के होने के कारण चंद्र जी ने अपनी प्रतिभा के आधार पर समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी 65 वी जयंती के अवसर पर उनके परिजनों, मित्रो, शुभचिंतको ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

श्री चन्द्रमणि पाण्डेय ‘चन्द्र जी’ के सुपुत्र डॉ सौरभ पाण्डेय पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।