हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज का 94वाँ स्थापना दिवस बुधवार को गाँधी सभागार में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मंचासीन मुख्य अतिथि श्री सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मन्त्री, उत्तरप्रदेश सरकार एवं एकेडेमी के अध्यक्ष डाॅ. उदयप्रताप सिंह द्वारा 11 विद्वत् विभूतियों का सम्मान किया गया।

डा. शक्ति कुमार पाण्डेय
विशेष संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज, 25 मार्च।

हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज का 94वाँ स्थापना दिवस एवं विद्वत् सम्मान समारोह 24 मार्च 2021, बुधवार को गाँधी सभागार में आयोजित किया गया।

स्थापना दिवस एवं विद्वत् सम्मान समारोह का शुभारम्भ ज्ञानदेवी सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में मंचासीन मुख्य अतिथि श्री सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मन्त्री, उत्तर प्रदेश सरकार एवं एकेडेमी के अध्यक्ष डाॅ. उदयप्रताप सिंह द्वारा 11 विद्वत् विभूतियों का सम्मान किया गया।

सम्मानित किये जाने वाले विद्वानों में डाॅ. कमलेशदत्त त्रिपाठी (वाराणसी), श्री देवेन्द्र दीपक (भोपाल), डाॅ. लक्ष्मीशंकर गुप्त (वाराणसी), डाॅ. कन्हैया सिंह (आज़मगढ़), डाॅ. त्रिभुवननाथ शुक्ल (जबलपुर), डाॅ. अमलधारी सिंह (जौनपुर), डाॅ. कामेश्वर उपाध्याय (वाराणसी), श्री गुलाब सिंह (प्रयागराज), डॉ. प्रभुनाथ द्विवेदी (वाराणसी), डाॅ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’ (सोनभद्र) अदि को स्मृतिचिह्न, अंगवस्त्रम् एवं पुष्पगुच्छ देकर अभिनन्दन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. उदयप्रताप सिंह ने कहा कि ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज की स्थापना के अवसर पर आज एक बड़ी हस्ती हमारे बीच है। तपस्वी मुख्यमंत्री जी की कैबिनेट के एक कर्मठ एवं विद्वान् मन्त्री माननीय सिद्धार्थनाथ सिंह जी हमारे बीच हैं।

उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तानी एकेडेमी हिन्दी, उर्दू, अवधी बुन्देली ब्रजभाषा के विकास एवं संरक्षण के लिये निरन्तर प्रयासरत है। इसे हम एक मानक संस्था के रूप में बनाना चाहते हैं। एकेडेमी प्रतिवर्ष 11 विद्वानों का सम्मान करती हैं। इस वर्ष भी पूरे देश भर के विद्वानों में से 11 विद्वानों को सम्मानित किया जा रहा है।’

मुख्य अतिथि श्री सिद्धार्थनाथ सिंह जी ने कहा कि ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी में आज पाँच वर्ष के बाद आया हूँ। मैंने कुछ न कुछ पुण्य किया है जो आज इस अवसर पर मुझे बुलाया गया है और मुझे इन 11 विद्वानों का आज दर्शन एवं सम्मान करने का सौभाग्य मिला है।

उन्होंने कहा कि मेरे नाना श्री लालबहादुर शास्त्री जी को फटे जूते में चिप्पी लगाकर पहनने में कोई संकोच नही था। यह उनकी ईमानदारी को दर्शाता है। इस संस्था से महान हस्तियों का जुड़ाव रहा है। इस पवित्र स्थल से पन्त, महादेवी, अकबर इलाहाबादी, निराला जैसे विद्वान् जुड़े रहे।’

इस अवसर पर हिन्दुस्तानी एकेडेमी का परिचय देते हुए एकेडेमी के पूर्व कोषाध्यक्ष श्री रविनन्दन सिंह ने कहा कि ‘हिन्दुस्तानी एकेडेमी’ की स्थापना महान् विभूतियों ने की थीं। बड़े बडे़ साहित्यकार इससे जुड़े रहें हैं।

उन्होंने कहा कि आज हिन्दुस्तानी एकेडेमी का रथ लेकर डाॅ. उदयप्रताप सिंह ने पूरे प्रदेश को नापा है। एक चक्रवर्ती अध्यक्ष के रूप में इन्होंने कार्य किया है।

सम्मान समारोह के पश्चात् सुप्रसिद्ध लोकगायक श्री मनोज गुप्ता एवं उनकी टीम द्वारा सांस्कृतिक सन्ध्या का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में अतिथियों का धन्यवाद करते हुए एकेडेमी की कोषाध्यक्ष श्रीमती पायल सिंह ने कहा कि हिन्दुस्तानी एकेडेमी उत्तर प्रदेश की प्राचीनतम संस्थाओं में से एक है। आज से 94 वर्ष पहले 29 मार्च 1927 ई. को हिन्दुस्तानी एकेडेमी अपने जिन उद्देश्यों को लेकर स्थापित हुई उनका संवर्धन एवं विकास आज भी एकेडेमी की प्राथमिकताओं में है। एकेडेमी के संस्थापकों ने जो स्वप्न देखे उनको पूर्ण करने का दायित्व ही हमारा शिवसंकल्प है। मेरी कोशिश है कि आप सभी के सहयोग से एकेडेमी सफलता की ओर अग्रसर हो।

कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विनम्रसेन सिंह ने किया।