मायावती के स्मारक घोटाले में विजिलेंस ने राजकीय निर्माण निगम के चार बड़े अधिकारियों को किया गिरफ्तार।

विजिलेंस ने आर एन एम के वित्तीय परामर्शदाता विमलकांत मुद्गल, महाप्रबंधक तकनीकी एसके त्यागी, महाप्रबंधक सोडिक कृष्ण कुमार, और इकाई प्रभारी कामेश्वर शर्मा को गिरफ्तार किया है।

डा. शक्ति कुमार पाण्डेय
विशेष संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

लखनऊ, 9 अप्रैल।

मायावती सरकार में लखनऊ और नोएडा में बने स्मारकों के निर्माण में हुए घोटाले में विजिलेंस की लखनऊ टीम ने राजकीय निर्माण निगम के चार बड़े तत्कालीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है।

विजिलेंस की टीम राजकीय निर्माण निगम के कई अन्य अधिकारियों पर भी निगाह रखे हुए है। इस मामले में पहले ही गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

विजिलेंस जांच के क्रम में शुक्रवार को वित्तीय परामर्शदाता विमलकांत मुद्गल, महाप्रबंधक तकनीकी एसके त्यागी, महाप्रबंधक सोडिक कृष्ण कुमार, और इकाई प्रभारी कामेश्वर शर्मा को गिरफ्तार किया है। इन चारों से विजिलेंस टीम पूछताछ कर रही है।

बताते चलें कि 2007 से 2011 में मायावती शासनकाल के दौरान लखनऊ और नोएडा में बने भव्य स्मारक में हुए घोटाले की जांच यूपी विजिलेंस की लखनऊ टीम को दी गई थी।

आरोप था कि लखनऊ और नोएडा में बने स्मारकों में लगे पत्थरों के ऊंचे दाम वसूले गए थे। मिर्जापुर में एक साथ 29 मशीनें लगाई गई और कागजों में दिखाया गया था कि पत्थरों को राजस्थान ले जाकर वहां कटिंग कराई गई, फिर तराशा गया।

इस मामले में ढुलाई के नाम पर करोड़ों रुपये का वारा न्यारा किया गया था। कंसोर्टियम बनाया गया जो कि खनन नियमों के खिलाफ था। 840 रुपए प्रति घनफुट के हिसाब से ज्यादा वसूली की गई। मंत्रियों, अफसरों और इंजीनियरों ने अपने चहेतों को मनमाने ढंग से पत्थर सप्लाई का ठेका दिया और मोटा कमीशन लिया।

जांच में यह बात भी सामने आयी थी कि मनमाने ढंग से अफसरों को दाम तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया था। ऊंचे दाम तय करने के बाद पट्टे देना शुरू कर दिया गया था। सलाहकार के भाई की फर्म को मनमाने ढंग से करोड़ों रुपये का काम दे दिया गया था।

वर्ष 2014 में तत्कालीन सपा सरकार ने मामले की जांच यूपी पुलिस के सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) को सौंपी थी। जबकि लोकायुक्त ने इस घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

लखनऊ के गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था लेकिन विजिलेंस विभाग पांच वर्षों बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सका।

वर्ष 2007-12 के बीच बसपा के शासनकाल में कई पार्कों और मूर्तियों का निर्माण कराया गया। इसी दौरान लखनऊ और नोएडा में दो ऐसे बड़े पार्क बनवाए गए जिनमें तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती, बसपा संस्थापक कांशीराम व भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अलावा पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की सैकड़ों मूर्तियां लगवाई गईं। उस समय मायावती सरकार के इस फैसले की विपक्षी नेताओं ने व्यापक आलोचना की थी।