प्रयागराज के बहुचर्चित दीपक तुलसियानी आत्महत्या-काण्ड में सुप्रीम कोर्ट ने भी अधिवक्ता दम्पति को निर्दोष माना।

दीपक ने पत्नी से बात करते हुए किसी बात पर गुस्से में आकर लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार लिया। घटना अधिवक्ता दम्पति के आवास की थी, इसलिए वे लेकर अस्पताल भागे, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

डाo शक्ति कुमार पाण्डेय
विशेष संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज, 15 मई।

प्रयागराज में १६ वर्ष पूर्व हुए बहुचर्चित दीपक तुलसियानी की खुद की पिस्टल से हुई मौत को उच्चतम न्यायालय ने भी आत्महत्या ही माना।

उक्त केस में फर्जी तरीके से आरोपित बनाए गए अधिवक्ता दम्पति अजय प्रकाश मिश्रा व उनकी पत्नी श्रीमती जया मिश्रा को १६ वर्ष बाद उच्चतम न्यायालय से भी न्याय मिला।

उल्लेखनीय है कि प्रयागराज के दीपक तुलसियानी की मौत को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आत्महत्या मानते हुए फैसला सुनाया था, और अन्ततः लम्बी सुनवाई के बाद उसी फ़ैसले को माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी सही ठहराया।

उल्लेखनीय है कि इस चर्चित मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने सम्पूर्ण साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात् अपने निर्णय में कहा था की साक्ष्यों से यह स्पष्ट है की मृतक ने अपनी पत्नी से मोबाइल पर बात करते हुए और उसे जानकारी देते हुए अपनी ही लाइसेंसी पिस्टल से आत्महत्या कर ली थी, और इस राज को मृतक की पत्नी हमेशा छुपाती रही ।

साक्ष्य में पाया गया कि मृतक की पत्नी सारे तथ्यों को छुपाती रही तथा समय समय पर अपना बयान भी बदलती रही व अधिवक्ता दम्पति को बदनाम करती रही। पत्नी के चाल-चलन से परेशान होकर मृतक दीपक तुलसियानी ने उसको बताते हुए आत्महत्या किया, लेकिन चूंकि दीपक उस समय अधिवक्ता दम्पति के आवास पर था, तो परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए दीपक की पत्नी ने अधिवक्ता दम्पति को गलत तरीके से फंसाकर कर अपने आप को बचाने का प्रयास किया।

यहां तक कि अधिवक्ता दम्पति के निर्दोष होने वाले उच्च न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़ मृतक दीपक की पत्नी अर्चना तुलसियानी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल किया, जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी माननीय उच्च न्यायालय के अधिवक्ता दम्पति को निर्दोष करार देने वाले आदेश को ही सही ठहराया तथा अधिवक्ता दम्पति के निर्दोष होने वाले आदेश को बरकरार रखा।

अधिवक्ता दम्पति ने बताया कि उनको तो सच बोलना महँगा पड़ गया। अर्चना से मोबाइल पर बात करते हुए आक्रोश में दीपक ने आत्महत्या कर लिया था, लेकिन अपने आपको पाक साफ साबित करने के लिए और एल.आई.सी के पैसे पाने के लिए उल्टा उन्हें ही झूठे मुक़दमे में फँसा दिया।

दम्पति ने बताया की मृतक की पत्नी अर्चना तुलसियानी ने सारे सही तथ्य छुपाये और पुलिस से झूठ बोलकर उन लोगों को झूठे मुक़दमे में फँसवा दिया। अधिवक्ता दम्पति ने सम्पूर्ण साक्ष्य व अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ो को प्रस्तुत करके न्यायालय में दीपक की पत्नी द्वारा पेश किए गए सारे झूठ का पर्दाफ़ाश किया।

यह तथ्य भी सामने लाया गया कि कैसे वह अपने पति से झूठ बोलकर तीन दिन दिल्ली में कहीं अज्ञात स्थान पर रही, जिसकी वजह से दीपक तुलसियानी और उसकी पत्नी में झगड़ा हुआ था।

अर्चना तुलसियानी अपना दिल्ली जाना भी छुपाती रही जिसे रेलवे द्वारा साबित करवाने पर अर्चना को स्वीकार करना पड़ा था। जब इस बात पर झगड़ा बहुत बढ़ा तो दीपक ने मोबाइल पर बात करते हुए और अपना आक्रोश जाहिर करते हुए आत्महत्या कर लिया।

अर्चना तुलसियानी इस फ़ोन कॉल को नकारती रही, किंतु न्यायालय में जब कॉल डिटेल प्रस्तुत हो गया तब स्वीकार किया कि उस कॉल को उसी ने किया था, जिस कॉल पर बात करते हुए मृतक ने ग़ुस्से में आत्महत्या कर लिया।

चूंकि यह घटनाक्रम अधिवक्ता दम्पति के आवास पर हुआ था और वही दोनों इसके साक्षी थे, इसलिए अधिवक्ता दम्पति ने घायल दीपक को तत्काल अस्पताल में भर्ती करवाया तथा घायल दीपक के लिए खून का इंतज़ाम करते हुए समस्त आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवायी। किंतु अधिवक्ता दम्पति के सारे प्रयासों के बावजूद भी दीपक को बचाया नही जा सका।

दम्पति ने यह भी बताया कि अपने को पाक-साफ साबित करने के लिए दीपक की पत्नी ने जो झूठ गढ़ा, उसके कारण इन १६ वर्षों में उन्हें काफ़ी मानसिक शारीरिक प्रताड़ना झेलना पड़ा, जिसमें ६ वर्ष का कारावास भी शामिल है। किंतु उन्होंने न्यायालय से न्याय मिलने की उम्मीद कभी नही छोड़ी तथा न्यायपालिका पर हमेशा भरोसा रखा, सही बात को पुलिस और न्यायालय सभी स्तर पर लगातार कहते रहे। परिणामस्वरूप अंततोगत्वा अधिवक्ता दम्पति को माननीय उच्च न्यायालय के बाद माननीय उच्चतम द्वारा भी न्याय मिला।