गुरुजन वो जन मर रहे, जेहि रेड ज़ोन में जाय। बिना मास्क वैक्सीन के, स्वाँस तुरत थम जाय।

 

अद्वितीय संक्रमण – महाकाल

डॉक्टर जी० एस० द्विवेदी

(04/06/2021 तिथि को स्वांत: सुखाय रचित कुछ दोहे)

लेखा- वेतन दोऊ अड़े, क्षेत्रीय के पास न जाँय।
अज्ञात शत्रु के भय बस, घर से निकसत नाँय ।१।
फ़क़ीरा घर से निकसत नाँय ।

गुरुजन वो जन मर रहे, जेहि रेड ज़ोन में जाय।
बिना मास्क वैक्सीन के, स्वाँस तुरत थम जाय ।२।
फ़क़ीरा स्वाँस तुरत थम जाय ।

वेतन पूछत सब फिरे, जाय न चाहत क़ोय।
ज्यों साधन देइ देत तो, देर काहे को होय।३।
फ़क़ीरा देर काहे को होय ।।

मास बितत धन जात बही, फँस जीवन के मोह ।
गुरुजन अँसुवा नैन भरी, क़ाल कटत नहि सोय।४।
फ़क़ीरा क़ाल कटत नहि सोय ।

चरन धरत चिंता बढ़त, कर्र्ज दबे चहुँओर।
वेतन को पूछत फिरत शिक्षक-कर्मचारी भोर।५।
फ़क़ीरा शिक्षक-कर्मचारी भोर ।

गुरुजन देरी हौं भली, जो थोड़े दिन होय।
खाता में आवत जहाँ, बैलेन्स ज़ीरो होय ।६।
फ़क़ीरा बैलेन्स ज़ीरो होय।

कह गुरुजन कैसे निभे, शिक्षक बाबू के संग।
भत्ता आयकर सब कट गया, मौन साधे बा संघ ।७।
फ़क़ीरा मौन साधे बा संघ ।

वेतन दीया तेल भरी, काम लिया अखट्ट।
चुनाव गणना के फेर में, पहुँच गए कुछ घट्ट ।८।
फ़क़ीरा पहुँच गए कुछ घट्ट ।

गुरुजन बिन दीक्षा दिए, पास करत सब क़ोय।
तिसरी लहर भाँप के, आभासी परीक्षण होय ।९।
फ़क़ीरा आभासी परीक्षण होय ।

मास्क सहित वैक्सीन देत के,परिजन हमें खूब सुझाय।
एलोपैथ आयुर्वेद में कोरोना दियो लड़ाय ।१०।
फ़क़ीरा कोरोना दियो लड़ाय।

गुरुजन लेके वैक्सीन को, मास्क ना दीजिए डारि।
जहाँ कम आवे सुई, तहाँ बढ़े तकरार ।११।
फ़क़ीरा तहाँ बढ़े तकरार।

सुनि लेखा के बैन, बात लपेटे अटपटे।
सहमे अरु बेचैन , चेतहिं जान के बे-तन तनु ।१२।