क्या है रेविल रैन्समवेयर साइबर अटैक, क्या होता है मालवेयर वायरस हमला।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

टेक्नोलॉजी, 06 जुलाई:- साइबर अटैक एक प्रकार का अपराध होता है। जिसे इंटरनेट द्वारा किया जाता है। इस अपराध को करने वाला व्यक्ति “साइबर क्रिमिनल” कहलाते हैं। साइबर क्रिमिनल इलेक्ट्रॉनिक टूल्स व सॉफ्टवेयर के द्वारा इंटरनेट उपयोगकर्ता के कंप्यूटर सिस्टम तथा नेटवर्क को संक्रमित कर देते हैं और उस सिस्टम से सभी जरूरी डेटा या जानकारियों को चुरा लेते हैं। डाटा की चोरी करने के बाद ये अपराधी कंप्यूटर उपयोगकर्ता से पैसे की माँग करते है। इंटरनेट पर अलग-अलग प्रकार के साइबर हमले किए जाते हैं। जिसकी सहायता से अपराधी किसी कंप्यूटर सिस्टम को डिसेबल या लॉक भी कर सकते है। इन प्रकार के हमलो को करने के लिए। साइबर क्रिमिनल अलग-अलग प्रकार के साइबर अटैक का प्रयोग करते हैं।

अमेरिकी आईटी फर्म कसेया पर एक साइबर अटैक:- साइबर अटैक के मामले दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे है और अब रूस का रेविल गैंग ने अमेरिकी आईटी फर्म कसेया पर एक साइबर अटैक किया है, जिसे आज तक दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल रैन्समवेयर अटैक माना जा रहा है। इस अटैक में कसेया के कॉर्पोरेट नेटवर्क और इसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाली लगभग 1000 कंपनियों को टार्गेट किया है। तो आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि रेविल रैन्समवेयर क्या है और यह बाकी रैन्समवेयर से अलग कैसे है।

क्या है रेविल रैन्समवेयर अटैक और यह दूसरों से अलग कैसे हैं:- रेविल रैन्समवेयर एविल, जिसे सोडिनोकिबी के नाम से भी जाना जाता है, एक निजी रैंसमवेयर-एज-ए-सर्विस (रास) ऑपरेशन है, जबकि इस क्रिमिनल हैकिंग ग्रुप का फोरमेशन साल 2019 में किया गया था। एक अटैक के बाद, रेविल अपने पेज ‘हैप्पी ब्लॉग’ पर जानकारी पब्लिस करने की धमकी देता है, जब तक कि फिरौती नहीं मिलती। रेविल गैंग अटैक का एप्पल भी शिकार हो चुका जिसमें उनके अपकमिंग प्रॉडक्ड्स की सीक्रेट प्लान्स चुरा लिए थे।

साइबर हमला क्या होता है:- साइबर हमला वाक्यांश है जिसका उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में इंटरनेट आधारित हमलों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जिसमें शामिल है कंप्यूटर वायरस जैसे साधनों के माध्यम से कंप्यूटर नेटवर्क में जानबूझकर, बड़े पैमाने पर किया गया व्यवधान, विशेष रूप से इंटरनेट से जुड़े निजी कंप्यूटर में, साइबर आतंकवाद एक विवादास्पद शब्द है। कुछ लेखक बहुत ही संकीर्ण परिभाषा का प्रयोग करते हैं और इसे ज्ञात आतंकवादी संगठनों द्वारा चेतावनी और आतंक पैदा करने के प्राथमिक उद्देश्य से सूचना प्रणालियों के खिलाफ व्यवधान हमले से जोड़ते हैं। इस संकीर्ण परिभाषा के आधार पर, साइबर आतंकवाद से किसी उदाहरण की पहचान करना मुश्किल है। साइबर आतंकवाद को किसी भी कंप्यूटर अपराध के रूप में और अधिक सामान्य तरीके से परिभाषित किया जा सकता है, जो असली दुनिया के बुनियादी ढांचे, संपत्ति जीवन को अनिवार्य रूप से क्षति पहुंचाए बिना कंप्यूटर नेटवर्क को लक्षित करता है। मीडिया और सरकारी सूत्रों में साइबर आतंकवाद के द्वारा होने वाले संभावित नुकसान के कारण गहरी चिंता है और इसने सरकारी एजेंसियों से आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को उत्पन्न किया है।

साइबर हमला क्या है:- आप की प्राइवेसी में जबरदस्ती घुस जाना, हम ये समझ ले कि हमारी बहुत सी प्राइवेसी होती है। जो अलग अलग होती है। जैसे- बैंक पासवर्ड, ऑनलाइन पासवर्ड, जैसे बहुत से पासवर्ड होते है। जिसको हम सुरक्षित रखना चाहते है। लेकिन जब हम इसका उपयोग किसी काम के लिए करते है तो हम आप का डेटा चुरा लेते है। जो कई तरह से होते है। और इसका कारण एक ही है “जब हम इंटरनेट के माध्यम का उपयोग करते है तो साथ मे कुछ वायरस भी साथ मे जुड़ जाते है। कभी-कभी फ्रॉड कॉल की आपने लकी ड्रा में इतना इनाम जीता है। बस बिना सोचे समझे अपने निजी इन्फॉर्मेशन आप उनको देते है। जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल, जिसकी वजह से आपके पैसे आपके खाते से गायब हो जाते है। सुरक्षा में भी अपने सिक्योरटी सिस्टम को हैक कर के भी साइबर हमला करते है।

मैलवेयर:- मैलवेयर एक प्रकार का दुष्ट या गलत प्रोग्राम किया गया सॉफ्टवेयर होता है। जिसके द्वारा अपराधी कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश करके डाटा नियमों का उल्लंघन करता है। इंटरनेट पर अलग-अलग प्रकार के मैलवेयर उपलब्ध है। जिन्हे हम वायरस, रैंसमवेयर, स्पाइवेयर और एडवेयर इत्यादि नामों से जानते हैं। इस प्रकार के दुष्ट प्रोग्राम को फैलने के लिए लिंक, ईमेल और डाउनलोड साइट का प्रयोग किया जाता है। जब कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता है। उस समय यह मैलवेयर कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाता है। जो कंप्यूटर सिस्टम के लिए बहुत हानिकारक होता है।

फिशिंग:- फिशिंग एक साइबर हमला होता है। इस प्रकार के हमलो में साइबर क्रिमिनल एक असली लगने वाले नकली वेब पेज को बनाते है। इस वेब पेज को ईमेल व लिंक की सहायता से शेयर किया जाता है। अगर गलती से कोई व्यक्ति इस लिंक पर क्लिक करे। तो क्रिमिनल उस वेब पेज की सहायता से कुछ निजी जानकारियाँ चुरा लेता है। जैसे – क्रेडिट कार्ड डिटेल व कोई अकाउंट डिटेल इत्यादि।

मैन इन द मिडिल अटैक:- इस प्रकार के साइबर हमले में अपराधी किन्हीं दो व्यक्तियों के नेटवर्क संचार के बीच हस्तक्षेप करता है। जिसके द्वारा नेटवर्क से जुड़े दोनों व्यक्तियों के बीच हो रहे सभी डाटा ट्रांसफर को चुराया जा सकता है। इस हमले को करने के लिए साइबर क्रिमिनल कुछ असुरक्षित वाई-फ़ाई का प्रयोग करता है।

दुनिया की सबसे खतरनाक सायबर अटैक गैंग:- रेविल रैंसमवेयर दुनिया के सबसे बड़े रेंसमवेयर गैंग में से है, जिसने अभी अमेरिकी आईटी फर्म कसेया पर एक साइबर अटैक किया है, और दुनिया का सबसे बड़ा धोखाधड़ी भी माना जा रहा है। रूस आधारित रेविल ने कसेया से लगभग 520 करोड़ रुपयों की फिरौती मांगी है। इस प्रकार आप अंदाजा लगा सकते है, कि यह गैंग कितनी खतरनाक है। साथ ही आपको बता दें कि इसने ‘मेमोरियल डे’ अटैक के बाद मांस प्रसंस्करण कंपनी ‘जेबीएस’ से 1.1 करोड़ अमरीकी डॉलर की जबरन वसूली की थी।

अब तक का सबसे ताकतवर अटैक:- वहीं कसेया रैंसमवेयर अटैक आज तक का सबसे बड़ा साइबर अटैक भी माना जा रहा है जिसमें 17 देशों को टार्गेट बनाया गया है। जबकि कंपनी ने 40,000 से अधिक संगठनों को अपनी सर्विसेज दे रखी हैं।।