क्या है पेगासस स्पाइवेयर, जासूसी के आरोपो के बीच क्यो देश को बदनाम करने वाली गैंग में मची है खलबली।।

देश विरोधी ताकतों से निपटने के लिए भारत मे पेगासस स्पाइवेयर की आवश्यकता है। और इसी वजह से इस गैंग में मची है खलबली।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

टेक्नोलॉजी, 20 जुलाई:- भारत में पेगासस स्पाईवेयर एक बार फिर सुर्खियों में हैं, भारत में इसके जरिए कई पत्रकारों और चर्चित हस्तियों के फ़ोन की जासूसी करने का दावा किया जा रहा है। पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसका निर्माण इजरायल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ ने किया है। इस प्रोग्राम की मदद से हैकर स्मार्टफोन का माइक्रोफ़ोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्स्ट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक हैक कर सकते हैं। ये पहले भी विवादों में रहा है, बांग्लादेश समेत कई देशों ने पेगासस स्पाईवेयर ख़रीदा है। मेक्सिको से लेकर सऊदी अरब की सरकार तक पर इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं। व्हाट्सऐप, फ़ेसुबक और कई दूसरी कंपनियों ने इस पर मुकदमे किए हैं। भारत के बारे में आधिकारिक तौर पर ये जानकारी नहीं है कि सरकार ने एनएसओ से ‘पेगासस’ को खरीदा है या नहीं।

कंपनी दावा करती रही है कि वो इस प्रोग्राम को केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है:- हालांकि, एनएसओ ने पहले ख़ुद पर लगे सभी आरोपों को ख़ारिज किए हैं, ये कंपनी दावा करती रही है कि वो इस प्रोग्राम को केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है और इसका उद्देश्य “आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ना” है। सरकारें भी जाहिर तौर पर बताती हैं कि इसे ख़रीदने के लिए उनका मक़सद सुरक्षा और आतंकवाद पर रोक लगाना है लेकिन कई सरकारों पर पेगासस के मनचाहे इस्तेमाल और दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं।

साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई की एक रिपोर्ट के अनुसार:- पेगासस आपको एन्क्रिप्टेड ऑडियो सुनने और एन्क्रिप्टेड संदेशों को पढ़ने लायक बना देता है, एन्क्रिप्टेड ऐसे संदेश होते हैं जिसकी जानकारी सिर्फ मेसेज भेजने वाले और रिसीव करने वाले को होती है। जिस कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म पर मेसेज भेजा जा रहा, वो भी उसे देख या सुन नहीं सकती। पेगासस के इस्तेमाल से हैक करने वाले को उस व्यक्ति के फ़ोन से जुड़ी सारी जानकारियां मिल सकती हैं।

पहली बार 2016 में सामने आया नाम:- एक रिपोर्ट के मुताबिक पेगासस से जुड़ी जानकारी पहली बार साल 2016 में संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर की बदौलत मिली, उन्हें कई एसएमएस प्राप्त हुए थे, जो उनके मुताबिक संदिग्ध थे। उन्होंने अपने फोन को टोरंटो विश्वविद्यालय के ‘सिटीजन लैब’ के जानकारों को दिखाया, उन्होंने एक अन्य साइबर सुरक्षा फर्म ‘लुकआउट’ से मदद ली। मंसूर का अंदाज़ा सही था, इस मैलवेयर को पेगासस का नाम दिया गया, लुकआउट के शोधकर्ताओं ने इसे किसी “एंडपॉइंड पर किया गया सबसे जटिल हमला बताया। इसके बाद साल 2017 में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मेक्सिको की सरकार पर पेगासस की मदद से मोबाइल की जासूसी करने वाला उपकरण बनाने का आरोप लगा।

कंपनी का फ़ेसबुक से विवाद:- मई 2020 में आई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि एनएसओ ग्रुप ने यूज़र्स के फ़ोन में हैकिंग सॉफ्टवेयर डालने के लिए फ़ेसबुक की तरह दिखने वाली वेबसाइट का प्रयोग किया, समाचार वेबसाइट मदरबोर्ड की एक जांच में दावा किया गया है कि एनएसओ ने पेगासस हैकिंग टूल को फैलाने के लिए एक फेसबुक के मिलता जुलता डोमेन बनाया। वेबसाइट ने दावा किया कि इस काम के लिए अमेरिका में मौजूद सर्वरों का इस्तेमाल किया गया, बाद में फ़ेसबुक ने बताया कि उन्होंने इस डोमेन पर अधिकार हासिल किया ताकि इस स्पाइवेयर को फैसले से रोका जा सके। हालांकि एनएसओ ने आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें “मनगढ़ंत” करार दिया था।

सऊदी सरकार को बेचा सॉफ्टवेयर:- कंपनी पर सऊदी सरकार को सॉफ्टवेयर देने का भी आरोप है, जिसका कथित तौर पर पत्रकार जमाल खशोग्जी की हत्या से पहले जासूसी करने के लिए इस्तेमाल किया गया था, दिसंबर 2020 में साइबर सुरक्षा से जुड़े शोधकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी के बनाए गए स्पाइवेयर से अल जज़ीरा के दर्जनों पत्रकारों का फ़ोन कथित तौर पर हैक कर लिया गया था। फेसबुक से जुड़े विवाद के दौरान कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा था, “हमें अपनी तकनीक और क्राइम और आतंकवाद से निपटने में इसकी भूमिका पर गर्व है, लेकिन एनएसओ अपने प्रोडक्ट का खुद इस्तेमाल नहीं करता।

कोरोनाकाल में फिर सामने आया नाम:- पिछले साल कंपनी ने ऐसे सॉफ़्टवेयर के निर्माण का दावा किया था जो कोरोनावायरस के फैलने की निगरानी और इससे जुड़ी भविष्यवाणी करने में मदद कर सकता है। इसके लिए मोबाइल फ़ोन डेटा का उपयोग करता है, एनएसओ के मुताबिक वो दुनिया भर की सरकारों के साथ बातचीत कर रहा था और दावा किया था कि कुछ देश इसका परीक्षण भी कर रहे हैं।

साइबर सुरक्षा के लिए भारत में उठाए गए कदम:- साइबर सुरक्षित भारत पहल इसे वर्ष 2018 में सभी सरकारी विभागों में मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (CISO) और फ्रंटलाइन आईटी कर्मचारियों के लिये सुरक्षा उपायों हेतु साइबर अपराध एवं निर्माण क्षमता के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वय केंद्र (NCCC):- वर्ष 2017 में NCCC को रियल टाइम साइबर खतरों का पता लगाने के लिये देश में आने वाले इंटरनेट ट्रैफिक और संचार मेटाडेटा (जो प्रत्येक संचार के अंदर छिपी जानकारी के छोटे भाग हैं) को स्कैन करने के लिये विकसित किया गया था।

साइबर स्वच्छता केंद्र:- इसे वर्ष 2017 में इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं के लिये मैलवेयर जैसे साइबर हमलों से अपने कंप्यूटर और उपकरणों को सुरक्षति करने हेतु पेश किया गया था।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C):- सरकार द्वारा साइबर क्राइम से निपटने के लिये इस केंद्र का उद्घाटन किया गया। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल को भी पूरे भारत में लॉन्च किया गया है।

पेगासस स्पाइवेयर पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बयान:- कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सोमवार को कहा कि वह इजराइली स्पाईवेयर पेगासस के जरिए कथित तौर पर फोन टैपिंग से बचने में कामयाब रहे, क्योंकि उन्होंने अपने उस पुराने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था जिसका जिक्र एल्गर परिषद-माओवादी से जुड़े मामले से संबंधित पत्र में किया गया था। इसके साथ उन्‍होंने कहा कि उन्होंने दिसंबर 2019 में पेगासस के जरिए कुछ व्यक्तियों पर कथित जासूसी का मुद्दा पहले ही उठाया था, दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘मैं एक नक्सली से दूसरे को लिखे पत्र में बताए गए उस नंबर पर व्हाट्सऐप पर नहीं हूं, जिसमें पुणे में मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात रही कि मैंने काफी समय पहले उस फोन (नंबर) का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था, इसलिए मुझे फंसाया नहीं जा सकता।

देश को जरूरत है इस सॉफ्टवेयर की:- भारत को आतंकवाद और देश विरोधी गैंग, टूलकिट गैंग से निपटने के लिए इस सॉफ्टवेयर की आवश्यकता है। क्योंकि देश की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से अगर देखा जाए तो भारत को बदनाम करने की साजिश हर वक्त रची जा रही है। इन सभी देश विरोधी ताकतों से निपटने के लिए पेगासस स्पाइवेयर की आवश्यकता है। क्योकि देश के अंदर पनप रहे स्लीपर सेल जैसे आतंकियों तक हमारी पहुँच आसान हो जाएगी, और देश विरोधी संगठनों और टूलकिट गैंग की सच्चाई सामने आएगी। ग्रीक माइथोलॉजी के अनुसार, पेगासस की उत्पत्ति देवता पोसाएडन और मेडूसा से हुई थी। यह एक सफेद रंग का ताकतवर घोड़ा होता है, जिसके बड़े-बड़े पंख होते हैं। ग्रीक माइथोलॉजी में पेगासस बुद्धिमत्ता और प्रसिद्धि का प्रतीक है।।