“श्रीमद्भगवद्गीता की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपादेयता” विषय पर शिक्षकनगर प्रतापगढ़ में एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ।

आयोजक राजेश मिश्र ने कहा कि गीता का संदेश आज की युवा पीढ़ी के परिप्रेक्ष्य में अत्यधिक प्रासंगिक है तथा इसके निहितार्थ को समझ कर आज के समाज में व्याप्त अनेक विसंगतियों को दूर किया जा सकता है।

डाo शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

प्रतापगढ़, 21 जुलाई।

“श्रीमद्भगवद्गीता की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपादेयता” विषय पर शिक्षकनगर में एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ।

आयोजक राजेश मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा की गीता का संदेश आज की युवा पीढ़ी के परिप्रेक्ष्य में अत्यधिक प्रासंगिक है तथा इसके निहितार्थ को समझ कर आज के समाज में व्याप्त अनेक विसंगतियों को दूर किया जा सकता है ।

श्रीमद्भगवद्गीता स्वाध्याय मंडल” जनपद प्रतापगढ़ के तत्वाधान में एक गोष्ठी इंजीनियर विशाल नाथ तिवारी के संयोजन एवं राजेश कुमार मिश्र के आयोजकत्व में “श्रीमद्भगवद्गीता की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपादेयता” विषय पर शिक्षक नगर में संपन्न हुई।

संगोष्ठी में पत्रकार अमित पांडेय, साहित्यकार अनूप अनुपम, डॉ गौरव त्रिपाठी, डॉक्टर सौरभ पांडेय, काशी नारायण मिश्र, श्री नारायण शुक्ला, आलोक ऋषिवंश, प्रभा शंकर पांडेय, सुरेंद्र प्रसाद पांडेय, प्रभात मिश्र, शीतांशु ओझा, विजय शंकर पांडेय, पंकज तिवारी, संजय शुक्ला, पीयूष जी, संतोष शुक्ला, विजय शंकर पांडेय आदि ने प्रतिभाग किया।

संयोजक विशाल नाथ तिवारी ने इस संस्था के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता के संदेश को हर घर तक पहुचाना इस संस्था का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश आधुनिक काल में भी प्रासंगिक है।

कार्यक्रम के उद्घाटन में डॉ. लाल जी त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य मड़ियाहूं स्नातकोत्तर कॉलेज, डॉ बृजभान सिंह, प्राचार्य पीवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय , और अनिल प्रताप त्रिपाठी प्रबंधक समाजसेवी द्वारा भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ संपन्न हुआ।

डॉ लालजी त्रिपाठी ने गीता के कर्म योग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने कर्म में रहते हुए उसमे आसक्ति से दूर रहने का संदेश दिया है। डॉ बृजभान सिंह ने गीता के अध्ययन से हमें जीवन जीने की कला का ज्ञान होता है।

डॉक्टर पीयूष कांत शर्मा ने गीता के ऐतिहासिक पक्ष पर अपने विचार रखे। समाजसेवी संजय शुक्ल ने आज के युवाओं में गिरते नैतिकता के स्तर को एवं सामाजिक मूल्य के प्रसार के लिए उपयोगी बताया।

पत्रकार अनूप त्रिपाठी ने कहा श्रीमद्भगवद्गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसमें कर्मकांड से दूर रहकर मनुष्य के लिए उपयोगी संदेश किए जाने का संदेश मिलता है।

इसके पूर्व आयोजक राजेश मिश्र ने पधारे सभी अतिथियों का अंगवस्त्रम्, श्रीफल, श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। भगवान श्री कृष्ण की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।