यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की शैक्षणिक डिग्री पर उठे सवाल।।

कोर्ट में 27 जुलाई को होगी सुनवाई। आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने लगाया फर्जी डिग्री लगाकर चुनाव लडऩे और पेट्रोल पंप हासिल करने का आरोप।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

रिपोर्ट- दिवाकर पांडेय संवाददाता

प्रयागराज, 21 जुलाई:- उत्तर प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनाव से पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की शैक्षणिक डिग्री पर सवाल खड़ा हो गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने लगाया फर्जी डिग्री लगाकर चुनाव लडऩे और पेट्रोल पंप हासिल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में स्थानीय अदालत में याचिका दाखिल कर मामले की जांच कराने की मांग की है। अदालत में इस मामले की सुनवाई 27 जुलाई 2021 को होगी।

आरोप है कि:- केशव प्रसाद मौर्य ने फर्जी डिग्री को आधार बनाकर चुनाव में अपनी शैक्षणिक योग्यता बताई और पेट्रोल पंप हासिल किया। केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ कोर्ट में इस आशय की अर्जी दाखिल कर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है। प्रार्थना पत्र स्थानीय मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रस्तुत किया गया है, जिस पर कोर्ट ने संबंधित थाने से रिपोर्ट तलब की है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई 2021 को होगी।

कोर्ट ने आदेश दिया कि जाँच रिपोर्ट पेश करे:- प्रकरण की सुनवाई कर रहीं एडिशनल सीजेएम नम्रता सिंह ने कैंट के थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि इन आरोपों की जांच कर रिपोर्ट पेश करें। यह भी पूछा है कि क्या इस संबंध में उनके थाने में केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ कोई मामला दर्ज है या नहीं। कोर्ट ने ऑफिस को भी निर्देशित किया है कि यह प्रार्थना पत्र 27 जुलाई 2021 को सुनवाई के लिए नियत समय पर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। प्रयागराज के करबला में रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने यह प्रार्थना पत्र दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत कोर्ट में दिया है। अदालत से मांग की है कि इस प्रकरण में कैंट थाना के प्रभारी को आदेशित किया जाए कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करें।

यह है पूरा मामला:- वर्ष 2007 में प्रयागराज शहर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से केशव प्रसाद मौर्य ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इसके बाद कई बार चुनाव लड़े। उन्होंने अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र में हिंदी साहित्य सम्मेलन के द्वारा जारी प्रथम, द्वितीया आदि की डिग्री लगाई है। यह प्रदेश सरकार या किसी बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। इन्हीं डिग्रियों के आधार पर केशव प्रसाद मौर्य ने इंडियन ऑयल कारपोरेशन से पेट्रोल पंप भी प्राप्त किया है। अर्जी में यह भी आरोप लगाया गया है कि शैक्षणिक प्रमाण पत्र में अलग-अलग वर्ष अंकित है। इनकी मान्यता नहीं है। दिवाकर ने बताया कि उन्होंने स्थानीय थाना, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर उत्तर प्रदेश, सरकार भारत सरकार के विभिन्न अधिकारियों मंत्रालयों को प्रार्थना पत्र दिया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मजबूर होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।।