उत्तरप्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी अनाथों को ढाई हजार प्रति माह और 12वीं के आगे शिक्षा मुफ्त।

कोरोना के अलावा अन्य कारणों से भी अनाथ हो गए सभी बच्चों को भी 2500 रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद के लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के अंतर्गत आर्थिक सहयोग प्रदान करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
राज्य संवाददाता (यूपी)
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

लखनऊ, 3 अगस्त।

उत्तरप्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी अनाथों को ढाई हजार प्रति माह और 12वीं के आगे शिक्षा मुफ्त।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कोरोना के अलावा अन्य कारणों से भी अनाथ हो गए सभी बच्चों को भी 2500 रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद देगी। इसके लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के अंतर्गत आर्थिक सहयोग प्रदान करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

इसके तहत अब 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे जिन्होंने कोविड-19 के अलावा अन्य कारणों से अपने माता-पिता दोनों या माता या पिता में से किसी एक या फिर अपने लीगल अभिभावक को खो दिया है, उन्हें 2500 रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के शुभारंभ के मौके पर कोरोना के अलावा अन्य कारणों से अनाथ बच्चों को भी आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी।

घोषणा के 11 दिन बाद ही कैबिनेट ने सोमवार को इसका प्रस्ताव पास कर दिया। साथ ही 18 से 23 वर्ष के ऐसे किशोर जिन्होंने कोरोना या अन्य कारणों से अपने माता-पिता दोनों या फिर माता या पिता में से किसी एक अथवा अभिभावक को खो दिया है तथा वह कक्षा 12 तक शिक्षा पूर्ण करने के बाद आगे की शिक्षा ले रहे हैं उन्हें आगे की शिक्षा में मदद दी जाएगी।

इंटर के बाद नीट, जेईई, क्लैट जैसे राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने वाले युवाओं को भी सरकार 2500 रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद प्रदान करेगी।

इस योजना के तहत जिनकी माता तलाकशुदा या परित्यक्ता हैं अथवा जिनके माता-पिता या परिवार का मुख्य कमाने वाला जेल में है या फिर ऐसे बच्चे जिन्हें बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति या बाल वैश्यावृत्ति से मुक्त कराकर परिवार या पारिवारिक वातावरण में समायोजित कराया गया है उन्हें भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

इस योजना का लाभ एक परिवार के अधिकतम दो बच्चों को मिल सकेगा। कैबिनेट ने योजना के संचालन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए भविष्य में जरूरी संशोधन एवं परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है।