लखनऊ: उत्तर प्रदेश आगामी पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण अधिसूचना जारी। चक्रानुक्रम रहेगा आरक्षण का फार्मूला।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क
रिपोर्ट: विकास पाण्डेय संवाददाता

  • 58194 ग्राम पंचायतों सहित 826 ब्लॉकों में वॉर्डों की संख्या का हुआ गठन।
  • अप्रैल माह में 58194 ग्राम पंचायतों, 731813 ग्राम पंचायत सदस्यों, 75855 क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं 3051 जिला पंचायत सदस्यों का होगा चुनाव।
  • इसके बाद 826 ब्लॉक प्रमुखों व 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का होगा चुनाव।
  • अनुसूचित जनजातियों के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष में नही होगा कोई आरक्षण।
  • ब्लॉक प्रमुख के 5 एवं 330 ग्राम पंचायत के पद रहेंगे अनुसूचित जनजातियों के लिए रहेंगे आरक्षित।
  • अनुसूचित जातियों के लिए 16, पिछड़ी जातियों के लिए 20 एवं महिलाओं के लिए 25 जिला पंचायत अध्यक्ष के पद रहेंगे आरक्षित।
  • ग्राम पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजातियों के लिए 330, अनुसूचित जातियों के 12045 तथा पिछड़ी जातियों के लिए 15712 सीटें रहेंगी आरक्षित जबकि 30107 सीटों पर नही होगा कोई आरक्षण।
  • प्रदेश के कुल 826 ब्लॉक प्रमुख के पदों में अनुसूचित जनजातियों के लिए 5, अनुसूचित जातियों के लिए 171 एवं पिछड़ी जातियों के लिए 223 पद रहेंगे आरक्षित जबकि 427 सीटें रहेंगी अनारक्षित।

लखनऊ
यूपी में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है। इसके बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। अपर मुख्य सचिव मनाेज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में सभी जिलाधिकारियों को कहा गया है कि जहां तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों यानी सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, 2000, 2010 और वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जाएगी। पंचायत चुनाव में रोटेशन रिजर्वेशन लागू किया जाएगा, पिछले 5 निर्वाचन में हुए आरक्षण का संज्ञान लिया जाएगा। सिंह ने कहा कि जो पद पहले कभी आरक्षित नहीं हुए, उन्हें वरीयता दी जाएगी। जबकि ‘एससी, ओबीसी, महिला के क्रम में पिछले निर्वाचन को देखते हुए आरक्षण लागू किया जाएगा। शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के पदों का आरक्षण ज़ारी किया जाएगा। इसके अलावा जिले स्तर पर ग्राम पंचायतों का आरक्षण ज़ारी किया जाएगा।’ 2015 में आरक्षण की जो स्थिति है वह 2021 में नहीं होगी। जो पद शेड्यूल कास्ट या फिर शेड्यूल कास्ट महिला के लिए हैं, वे अनारक्षित व ओबीसी हो सकते हैं। कोई भी ऐसा पद जो आज तक शेड्यूल कास्ट के लिए आरक्षित नहीं किया गया है वह शेड्यूल कास्ट के लिए आरक्षित होगा। जैसे जिला पंचायत का कोई अध्यक्ष पद नहीं आरक्षित रहा है, वह आरक्षित हो सकता है फिर इसी तरह यह देखा जाएगा कि कोई ऐसा पद जो ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं हुआ है वह ओबीसी के लिए आरक्षित होगा, फिर इसी तरह महिला आरक्षण को भी देखा जाएगा और इसी तरह से क्रम में आरक्षण लागू किया जाएगा।

6 दिन के भीतर दर्ज करानी होगी आपत्ति।

11 से 15 तारीख के बीच में जिला पंचायतों की 20% सीटें आरक्षित होंगी। पूरे प्रदेश में 2 जिला पंचायत ऐसी थीं जो आज तक शेड्यूल कास्ट के लिए नहीं आरक्षित हुईं एवं 7 ऐसी जिला पंचायतें थीं जो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं हुईं। 826 ब्लॉकों में जिलेवार किस श्रेणी में आरक्षण होगा, यह राज्य स्तर पर तय किया जाएगा एवं जिला पंचायतों की आरक्षण प्रक्रिया भी राज्य स्तर पर जारी होगी। पुरानी व्यवस्था के तहत चुनावों में शिक्षा का कोई रोल नही होगा। 2 मार्च से लेकर 8 मार्च तक, 6 दिन के बीच मे लिखित आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर 30 अप्रैल तक पंचायतों के चुनाव सम्पन्न कराने का आदेश जारी किया हैं।