अफगानिस्तान की छात्रा ने मेडिकल परीक्षा में किया टॉप बनना चाहती थी डॉक्टर, पर अब टूट गई उम्मीद।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

काबुल, 03 सितंबर:- काबुल एयरपोर्ट से अमेरिकी सेना के जाने के बाद अफगानिस्तान से लोगों के पलायन का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तालिबान की क्रूरता और उनकी खौफ की वजह से लोग किसी भी तरह देश छोड़ देना चाहते हैं। एयरपोर्ट बंद है, लेकिन लोगों के पैर नहीं। अफगानिस्तान से लगे पाकिस्तान, तुर्की और ईरान बॉर्डर का है। यह इलाका पहाड़ों और रेतीले रास्तों से होकर पड़ोसी देश की सीमाओं को छूता है। काबुल एयरपोर्ट पर तालिबानी लड़ाकों के कब्जे के बाद लोग इन्हीं रास्तों से इन मुल्कों में अपनी जान की दुहाई देकर शरण ले रहे हैं। हजारों की संख्या में महिलाएं (गर्भवती भी शामिल), बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान इन रास्तों से तालिबान के साए से दूर जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीड़ में कई ऐसे लोग भी हैं, जो पैदल ही 1500 किलोमीटर पैदल चलकर तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान भाग रहे हैं।

मेडिकल टॉपर के टूट गए सपने:- 20 साल की साल्गी को पिछले हफ्ते जब पता चला कि उसने यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में टॉप किया है, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पिछले कई महीनों से साल्गी अपने घर में बंद इस परीक्षा की तैयारी में जुटी थी, और जब रिजल्ट आना था तो उनका पूरा परिवार सोलर एनर्जी से चलने वाले टीवी के सामने डटा था। साल्गी कहती हैं कि उनकी मेहनत रंग लाई है, वह बताती हैं, “उस पल में मुझे लगा कि किसी ने मुझे पूरी दुनिया तोहफे में दे दी है। मेरी मां खुशी से रोने लगी और उसके साथ मैं रोने लगी।

12 साल की कोशिशों के मिला फल:- परीक्षा का परिणाम मालूम होने के वक्त को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 12 साल की कोशिशों का फल अंत में प्राप्त हुआ है। मुझे खुशी की सीमा नहीं है। इस साल अफगानिस्तान की राष्ट्रीय युनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वाले परीक्षार्थियों की कुल संख्या 179927 है। सल्गी बारान टॉपर बन गयीं। सल्गी का जन्म मध्यपूर्व अफगानिस्तान के लाघमान प्रांत में एक मध्यम आय वाले परिवार में हुआ। उनके परिवार में कुल 11 बच्चे हैं और वे दसवीं संतान है। वर्ष 2015 में उनका परिवार काबुल में आया। जब वे 7 वर्ष की थी, तो उनके पिता जी का एक चिकित्सक घटना में देहांत हो गया। इसी कारण उन्होंने मेडिकल सीखने का फैसला किया ।अब उन का सपना पूरा होगा। उन्होंने काबुल विश्वविद्यालय के चिकित्सा कॉलेज को चुना है। उन्होंने बताया कि अगर वर्तमान नेता अपने वादे का पालन कर महिला को पढ़ने और काम करने देंगे, तो बड़ी अच्छी बात होगी। अगर संभव है, तो मैं अपनी पढ़ाई में डटी रहूंगी। अगर घरेलू शर्त नहीं है, तो मैं विदेश में पढ़ना चाहती हूं। पढ़ाई नहीं चाहने वाली या पढ़ाई में मेहनत नहीं करने वाली लड़कियों की चर्चा में सालगी ने बताया कि हम देश की आशा हैं। हमें अपने पर निर्भर रहना है। अफगानिस्तान हमारी समान माता जी है। हम एक नये अफगानिस्तान के लिए एक साथ कोशिश करें।

तालिबान से हार के बाद अमेरिकी राजनीति में भूचाल:- अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना ‘हार कर’ देश से बाहर चली गई है। तालिबान ने अमेरिका को 31 अगस्त तक देश छोड़ने के लिए कहा था, लेकिन एक दिन पहले ही अमेरिका ने अफगानिस्तान खाली कर दिया और काबुल एयरपोर्ट से आखिरी अमेरिकी विमान उड़ते ही तालिबान ने आजादी की घोषणा कर दी। लेकिन, अमेरिका के अंदर अफगानिस्तान के अंदर मिली इस हार से लोग भारी गुस्से में हैं। पूर्व रक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री और अधिकारियों को फौरन अपना पद छोड़ने के लिए कहा है।

अफगानिस्तान में संकट से निपटने में जो बाइडेन प्रशासन की नाकामयाबी ने अमेरिका को हिला कर रख दिया:- अमेरिका के दर्जनों रिटायर्ट सेनाअधिकारी, जनरलों और एडमिरल्स से बाइडेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बाइडेन सरकार की जमकर आलोचना की जा ही है और अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले से इस्तीफा देने की मांग की जा रही है। पूर्व रक्षा अधिकारियों का कहना है कि बाइडेन सरकार के मौजूदा अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं और उन्हें अपने पदों पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। अमेरिकी सेना ने सोमवार को अफगानिस्तान में अपने दो दशक लंबे मिशन को समाप्त कर दिया है।

अमेरिका के दर्जनों पूरे सैन्य अधिकारियों ने एक ओपन लेटर लिखा है और कहा कि:- अफगानिस्तान से अमेरिका की इस खतरनाक वापसी के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और मार्क मिले जिम्मेदार हैं और इन दोनों को अपने पदों पर रहने का कोई हक नहीं है’। अमेरिका के पूर्व अधिकारियों ने कहा कि ‘रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और मार्क मिले को नैतिकता के आधार पर अंतर्रात्मा की आवाज को सुनते हुए फौरन अपना पद छोड़ देना चाहिए’। अमेरिकी पूर्व सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ”अमेरिकी मिशन का अंत एक अराजक और खूनी वापसी के साथ हुआ है, जिसमें सैकड़ों अमेरिकी नागरिक और हजारों ऐसे अफनानी नागरिक फंसे हुए थे, जिन्होंने पिछले 20 सालों से अमेरिका का साथ दिया था, लेकिन सरकार ने उन्हें बेबस छोड़ दिया।

अमेरिका के रक्षा मंत्री ने कहा:- अफगानिस्तान से आखिरी अमेरिकी विमान उड़ने के बाद एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं और उन्होंने कहा कि ”आज हमने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों और सेना को बाहर निकालने का काम पूरा कर लिया है। मुझे गहरा दुख है कि इस ऐतिहासिक निकासी के दौरान हमने अपने 13 लोगों को खो दिया और क्रूर आतंकवादियों द्वारा कई बेगुनाह लोग मारे गये।” उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि ”इस ऑपरेशन का अंत अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध के के खत्म होने का संकेत दे रहा है”। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि ”पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान मिशन के दौरान अमेरिका को काफी नुकसान हुआ है और अब अमेरिकी सैनिकों की जान ना जाए, इसके लिए सबसे बेहतर तरीका अफगानिस्तान मिशन को खत्म करना था।” अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने काबुल से लोगों को निकालने के इस रेस्क्यू मिशन को इतिहास का सबसे बड़ा एयरलिफ्ट करार दिया है और कहा है कि अमेरिकी सैनिकों के साथ साथ अमेरिकी सैनिकों की मदद करने वाले अफगानों को मिलाकर पिछले दो हफ्तों में करीब एक लाख 20 हजार लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकाला गया है।

अब तालिबानियों का कब्जा काबुल एयरपोर्ट पर:- अमेरिकी सैनिकों के लेकर जैसे ही आखिरी प्लेन ने काबुल एयरपोर्प छोड़ा, ठीक वैसे ही तालिबान ने पूरे एयरपोर्ट को अपने कब्जे में ले लिया और पूरे रनवे पर तालिबान के लड़ाकों ने दौर लगाते हुए अपनी जीत का ऐलान करना शुरू कर दिया। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस मौके पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि ‘अब दुनिया को अफगानिस्तान को देखते हुए सबक सीखना चाहिए, तालिबान के लड़ाकों ने अपने मोबाइल फोन से अमेरिकी अधिकारियों के निकलने का वीडियो भी बनाया है। जो अब पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है।।