अफगानिस्तान में अब तालिबान की खूँखार सरकार, जानिए कौन सा आतंकी क्या बना।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

वर्ल्ड, 08 सितंबर:- अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी सरकार का ऐलान कर दिया है, तालिबान की इस सरकार में ट्रेजेडी भी है, कॉमेडी भी है और सरप्राइज भी है। सरप्राइज ये है कि तालिबान की इस सरकार में प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर नहीं मुल्ला हसन अखुंद होगा। मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद कोई अनजाना नाम नहीं है। अखुंद फिलहाल रहबारी शूरा का मुखिया हैं जो तालिबान की सबसे शक्तिशाली निर्णय लेने वाली संस्था है। तालिबान के पिछले शासन के दौरान भी अखुंद प्रधानमंत्री रहे थे। अखुंद को एक कट्टर धार्मिक शख्सियत माना जाता है। मुल्ला हसन तालिबान के पहले सुप्रीम लीडर मुल्ला उमर के ख़ास सहयोगी और तालिबान का सह-संस्थापकों में से एक है। बामियान में बुद्ध की मूर्तियां तोड़ने वालों में भी वह शामिल रहा है। तालिबान के वर्तमान सुप्रीम नेता मुल्ला हेब्तुल्लाह अखुंदजादा का ख़ास विश्वसनीय है।

मुल्ला हसन अखुंद बना प्रधानमंत्री:- अब तक दुनिया भर के मीडिया में मुल्ला बरादर का नाम प्रधानमंत्री के तौर पर चल रहा था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रेजेडी ये है कि अफगानिस्तान का नया प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद खुद एक अतंर्राष्ट्रीय आतंकवादी है यानी तालिबान ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि अब वो खुल्लम खुल्ला बन्दूक की नोक पर आतंकवादियों की सरकार चलाएगा। अफगानिस्तान में आतंकवादियों की ही सरकार चलेगी, ये दुनिया के लिए बहुत ख़तरनाक बात है। कॉमेडी ये है कि अब कुछ ही दिनों में आप अफ़ग़ानिस्तान के इन आतंकवादियों को व्हाइट हाउस में बैठ कर जो बाइडेन के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देखेंगे और पूरी दुनिया में अमन शांति और विकास की बातें कर रहे होंगे।

जो सुसाइड बॉम्बर तैयार करता है, वो गृह मंत्री बनेगा:- यानी अफगानिस्तान मे एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी प्रधानमंत्री बनेगा, जो बुर्का नहीं पहनने पर महिलाओं को कोड़े मारने की सज़ा देता है। सिराज़ुद्दीन हकाकीन जैसा आतंकवादी, जो सुसाइड बॉम्बर तैयार करता है, वो गृह मंत्री बनेगा। दुनिया के साथ इससे बड़ा और भद्दा मज़ाक़ और क्या हो सकता है। हमने तालिबान की सरकार बनाने वाले इन आतंकवादियों के बायो डेटा निकाले हैं। आपके इनके बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। प्रधानमंत्री बनने वाले आतंकवादी का पूरा नाम मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद है।

शरिया कानून का कट्टर समर्थक है हसन अखुंद:- इसका परिचय ये है कि ये तालिबान के संस्थापकों में से एक है, इसे इस्लाम धर्म का विद्वान माना जाता है और ये शरिया क़ानून का कट्टर समर्थक है। ये बम धमाकों से जेहाद फैलाने की ट्रेनिंग भी दे चुका है। अनुभव की बात करें तो तो ये तालिबान की पहली सरकार में काम कर चुका है। इसके पास अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी होने का अनुभव है, ये संयुक्त राष्ट्र की घोषित आतंकवादियों की सूची में भी शामिल है। नाटो देशों की सेनाओं पर जेहादी हमलों का नेतृत्व कर चुका है और हज़ारों आतंकवादियों को सुसाइड बॉम्बर्स बनाने का अनुभव भी इसके पास है। इसके अलावा तालिबान में सभी बड़े फ़ैसले लेने वाली लीडरशिप काउंसिल रहबरी शूरा का ये प्रमुख है। अखुंद का नाम संयुक्त राष्ट्र की आतंकी की सूची में शुमार है। दोहा शांति समझौते के दौरान अमेरिका ने कहा था कि वह अखुंद का नाम आतंकी सूची से हटवा देगा लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। अखुंद का कोई सैन्य अनुभव नहीं है। वह एक धार्मिक नेता है। तालिबान के भीतर उसकी साख अपने चरित्र, धार्मिकता और भक्ति के चलते है। अखुंद की पोजीशन की मजबूती इसलिए भी है कि वह तालिबान में मूल 30 संस्थापक सहयोगियों में शुमार है।

इस वजह से पीएम बना मुल्ला अखुंद:- इसका उद्देश्य अफगानिस्तान में शरिया क़ानून को फिर लागू करना और अफगानिस्तान के बाद कश्मीर, इराक, सीरिया और यमन जैसे देशों में जेहाद की नई लड़ाई शुरू करना है। ये वो तमाम बातें हैं, जिनके आधार पर मुल्ला हसन को तालिबान सरकार में प्रधानमंत्री बनाया गया। दुनिया के साथ इससे बड़ा और भद्दा मज़ाक क्या हो सकता है। मुल्ला हसन की सरकार में मुल्ला बरादर को उप प्रधानमंत्री बनाया गया है, मुल्ला बरादर का पूरा नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर है। ये भी तालिबान के संस्थापकों में से एक है और तालिबान की आतंकवादी गतिविधियों को राजनीतिक रूप से सही ठहराता है। वह पाकिस्तान की जेल में आठ साल बन्द रह चुका है, ये तालिबान की पहली सरकार में उप विदेश मंत्री रह चुका है। आत्मघाती हमले कराने में माहिर है, अब तक कई आतंकवादियों को सुसाइड जैकेट्स पहना कर बड़े हमले करवा चुका है।

बरादर की छिन गई कुर्सी:- इसकी हॉबी एक नेता जैसा दिखने की है, ये दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक है। इसका उद्देश्य भी दुनिया में इस्लाम के राज को स्थापित करना है। पहले खबरें ये थीं कि मुल्ला हसन की जगह इसे प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन दो वजहों से ऐसा नहीं हो पाया। पहली वजह ये रही कि तालिबान में उसे लेकर ये धारणा बन गई है कि वो अमेरिका का करीबी है। दूसरी वजह इसके पीछे पाकिस्तान है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान चाहता था कि तालिबान सरकार का नेतृत्व ऐसे नेता के पास हो, जिसे किसी ने ना देखा हो और जो अंतरराष्ट्रीय दबाव में भी ना आए। मुल्ला बरादर इन दोनों शर्तों पर ही खरा नहीं उतरता और शायद इसी वजह से उसे प्रमुख नहीं बनाया गया है।

मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी बनेगा डिप्टी पीएम:- मुल्ला बरादर के अलावा मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी भी अफगानिस्तान में उप प्रधानमंत्री होगा। यानी सरकार में दो उप प्रधानमंत्री होंगे, मुल्ला अब्दुल सलाम हनाफी पिछले साल अमेरिका और तालिबान के बीच हुए दोहा शांति समझौते में शामिल था। उसने सोमवार 06 सितंबर की सुबह ही अफगानिस्तान में चीन के राजदूत से मुलाकात की है। इससे आप तालिबान की इस सरकार में चीन के प्रभाव को भी समझ सकते हैं। हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराज़ुद्दीन हक्कानी को तालिबान सरकार में गृह मंत्री बनाया गया है। गृह मंत्री का काम देश में आतंरिक शांति को स्थापित करना होता है, वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी पिछले लगभग 25 वर्षों से अफगानिस्तान में आंतरिक अशांति का सबसे बड़ा कारण रहा है। इसलिए हक्कानी को गृह मंत्री बनाना किसी कॉमेडी से कम नहीं है।

हक्कानी पर 38 करोड़ रुपये का इनाम:- सिराज़ुद्दीन हक्कानी अमेरिका की ओर से घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भी है. उस पर अमेरिका ने 5 मिलियन डॉलर यानी 38 करोड़ रुपये का इनाम रखा है। आपने ऐसा खूंखार गृह मंत्री दुनिया में कहीं नहीं देखा होगा. हक्कानी द न्यू यॉर्क टाइम में लेख भी लिख चुका है।

मुल्ला याकूब अफगानिस्तान का नया रक्षा मंत्री:- मुल्ला याकूब, मुल्ला उमर का बेटा है। जो तालिबान की पहली सरकार का प्रमुख था और मुख्य संस्थापक भी था। ये भी अफगानिस्तान का एक बहुत बड़ा आतंकवादी है। आमिर खान मुत्ताकी विदेश मंत्री होगा। मुत्ताकी को तालिबान के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में गिना जाता है। सोचिए अब अफगानिस्तान के विदेश मामलों को एक आतंकवादी देखेगा। दुनिया टेबल पर बैठ कर इस आतंकवादी के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर करेगी।

खैरुल्लाह खैरख्वाह सूचना प्रसारण मंत्री होगा:- ये आतंकवादी अमेरिका की जेल में 12 साल रह चुका है, अब ये व्हाईट हाउस में बैठ कर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा।

कट्टरपंथी अब्दुल हकीम होगा न्यायमंत्री:- आतंकवादी अब्दुल हकीम न्याय मंत्री होगा। अब्दुल हकीम अब तक लाखों लोगों को कट्टरपंथी बना चुका है, इसे शरिया क़ानून का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। सोचिए जब ऐसे आतंकवादी न्याय मंत्री होंगे तो अफगानिसस्तान में लोगों के साथ कैसे न्याय होगा। मुल्ला हिदायत बदरी को वित्त मंत्री बनाया गया है, जो तालिबान की फंडिंग का हिसाब किताब रख चुका है। इसे हथियारों की ख़रीद फरोख्त के लिए जाना जाता है।

स्टेनकजई बनेगा उप विदेश मंत्री:- शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई उप विदेश मंत्री होगा। वो 1982 में देहरादून की मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग ले चुका है और उसके पास मुजाहिदीन संगठनों के साथ तालिबान में भी काम करने का लम्बा अनुभव है। पिछले दिनों दोहा में भारतीय दूतावास से स्टेनकजई ने मुलाकात की थी।

आतंकियों को ट्रेनिंग देने का आरोप भी पाकिस्तान की सेना पर है:- तालिबान के प्रमुख मुजाबिदीन कमांडर जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान के शीर्ष नेताओं में से एक है। यह हक्कानी नेटवर्क को भी संचालित करता है, जो तालिबान का सहयोगी संगठन है। यह संगठन पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान की वित्तीय और सैन्य संपत्ति की देखरेख करता है। हक्कानी नेटवर्क को भी तालिबान की तरह ही पाकिस्तान से समर्थन प्राप्त है। इतना ही नहीं, हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को ट्रेनिंग देने का आरोप भी पाकिस्तान की सेना पर है। सिराजुद्दीन हक्कानी कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसके ऊपर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर यानि करीब 70 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया है। सिराजुद्दीन हक्कानी को पीछे से पाकिस्तान का पूरा समर्थन हासिल है। बताया जाता है कि आईएसआई हक्कानी ग्रुप का इस्तेमाल अपने हित साधने के लिए करता है।।