4G से कितना अलग होने वाला है 5G नेटवर्क, आखिर कब तक यह लांच होगा भारत मे।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

टेक्नोलॉजी, 10 सितंबर:- भारत में रिलायंस जियो के बाजार में आने के बाद से लोगों ने असल मायने में 4G क्षमता को देखा है। इसके अलावा सस्ते इन्टरनेट की शुरुआत भी उसी दिन से हुई थी। हालाँकि अब यह दौर बदल गया है, और आज हम देख रहे हैं कि लगभग सभी टेलीकॉम कंपनियों की ओर से अपने टैरिफ प्लान्स की कीमत में बढ़ोत्तरी की है। एक दौर था जब हम मात्र 2G नेटवर्क पर ही नेट का इस्तेमाल किया करते थे, इसके बाद 3G ने अपनी जगह बाजार में बनाई और इसके बाद 4G ने अपनी एक अलग ही जगह बनाई है। आखिर 5G और 4G के बीच बड़ा क्या अंतर है, जिसके माध्यम से यह दोनों ही नेटवर्क एक दूसरे से बिलकुल ही अलग नजर आते हैं।

जब 4G नेटवर्क ने भारत मे रखे थे अपने कदम:- 5 सितंबर, 2016 का वह समय तो आपको याद ही होगा, जब टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जिओ ने 4G को लांच कर तहलका मचा दिया था। ऐसा नहीं है कि उसके पहले भारत में इंटरनेट मौजूद नहीं था। 1981 में 1जी, 1992 में 2जी, और 2001 में 3G वाला मोबाइल नेटवर्क आ चुका था। किन्तु, क्रांति शब्द, खासकर ‘रिलायंस’ जियो के 4G के साथ ज्यादा मुफ़ीद बैठता है।

क्या है 5G नेटवर्क:- 5G को सेल्युलर मोबाइल सर्विस की 5वां पीढ़ी कहा जा सकता है, जो अपनी सुपर फास्ट डाटा सर्विस के चलते चर्चा का विषय बना रहता है। इसे मिलीमीटर वेब्स, स्मॉल सेल, मैसिव माइमो, बीमफॉर्मिंग और फुल डुप्लेक्स के संगम से विकसित किया गया है। इनकी मदद से उम्मीद जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में इंटरनेट की स्पीड 1000mbps तक पहुंचा जाएगी। 4G के मुकाबले 10-20 गुना तेज डाटा डाउनलोड स्पीड। भारत भी इसका लाभ ले सके, इसके लिए ट्राई ने 2017 में इससे जुड़ा एक खाका तैयार किया था।

डिजिटल युग के लिए यह नेटवर्क कितना महत्वपूर्ण हो सकता:- इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया की बड़ी मोबाइल डिवाइस कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को बनाने की तैयारी में जुटी गई हैं। आपके मन में सवाल हो सकता है कि आखिर 5G की जरूरत क्यों, दरअसल जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है। वैसे-वैसे  स्मार्टफोन और इंटरनेट से चलने वाले अन्य डिवाइसेज की संख्या भी बढ़ रही है। परिणाम स्वरूप वर्तमान में प्रयोग वाली 6 गीगाहर्ट्ज वाली फ्रीक्वेंसी धीमी पड़ रही है। कई बार तो यह जाम तक हो जाती है, वहीं, वेवलेंथ छोटी होने के कारण मिलीमीटर वेब्स उतना अच्छे से ट्रेवल नहीं कर पाते, जितना करना चाहिए।

मौसम भी इसमें बाधक बनता है:- बारिश वाले माहौल में तो यह खासा प्रभावित होता है, यही कारण है कि मिलीमीटर वेब्स, स्मॉल सेल, मैसिव माइमो, बीमफॉर्मिंग और फुल डुप्लेक्स के संगम से 5G को तैयार किया गया। इसमें मिलीमीटर वेब्स के जरिए 30 से 300 गीगाहर्ट्ज का खाली फ्रीक्वेंसी बैंड काम में लाया जाया जाएगा, जिससे रफ्तार मिलना लाजमी है। इसी तरह दूसरे उपकरण भी अपना-अपना काम करेंगे।

5G एक उच्च तकनीकी होगी:- लिहाजा, वायरलेस नेटवर्क बहुत तेज हो सकता है, कितना तेज होगा, इसको ऐसे समझिए कि आपकी फुल एचडी फिल्म पलक झपकते ही डाउनलोड हो जाएगी। यही नहीं बताया तो यहां तक जा रहा है कि इसकी मदद से एक गाड़ी, दूसरी गाड़ी से कनेक्ट हो सकेगी। डाटा तय करेगी कि उनको एक-दूसरे से कितनी दूरी पर होना चाहिए, कितनी तेज चलना चाहिए और भी बहुत कुछ।

क्या होता है 4G:- इसे सीधे शब्दों में कहें, तो 4G को मोबाइल प्रौद्योगिकी की चौथी पीढ़ी के रूप में परिभाषित किया गया है जो 2G और 3G नेटवर्क के बाद सामने आई है, या ऐसा भी कह सकते हैं कि जो 2G और 3G का अनुसरण करती है। इसे कभी-कभी 4G एलटीई भी कहा जाता है, लेकिन यह तकनीकी रूप से सही नहीं है क्योंकि एलटीई केवल एक प्रकार का 4G है। वर्तमान में यह सबसे उन्नत तकनीक है जिसे अधिकांश मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाताओं द्वारा अपनाया जा रहा है, जब यह शुरू में बाजार में आया तो 4G ने दुनिया में एक बड़ा बदलाव किया, हम मोबाइल इंटरनेट का उपयोग कैसे करते हैं, इसे भी 4G ने पूरी तरह से बदलकर रख दिया। जबकि 3G नेटवर्क अपेक्षाकृत तेज़ है, और इसमें कोई भी दोराय नहीं है, लेकिन 4G नेटवर्क कनेक्शन ने उपयोगकर्ताओं को वेब ब्राउज़ करने और मोबाइल उपकरणों पर एचडी वीडियो स्ट्रीम करने की आज़ादी दी, जिसके बाद स्मार्टफोंस आधुनिक युग के कंप्यूटरों में बदल गए। इसी कारण आप वह सभी काम जो लैपटॉप या डेस्कटॉप कंप्यूटर पर स्मार्टफोन या टैबलेट जैसे मोबाइल उपकरणों पर कर सकते हैं। इन्हें करने में 4G नेटवर्क सुनिश्चित करता है कि आपको कितने भी डाटा की आवश्यकता हो, आप लगभग हर जगह स्थिर गति पा सकते हैं।

5G और 4G में क्या होगा मुख्य अंतर:- टेक कंपनियां 5G से काफी आशाजनक हैं। जबकि सैद्धांतिक 100 मेगाबिट्स प्रति सेकंड (एमबीपीएस) में 4G टॉप पर है, हालाँकि 5G के मामले में यह टॉप 10 गीगाबिट्स प्रति सेकंड (जीपीएस) होने वाला है। इसका मतलब है कि 5G वर्तमान 4G तकनीक की तुलना में सौ गुना तेज होने वाला है। उदाहरण के लिए, उपभोक्ता प्रौद्योगिकी एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में ऐसा भी सामने आ चुका है कि इस गति से, आप 5G पर केवल 3.6 सेकंड में, 4G पर 6 मिनट बनाम 3G पर 26 घंटे में दो घंटे की फिल्म डाउनलोड कर सकते हैं। यह सिर्फ कहने वाली बात नहीं है, 5G में विलंबता को कम करने का वादा किया गया है, जिसका अर्थ है कि इंटरनेट पर कुछ भी करने के दौरान तेजी से लोड समय और बेहतर जवाबदेही बनने वाली है। विशेष रूप से, विनिर्देश आज 4G LTE पर 5G बनाम 20ms पर 4ms की अधिकतम विलंबता का वादा करता है।

क्षमता:- कई बार ऐसा होता है कि अगर किसी जगह पर एक साथ कई लोग मौजूद होते हैं और वो वहां इंटरनेट पर कुछ ओपन करने की कोशिश करते हैं तो वो बफर होने लगता है और पेज ओपन नहीं हो पाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी एक जगह पर जब एक साथ कई लोग इंटरनेट एक्सेस कर रहे होते हैं तो कंजेशन बढ़ जाता है। इस वजह से इंटरनेट स्लो हो जाता है। यूजर्स को इस परेशानी से 5G निजात दिलाएगा। इसकी क्षमता 4G से ज्यादा होगी। 5G के जरिए किसी भी नेटवर्क से ज्यादा से ज्यादा डिवाइसेज को कनेक्ट किया जा सकेगा।

लैटेंसी:- स्पीड और लैटेंसी के बीच बहुत छोटा अंतर है। आपको अपने फोन में किसी कंटेंट को डाउनलोड करने में या फिर वेबपेज लोड होने में कितना समय लग रहा है यह स्पीड पर निर्भर करता है। वहीं, जब आप अपने किसी दोस्त को मैसेज भेजते हैं तो वो उसके पास कब तक पहुंचता है यह लैटेंसी पर निर्भर करता है। आपको बता दें कि लैटेंसी मिलीसेकेंड पर निर्भर करती है। वैसे 4G के साथ भी लैटेंसी काफी कम है लेकिन 5G के साथ यह जीरो हो सकती है। यानी आप किसी को कोई मैसेज करेंगे तो वो तुरंत ही दूसरे व्यक्ति के पास पहुंच जाएगा। अभी कई बार ऐसा होता है कि मैसेज दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने में कुछ समय लग जाता है।।