दिल्ली से गिरफ्तार यूसुफ उर्फ मुस्तकीम आतंकी संगठन आईएस की नीतियों से प्रभावित होकर पूरी दुनिया में खलीफा साम्राज्य स्थापित करने का हिमायती बन गया था।

जकात के पैसे से विस्फोटक जमा किया, आत्मघाती जैकेट बनाया, कब्रिस्तान में बिस्फोटक का परीक्षण किया और निकल पड़ा अल्लाह के काम पर।

डा. एस. के. पाण्डेय
राज्य संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क

लखनऊ, 26 अगस्त।
दिल्ली में गिरफ्तार बलरामपुर जिले का निवासी आतंकी यूसुफ उर्फ मुस्तकीम ने कबूल किया है कि सऊदी में रहने वाले उसके मामा ने ईद में 40 हजार रुपये जकात के नाम पर भेजे थे। उसी पैसे से घर में विस्फोटक जमा किए और आत्मघाती जैकेट बनाया। वह इसे अल्लाह का काम मानता है। उसकी मां बताती है कि बेटे का कहना था कि मेरे और अल्लाह के बीच में दूसरा कोई नहीं है। आतंकी संगठन आईएस की नीतियों से प्रभावित होकर वह पूरी कायनात में खलीफा साम्राज्य स्थापित करने का हिमायती बन गया था।

गांव के कब्रिस्तान में विस्फोट के बारे में यूसुफ ने बताया कि उसने पहली बार बम बनाया था, जिसका परीक्षण वहां किया था। वह घर से ही विस्फोटक की खेप लेकर दिल्ली के लिए निकला था।

अबू यूसुफ की गिरफ्तारी व कुबूलनामे के बाद ग्रामीणों को ये पता चला कि यह धमाका अबू यूसुफ ने किया था। यूसुफ की गिरफ्तारी के बाद से गांव वाले डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि हम लोग अप्रैल से कब्रिस्तान में हुए धमाके को कुदरत का कहर मानकर डरे-सहमे थे। अंधेरा होते ही तेज धमाके के साथ आग का गोला दिखाई दिया था। अब पता चला है कि ये विस्फोट अबू यूसुफ ने बम बनाने की तकनीक सीखने के दौरान ट्रायल के लिए किया था। उन लोगों ने बताया कि यूसुफ ने इसके पहले भी कब्रिस्तान में धमाका किया था।

उसकी गिरफ्तारी के बाद लोग डरे सहमे हुए हैं।
गांव में अफवाह है कि यूसुफ के साथी कभी भी गांव में हमला कर ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ग्रामीणों को रोककर यूसुफ के बारे में कुछ भी पूछने पर वे लोग बिना कुछ बोले ही भाग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उसने गांव की इज्जत पूरे देश में खराब कर दी है। गांव के लिए अब यूसुफ एक बदनुमा दाग बन गया है। यूसुफ के परिजनों से भी गांव वाले मिलने से कतरा रहे हैं। यूसुफ के पिता की दिमागी हालत भी बिगड़ने लगी है। ग्रामीण बता रहे हैं कि वह रह रहकर अपने बाल नोचते हुए आतंकी करतूतों के लिए बेटे को कोसते दिख रहे हैं।

अबू यूसुफ की वृद्ध मां कहकशां कहती है कि उसके गलत कामों का जब भी हम लोग विरोध करते थे वह कहता था कि मेरे व अल्लाह के बीच तीसरा कोई नहीं है। यूसुफ तो दो सालों से अपनी धुन में मस्त होकर आतंकी साजिश की तैयारी कर रहा था।

यूसुफ के बाप का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी उसके बुरे कर्मों का फल है। हां यह जरूर है कि वह भटक गया था। मेरी गुजारिश है कि सरकार उसे सुधरने का एक मौका जरूर दे। बाकी हम लोग अल्लाह से भी उसके गुनाहों की माफी के लिए दुआ कर रहे हैं।

पुलिक के मुताबिक सिद्धार्थनगर जिले के ढेबुरूवा गांव पर भी जांच एजेंसियों की निगाहें हैं। यहां उसकी रिश्तेदारी है। वह अक्सर अपने रिश्तेदार के यहां आता-जाता रहता था।
ने लॉकडाउन के दौरान गत अप्रैल माह में शाम के समय अपने बढ़या भैसाही गांव के कब्रिस्तान में बम का धमाका किया था जिसमें तेज आवाज के साथ आग को गोला दिखाई दिया था, जिसे गांव वाले अभी तक कुदरत का कहर मान रहे थे।

मुस्तकीम उर्फ अबू यूसुफ के पकड़े जाने के बाद खुफिया एजेंसियों और पुलिस की नजरें इलाके के नव धनाढ्यों पर टिक गई हैं। जिले में तेजी से अमीर बनने वाले लोगों की लंबी फेहरिस्त है। आयकर विभाग ने 25 नव धनाढ्यों की सूची तैयार की है। उतरौला कोतवाली क्षेत्र के 20 हजार लोग कुवैत, ईरान, मस्कट, सऊदी अरब व पाकिस्तान में नौकरी कर रहे हैं। पुलिस की निगाहें इन पर टिकी हैं। इनका ब्योरा जुटाया जाएगा।

अभी तक एलआईयू नव धनाढ्य लोगों का सत्यापन करती थी, जिसकी रिपोर्ट आयकर विभाग को भेज दी जाती थी। अब पुलिस टीम को जिम्मेदारी दी गई है। पचपेड़वा, गैंसड़ी, तुलसीपुर व हरैया क्षेत्र के करीब 50 से अधिक लोग ऐसे हैं जिनके पास थोड़ा समय पहले तक कुछ नहीं था लेकिन, आज उनके पास लग्जरी गाड़ियां व पक्के मकान समेत कई शान-ओ-शौकत की वस्तुएं मौजूद हैं।

एसपी देवरंजन वर्मा के अनुसार बीट पुलिस अधिकारी, एलआईयू व अन्य खुफिया एजेंसियों की टीम गठित की जा चुकी है। ये टीमें तेजी से अमीर हुए लोगों की पूरी जानकारी जुटाएंगी।

यूसुफ उर्फ मुस्तकीम की गिरफ्तारी के बाद से प्रशासन हर स्तर पर सतर्कता बरत रहा है। इसी कड़ी में जिले के मदरसों में हो रही गतिविधियों पर भी पुलिस ने नजरें गड़ा दी हैं। जिले में 614 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। दिल्ली पुलिस व यूपी एटीएस से मिले इनपुट के बाद स्थानीय पुलिस ने बैठक कर मदरसों के सत्यापन की रणनीति बनाई है। कई मदरसे तो कागजों में दर्ज भी नहीं हैं। मदरसों के सत्यापन के लिए पुलिस व एलआईयू की संयुक्त टीम का गठन किया गया है। अभी तक एलआईयू व अल्पसंख्यक विभाग मदरसों की जांच करता रहा है। पुलिस के अनुसार मदरसा संचालकों को होने वाली फंडिंग, अभिलेखों के सत्यापन व अध्ययनरत छात्र-छात्राओं सहित पूरा ब्योरा एकत्र किया जाएगा।