भारत के सबसे कठिन यात्रा में शामिल है श्रीखंड महादेव यात्रा

पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर नाम का एक राक्षस था उसने कठोर तपस्या से भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रख देगा वह भस्म हो जाएगा। फिर उसके मन में पाप आ गया और वह माता पार्वती से विवाह करने के बारे सोचने लगा और वह भगवान शिव के ऊपर हाथ रखकर उन्हें नष्ट करना चाहता था। भगवन विष्णु जी ने मोहनी का रूप धारण करके भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य करते हुए भस्मासुर ने खुद के ही सिर पर हाथ रख लिया और वह भस्म हो गया। इस कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी लाल दिखाई देते हैं।
 
श्री खंड महादेव मंदिर
क्या है श्रीखंड महादेव की पौराणिक कथा, अलौकिक नजरो के बीच पार्वती बाग की सुंदरता और सप्तर्षि पहाड़ियां।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

यात्रा:- समूचा हिमालय शिव शंकर का स्थान है और उनके सभी स्थानों पर पहुंचना बहुत ही कठिन होता है। चाहे वह अमरनाथ हो, केदारनाथ हो या कैलाश मानसरोवर। इसी क्रम में एक और स्थान है श्रीखंड महादेव का स्थान। अमरनाथ यात्रा में जहां लोगों को करीब 14000 फीट की चढ़ाई करनी पड़ती है तो श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए 18570 फीट ऊंचाई पर चढ़ना होता है। श्रीखंड महादेव, भगवान शिव के निवास स्थान में से एक है और इसे हिंदुओं का तीर्थ स्थान माना जाता है। श्रीखंड महादेव भारत के राज्य हिमाचाल प्रदेश में स्थित है। यह स्थान भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी यात्रा को ‘श्रीखंड महादेव कैलाश यात्रा’ कहा जाता है। यह यात्रा प्रत्येक वर्ष सावन के महीने में की जाती है। इस यात्रा के ट्रेक हो भारत के सबसे कठिन ट्रेकों में से एक माना जाता है। पहाड़ी पर स्थित यह शिवलिंग भगवान शिव के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है जिसकी उंचाई लगभग 75 फीट है। यह शिवलिंग समुद्र तल से लगभग 18,570 फीट की उंचाई पर स्थित है।

कहाँ से होती है यात्रा आरंभ- श्रीखंड महादेव कैलाश यात्रा हिमाचाल प्रदेश के बेस गांव जौन से आरंभ होती है जो श्रीखंड के शीर्ष तक लगभग 32 किलोमीटर की पैदल  यात्रा है। इस यात्रा का पूरा रास्ता काफी खतरनाक है। इसी कारण इस यात्रा को अमरनाथ यात्रा से भी कठिन माना जाता है। इस यात्रा में 15 साल से अधिक आयु के भक्त ही यात्रा कर सकते है। श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान कई धार्मिक स्थल और देव स्थान के दर्शन होते है। श्रीखंड महोदव के दर्शन से पूर्व करीब 50 मीटर पहले ही माता पार्वती, भगवान गणेश और स्वामी कार्तिक की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। वहीं रास्ते में प्राकृतिक शिव गुफा, निरमंड में सात मंदिर, जावों में माता पार्वती सहित नौ देवियां, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, सिंहगाड़, जोतकाली, ढंकद्वार, बकासुर बध, ढंकद्वार व कुंषा आदि धार्मिक स्थल हैं।

श्रीखंड महादेव मंदिर

क्या है श्रीखंड महादेव कैलाश की पौराणिक कथा- पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर नाम का एक राक्षस था उसने कठोर तपस्या से भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रख देगा वह भस्म हो जाएगा। फिर उसके मन में पाप आ गया और वह माता पार्वती से विवाह करने के बारे सोचने लगा और वह भगवान शिव के ऊपर हाथ रखकर उन्हें नष्ट करना चाहता था। भगवन विष्णु जी ने मोहनी का रूप धारण करके भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य करते हुए भस्मासुर ने खुद के ही सिर पर हाथ रख लिया और वह भस्म हो गया। इस कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी लाल दिखाई देते हैं। जौन से यात्रा शुरू होती है, और 3 किमी चलने के बाद सिंघाड़ पहुंचते है, यहां पहला बेस कैंप है, जहां तीर्थयात्रियों के लिए भोजन व अन्य सेवायें उपलब्ध कराई जाती है। उसके बाद थाचुरू तक 12 किमी की सीधी खड़ी चढ़ाई है, जिसे दांडी-धार के नाम से भी जाना जाता है। थाचुरू के बाद ठाकुरू एक और आधार शिविर है, जहां भोजन और टेंट उपलब्ध करायें जाते हैं। यात्रा कालीघाटी तक 3 किमी की चढ़ाई के साथ शुरू होती है, जिसे देवी काली का निवास माना जाता है। अगर मौसम साफ हो तो श्रीखंड महोदव शिवलिंग को इस स्थान से देखा जा सकता है।

कालीघाटी से भीम तलाई की ओर 1 किमी डाउनहिल स्ट्रेच है। भीम तलाई से प्रस्थान करते हुए कुन्सा घाटी तक पहुँचते है, यहां से एक और 3 किमी की दूरी के बाद, अगला बेस कैंप भीम डावर है, जहां सभी सामान्य सेवाएं उपलब्ध होती हैं। बस 2 किमी आगे एक और बेस कैंप है- पार्वती बाग, माना जाता है कि यह बगीचा माता पार्वती द्वारा लगाया गया था। उद्यान में ब्रह्म कमल जैसे फूल हैं, जिन्हें सोसुरिया ओब्लाटाटा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां भगवान गणेश पर हाथी का सिर लगाया गया था। वहाँ से 2 किमी दूर, अगला स्थान नैन सरवोर है। इसके बाद, लगभग 3 किमी की ऊँचाई तक, चट्टानी इलाकों से होते हुए, श्रीखंड महादेव तक पहुँचते है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान- श्रीखंड महादेव यात्रियों के लिए चिकित्सकों से बहुत अहम जानकारियां दी है, जो श्रद्धालुओं के लिए फायदेमंद रहने वाली है। 2014 से श्रीखंड यात्रा के लिए सेवाएं दे रहे डॉ. यशपाल राणा ने बताया कि पार्वती बाग से ऊपर कुछ यात्रियों की ऑक्सीजन की कमी के चलते तबीयत बिगड़ने लगती है। ऐसे यात्री जिनको ऑक्सीजन की कमी महसूस हो, ज्यादा सांस फूलना, सिरदर्द होना, चढ़ाई न चढ़ पाना, उल्टी की शिकायत होना, धुंधला दिखना और चक्कर आना जैसे लक्षण आना शुरू हों तो ऐसे यात्री तुरंत आराम करें और नीचे की ओर उतरकर बेस कैंप में चिकित्सक से संपर्क करें। अपने साथ यात्री एक पक्का डंडा, ग्रिप वाले जूते, बरसाती, छाता, ड्राई फू्रटस, गर्म कपड़े, टॉर्च और गलूकोज जैसे सामान साथ रखें। 

अलौकिक नजारा है श्रीखंड महादेव का- भीमडवारी से पार्वती बाग की सुंदरता और इस बीच सप्तर्षि पहाड़ियों को पार कर जब श्रीखंड महादेव पहुंचते हैं तो नजारा अलौकिक हो जाता है। यहां से कार्तिकेयकी चोटी के दर्शन भी भक्तों को देखने को मिलते हैं। श्रीखंड की शिला पर गुप्त कंदरा से भेंट चढ़ाकर यहां भोले की पूजा कर भक्त लौटते हैं।

यात्रा मार्ग के मंदिर- यह स्थान हिमाचल के शिमला के आनी उममंडल के निरमंड खंड में स्थित बर्फीली पहाड़ी की 18570 फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड की चोटीपर स्थित है। 35 किलोमीटर की जोखिम भरी यात्रा के बाद ही यहां पहुंचते हैं। यहां पर स्थित शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 72 फिट है। श्रीखंड महादेव की यात्रा के मार्ग में निरमंड में सात मंदिर, जाओं में माता पार्वती का मंदिर, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, जोताकली, बकासुर वध, ढंक द्वार आदि कई पवित्र स्थान है। 
 
यात्रा के पड़ाव- यहां की यात्रा जुलाई में प्रारंभ होती है जिसे श्रीखंड महादेव ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया जाता है। यह ट्रस्ट स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी कई सुविधाएं प्रशासन के सहयोग से उपलब्ध करवाया है। सिंहगाड, थाचड़ू, भीमडवारी और पार्वतीबाग में कैंप स्थापित हैं। सिंहगाड में पंजीकरण और मेडिकल चेकअप की सुविधा है, जबकि विभिन्न स्थानों पर रुकने और ठहरने की सुविधा है। कैंपों में डॉक्टर, पुलिस और रेस्क्यू टीमें तैनात रहती हैं। यात्रा के तीन पड़ाव हैं- सिंहगाड़, थाचड़ू, और भीम डवार है।
 
स्थान से जुड़ी मान्यता- स्थानीय मान्यता अनुसार यहीं पर भगवान विष्णु ने शिवजी से वरदान प्राप्त भस्मासुर को नृत्य के लिए राजी किया था। नृत्य करते करते उसने अपना हाथ अपने ही सिर पर रख लिया और वह भस्म हो गया था। मान्यता है कि इसी कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी दूर से ही लाल दिखाई देते हैं।
 
कैसे पहुंचे- दिल्ली से शिमला, शिमला से रामपुर और रामपुल से निरमंड, निरमंड से बागीपुल और बागीपुल से जाओं, जाओं से श्रीखंड चोटी पहुंचे। दिल्ली से कुल 553 किलोमीटर दूर।