प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रकाश उत्सव के दिन देश को किया संबोधित।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापिस लिया जाएगा।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

जानिए प्रकाश उत्सव क्या है, और यह क्यो है सिख धर्म के लिए खास।।

नई दिल्ली, 19 नवंबर:- आज गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व है, आज पीएम मोदी सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण करने उत्तर प्रदेश के महोबा जाएंगे, फिर शाम को झांसी में राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व में सम्मिलित होंगे। पीएमओ की तरफ से ट्वीट किया गया है कि आज गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व है। यूपी जाने से पहले उन्होंने सुबह 9 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। आइये जानते है कि उन्होंने क्या कहा।

तीनों कृषि कानूनों को वापिस लिया जाएगा:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापिस लिया जाएगा। कृषि में सुधार के लिए तीन कानून लाए गए थे, ताकि छोटे किसानों को और ताकत मिले। सालों से ये मांग देश के किसान और विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री मांग कर रहे थे। जब ये कानून लाए गए, तो संसद में चर्चा हुई। देश के किसानों, संगठनों ने इसका स्वागत किया, समर्थन किया। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार पूरा सेवा भाव से जनता की सेवा करने में जुटी हुई है। इसी के परिणामस्‍वरूप देश सपनों को पूरा होते हुए देख रहा है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि उन्‍होंने किसानों की मुश्किलों और तकलीफों को बेहद करीब से महसूस किया है। किसानों की मौजूदा सभी परेशानियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

पवित्र प्रकाश पर्व की दी बधाई:- पीएम मोदी ने संबोधन की शुरुआत गुरु नानक देव जी के पवित्र प्रकाश पर्व की बधाई देते हुए की। उन्‍होंने कहा कि वह विश्वभर में सभी लोगों को और सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई देते हैं। पीएम मोदी ने कहा, ‘ये भी बहुत सुखद है कि डेढ़ साल के बाद करतारपुर साबिह कारिडोर अब फिर से खुल गया है।

हमने कृषि विकास, किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी:- पीएम मोदी ने कहा कि अपने पांच दशक के जीवन में किसानों की चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है। जब देश हमें 2014 में प्रधानसेवक के रूप में सेवा का अवसर दिया तो हमने कृषि विकास, किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। देश के छोटे किसानों की चुनौतियों को दूर करने के लिए, हमने बीज, बीमा, बाजार और बचत, इन सभी पर चौतरफा काम किया। सरकार ने अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, सायल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा। किसानों को उनकी मेहनत के बदले उपज की सही कीमत मिले, इसके लिए भी अनेक कदम उठाए गए। देश ने अपने रूरल मार्केट इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत किया। हमने एमएसपी तो बढ़ाई ही, साथ ही साथ रिकॉर्ड सरकारी खरीद केंद्र भी बनाए। हमारी सरकार द्वारा की गई उपज की खरीद ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

आज है प्रकाश उत्सव:- सिख धर्म की बुनियाद रखने वाले गुरु नानक देव जी की जयंती ‘प्रकाश उत्‍सव’ के रूप में मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 19 नवंबर, 2021 के दिन मनाया जा रहा है। यह उनकी 552वीं जयंती है। उनके अनुयायी इन्हें नानक और नानक देव, बाबा नानक और नानक शाह जी जैसे नामों से संबोधित करते हैं। गुरु नानक देव सिख समुदाय के पहले गुरु थे। ये सिख धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। इस दिन सुबह प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं और गुरू द्वारों में सबद कीर्तन का आयोजन होता है। आइए जानते हैं गुरू नानक देव जी द्वारा दिए गए जीवन के संदेशों और शिक्षाओं के बारे में।

13 साल की उम्र में हुआ था उपनयन संस्कार:- गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन 1469 को राएभोए के तलवंडी नामक स्थान में, कल्याणचंद (मेहता कालू) नाम के एक किसान के घर हुआ। उनकी माता का नाम तृप्ता था। तलवंडी को ही अब नानक के नाम पर ननकाना साहब कहा जाता है, जो पाकिस्तान में है। 13 साल की उम्र में उनका उपनयन संस्कार हुआ। माना जाता है कि 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह सुलखनी से हुआ। 1494 में श्रीचंद और लक्ष्मीचंद नाम के दो पुत्र भी इन्हें हुए। श्रीचंद साहिब जी ने ही उदासीन अखाड़े की स्थापना की थी। सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी के चार शिष्य थे। यह चारों ही हमेशा बाबाजी के साथ रहा करते थे।

गुरू नानक देव का जीवन और शिक्षाएं:– गुरू नानक देव का जीवन और शिक्षाएं न केवल धर्म विशेष के लिए बल्की पूरी मानव जाति को सही दिशा दिखाती हैं। इसलिए ही उनके जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के नाम से जाना जाता है। गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 ई. में हुआ था। उनका जन्म स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था। जहां पर आज ननकाना साहिब नाम का गुरू द्वारा है। गुरू नानक देव ने मूर्ति पूजा का विरोध करते हुए, एक निराकार ईश्वर की उपासना का संदेश दिया था। उन्होंने तात्कालिक समाज की बुराईयों और कुरीतियों को दूर करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

नानकदेवजी के 10 सिद्धांत

  1. परम-पिता परमेश्वर एक है।
  2. हमेशा एक ईश्वर की साधना में मन लगाओ।
  3. दुनिया की हर जगह और हर प्राणी में ईश्वर मौजूद हैं।
  4. ईश्वर की भक्ति में लीन लोगों को किसी का डर नहीं सताता।
  5. ईमानदारी और मेहनत से पेट भरना चाहिए।
  6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न ही किसी को सताएं।
  7. हमेशा खुश रहना चाहिए, ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा याचना करें।
  8. मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से जरूरत मंद की सहायता करें।
  9. सभी को समान नज़रिए से देखें, स्त्री-पुरुष समान हैं।
  10. भोजन शरीर को जीवित रखने के लिए आवश्यक है। परंतु लोभ-लालच के लिए संग्रह करने की आदत बुरी है।।