एक वेब सीरीज देखकर युवती ने शुरू किया नकली नोट छापने और खपाने वाला गैंग, और फिर....

युवती कोमल यादव ने कुछ दिन पहले ही एमबीए पूरा किया है। इस दौरान एक वेब सीरीज देखकर उसके दिमाग में नकली नोट छापने का आइडिया आया। शरगुन और धीरज इसके साथी हैं। उनके साथ आइडिया शेयर किया। फिर सोशल मीडिया से नकली नोट बनाने के लिए जरूरी कागज, स्याही, सॉफ्टवेयर और प्रिंटर के बारे में जानकारी ली। इसके बाद आरोपियों ने घर पर नकली नोटों की प्रिंटिंग शुरू कर दी। अभी आरोपी सिर्फ 100 और 200 के ही नकली नोट बना पा रहे थे। आगे चलकर 500 और 2 हजार रुपये के नोट भी बनाने का प्लान था।
 
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ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

नोएडा, 01 मई:- यूपी के नोएडा शहर में नकली नोट छापने और खपाने वाला गैंग पकड़ा गया है, इसमें एमबीए पास करने वाली एक युवती कोमल यादव ने यह गैंग शुरू किया था। इसका आइडिया उसे एक वेब सीरीज को देखकर आया था। बहलोलपुर के एक घर में प्रिंटर से ये नकली नोट तैयार किए जा रहे थे। अभी तक यह गैंग 100-200 रुपये के नकली नोट ही छाप रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर नकली नोट, प्रिंटर, कागज, मोबाइल समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस कार्रवाई की जानकारी डीसीपी सेंट्रल राम बदन सिंह और एसीपी अमित सिंह ने दी।

डीसीपी ने बताया कि- उन्होंने बताया कि सेक्टर-63 थाना पुलिस को मुखबिरों से बहलोलपुर के एक घर में नकली नोट बनाने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस की टीम ने शनिवार को छापेमारी कर तीन आरोपियों कोमल यादव, धीरज और शरगुन को पकड़ा है। वही एसीपी अमित सिंह ने बताया कि ये लोग एक महीने से नकली नोट छापकर शहर में खपा रहे थे। इनके कब्जे से 54,100 रुपये कीमत के 100 के और 21,400 रुपये कीमत के 200 रुपये के नकली नोट, 5 फोन, कागज, इंक और एक स्कूटी बरामद हुई है।

पुलिस पूछताछ में युवती कोमल यादव ने बताया- एसीपी ने बताया कि पकड़ी गई युवती कोमल यादव ने कुछ दिन पहले ही एमबीए पूरा किया है। इस दौरान एक वेब सीरीज देखकर उसके दिमाग में नकली नोट छापने का आइडिया आया। शरगुन और धीरज इसके साथी हैं। उनके साथ आइडिया शेयर किया। फिर सोशल मीडिया से नकली नोट बनाने के लिए जरूरी कागज, स्याही, सॉफ्टवेयर और प्रिंटर के बारे में जानकारी ली। इसके बाद आरोपियों ने घर पर नकली नोटों की प्रिंटिंग शुरू कर दी। अभी आरोपी सिर्फ 100 और 200 के ही नकली नोट बना पा रहे थे। आगे चलकर 500 और 2 हजार रुपये के नोट भी बनाने का प्लान था। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि घर पर बनाए गए नकली नोटों को आसपास के छोटे बच्चों को देते थे। इन नकली नोटों से बाजार और भीड़भाड़ वाली जगह पर लगने वाले जूस के ठेले, फल-सब्जी की दुकान पर चलाकर 20 से 30 रुपये का सामान लेते थे। ये लोग बच्चों से बाकी के रुपये ले लेते थे।