कौन है कर्नल जहीर जिनको पचास सालों से खोज रहा है पाकिस्तान, जानिए क्यो मिला पाक सैनिक को पद्म सम्मान।।

1971 में भारत और पाकिस्तान की लड़ाई में जिन्होंने पाकिस्तान की तोड़ी थी कमर, कौन थी रत्ना जिसने मरने से पहले एक श्रमिक शिविर की दीवार पर अपना नाम लिखा था।।

ग्लोबल भारत न्यूज़ नेटवर्क

शख्सियत, 24 नवंबर:- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कई अहम हस्तियों को विशेष सम्मानों से सम्मानित किया। इन्हीं शख्सियतों में से एक थे लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर। यूं तो लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर कभी पाकिस्तानी सैनिक हुआ करते थे लेकिन आज जब उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया तब इस नाम ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर वो नाम है जिससे आज पाकिस्तान बेपनाह नफरत करता है। लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर ने साल 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ दिया था और इस युद्ध में भारत ने पड़ोसी मुल्क को धूल चटाया था। बात साल 1971 के मार्च के महीने की है। पाकिस्तानी आर्मी का एक जवान जिसकी पोस्टिंग सियालकोट सेक्टर में थी वो अचानक बॉर्डर पार कर भारत में घुस गया। उसके जूते में कुछ कागज और नक्शे रखे हुए थे। उस वक्त बॉर्डर पर तैनात भारतीय सैनिकों ने उसे पाकिस्तानी जासूस समझा और तुरंत पकड़ लिया। जल्दी ही इस शख्स को पठानकोट ले जाया गया और यहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उससे कई सवाल-जवाब किये। उस वक्त 20 साल के इस पाकिस्तानी सैनिक ने भारतीय अधिकारियों को पाकिस्तानी आर्मी के पोजिशन की जानकारियों से भरे दस्तावेज सौंपे। भारतीय अधिकारी समझ गये कि यह गंभीर मामला है।

पाकिस्तान ने लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर को मौत की सजा सुनाई थी:- 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान को झटका देने वाला यह जवान कोई और नहीं बल्कि लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर ही था। इस घटना के बाद पाकिस्तानी सैनिक को दिल्ली ले जाया गया और उन्हें वहां एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया। यहां उन्होंने कई महीने गुजारे और मुक्ति वाहिनी में गुरिल्ला लड़ाई के गुर सीखाए ताकि पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटा सकें। 1971 की लड़ाई में कर्नल जहीर ने भारत का साथ दिया और पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिये थे। एक खास बात यह भी है कि पाकिस्तान ने लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर को मौत की सजा सुनाई थी और पिछले 50 साल से पाकिस्तान इस सजा को मुकम्मल अंजाम तक पहुंचाने के इंतजार में है। बांग्लादेश की आजादी से पहले कर्नल जहीर पाकिस्तानी सेना के बड़े अधिकारी थे, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश के लोगों पर इतने जुल्म किए, कि कर्नल जहीर जैसे लोग उसे बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ हल्ला बोल दिया। उस समय कर्नल जहीर ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बताया जाता है कि पाकिस्तान की गलत हरकतों की वजह से उन्होंने भारतीय सेना को कई गोपनीय दस्तावेज भी सौंपे थे, जिसकी वजह से पाकिस्तानी सैनिकों की उस समय के पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश में हालत खराब हो गई।जिसके बाद बांग्लादेश को नया मुल्क बनाया गया था।

कर्नल जहीर को 50 सालों से खोज रहा है पाकिस्तान:- भारत के राष्ट्र्पति रामनाथ कोविंद जब देश के धुरंधरों को सम्मान दे रहे थे, उस वक्त एक ऐसा चेहरा दुनिया के सामने आया, जिसे देखकर पाकिस्तान जल भुनकर राख गया हो गया होगा। इमरान खान को मिर्च लग गई होगी और पाकिस्तान के लोग आज से ठीक पचास साल पीछे चले गये होगे, जब भारत ने पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया था। भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दिग्गज रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर को सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान को सराहने के लिए भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। कर्नल काजी सज्जाद के साथ साथ भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त रहे मुअज्जम अली को भी भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। लेकिन, कर्नल काली सज्जाज अली जहीर वो शख्स हैं, जिनकी तलाश पिछले 50 सालों से पाकिस्तान को है और इनका चेहरा देखते ही पाकिस्तानी हुक्मरानों और पाकिस्तान की सेना के तन-बदन में आग लग जाती है।

रत्ना की दर्दनाक कहानी:- कर्नल जहीर 1971 की लड़ाई को याद करते हुए बताते हैं कि, भारत-पाकिस्तान युद्ध तो 16 दिसंबर को ढाका में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ ही समाप्त हो गया था, लेकिन कर्नल जहीर को एक लड़की की याद आती है, जिसने मरने से पहले एक श्रमिक शिविर की दीवार पर अपना नाम रत्ना लिखा था। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए कहा कि, हमें कुरीग्राम के पास एक गांव में बताया गया कि रत्ना नाम की एक लड़की का पाकिस्तानी सेना ने अपहरण कर लिया है। वह कभी नहीं मिली, लेकिन जब हमने उस इलाके में एक शिविर को पाकिस्तानी सैनिकों के हाथों मुक्त कराया, तब हमने देखा कि दीवार पर खून से उसका नाम लिखा हुआ था।

घर में लगा दी गई थी आग:- कर्नल जहीर उस वक्त की पाकिस्तानी सेना के जुल्म की कहानी सुनाते हुए बताते हैं कि, पाकिस्तानी सेना ने उन्हें मारने का हुक्म जारी कर दिया था और वो अपनी जान बचाने के लिए भारत भागकर आ गये। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना हद से नीचे गिर गई और उनकी मां और बहन को टार्गेट करने लगी। लेकिन, किसी तरह वो दोनों भी भागने में कामयाब रहे थे। उन्होंने बताया कि, पाकिस्तानी सैनिकों ने उनके घर को पूरी तरह से जला दिया। कर्नल जहीर बताते हैं कि, वो पाकिस्तान की सेना में 1969 में शामिल हुए थे और उन्हें ट्रेनिंग के दौरान पाकिस्तान के अलग अलग हिस्सों में भेजा गया था।

पाकिस्तान में होता था भेदभाव:- कर्नल जहीर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि, पाकिस्तान में उन्हें भले ही ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था, लेकिन उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तानी सैनिकों के ट्रेनिंग से काफी अलग थी। उन्होंने कहा कि, जो भी सैनिक बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के रहने वाले थे, उनकी हमेशा जासूसी की जाती थी, उनपर हमेशा नजर रखी जाती थी, उन्हें जबरदस्ती ऊर्दू बोलने के लिए कहा जाता था, उन्हें गालियां दी जाती थीं। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तानियों का मानना था कि, पाकिस्तान की सेना जो पूर्वी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर नरसंहार कर रही है, उसके खिलाफ पूर्वी पाकिस्तान के सैनिक खड़े हो सकते हैं। कर्नल जहीर आज भी कहते हैं, कि हमारा देश तब तक सुरक्षित है जब तक हम अपने लोकाचार को कट्टरपंथी और बांग्लादेश विरोधी ताकतों से सुरक्षित नहीं रखते हैं और पाकिस्तान मॉडल को अपनाने की चाहत रखने वाले लोगों को हमें दूर ही रखना होगा।।