प्रयागराज की शिवाय वाटिका में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य लवकुश द्वारा स्वस्तिवाचन से हुई। इसके उपरांत नृपेन्द्र जी के नेतृत्व में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ संपन्न हुआ। बालिका यशस्विता ने नृत्य के साथ गणेश वंदना प्रस्तुत की।

प्रयागराज की शिवाय वाटिका में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन हुआ।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क
प्रयागराज, 4 जनवरी 2026
कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य लवकुश द्वारा स्वस्तिवाचन से हुई। इसके उपरांत नृपेन्द्र जी के नेतृत्व में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ संपन्न हुआ। बालिका यशस्विता ने नृत्य के साथ गणेश वंदना प्रस्तुत की। 
आज शिवाय वाटिका, सैनिक कॉलोनी, धूमनगंज में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
तत्पश्चात सभी अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
प्रथम उद्बोधन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर प्रकाश डालते हुए मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि मातृशक्ति ही संतति और संस्कृति का उद्गम स्थल है तथा उसी के कंधों पर संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन होता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में घोषित पंच प्रण पर भी विस्तार से चर्चा की।
इसके पश्चात आन्जनेय जी ने “है कथा संग्राम की” गीत प्रस्तुत कर वातावरण को ओजपूर्ण बनाया।
आचार्य लवकुश ने अपने उद्बोधन में हिंदू समाज को एकजुट होने का आह्वान करते हुए ऊँच-नीच और भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता बताई। श्रेयांशी जी ने “मोहे रंग दे लाल” गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया, भारत सरकार श्री शिवकुमार पाल ने प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान, विश्वविद्यालयों और परंपराओं की समृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पृथ्वी, आकाश, सूर्य और चंद्र की दूरियों तक का वैज्ञानिक ज्ञान दिया।
उन्होंने पंच प्रण और संघ के शताब्दी वर्ष के माध्यम से समाज को जागृत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने राम मंदिर निर्माण को राष्ट्र की चेतना के पुनर्स्थापन का प्रतीक बताया और कहा कि आज विश्व भारत के नेतृत्व को स्वीकार कर रहा है।
इसके बाद अवनीश जी ने फिल्म “पूरब पश्चिम का प्रसिद्ध गीत – “भारत की बात सुनाता हूँ” प्रस्तुत कर श्रोताओं में देशभक्ति का संचार किया।
पूर्व वायु सैनिक श्री आर.के. सिंह ने हिंदू समाज को संगठित रहने का संदेश देते हुए कहा कि संगठन परिवार से शुरू होकर राष्ट्र तक जाता है। सनातन परंपरा ही मातृभूमि से प्रेम करना सिखाती है।
अग्रिता जी ने “तोरा मन दर्पण कहलाए” गीत प्रस्तुत किया। प्रांत घोष प्रमुख प्रशांत मिश्रा जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, भारत की प्राचीन गणतांत्रिक परंपरा और कौटिल्य-चाणक्य के राष्ट्र निर्माण के विचारों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत कभी पूर्णतः गुलाम नहीं रहा और हमारे पूर्वजों के शौर्य व कर्मठता के कारण आज भी सनातन संस्कृति जीवित है। भारत को “सोने की चिड़िया” कहे जाने के पीछे कर्म आधारित व्यवस्था और तकनीकी दक्षता का योगदान रहा है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं मातृशक्ति द्वारा भारत माता की आरती की गई और समापन की घोषणा की गई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में दीपक जी, अवनीश सिंह, मनीष चौबे, विवेक, दिलीप पांडे, बृजेश नारायण सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही। संचालन उग्रसेन पांडे जी ने किया।
सम्मेलन में देवदत्त जी, विजय पांडेय जी, पंकज जी, विक्रम जी, भारतेंदु जी, संजीव जी, दीपक राणा जी, सुनील, डॉ. द्विवेदी, डॉ. कमलेश सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में माताएं, बहनें, बच्चे और पुरुषों ने सहभागिता कर सनातन एकता और राष्ट्रबोध का संदेश दिया।



