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प्रतापगढ़

आत्मा की अमरता एवं देह की नश्वरता के ज्ञान ने भारतीयों को बनाया कालजई: ओम प्रकाश

एमडीपीजी कालेज में आयोजित हुआ भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्याख्यान कार्यक्रम

प्रतापगढ़। आत्मा की अमरता एवं देह की नश्वरता के ज्ञान ने भारतीयों को कालजई बना दिया। इसीलिए भारतीय निर्भीक भाव से अपनी साधना में लगे होते हैं। यह बातें प्रख्यात खगोल भौतिक विद प्रोफेसर ओम प्रकाश पांडेय ने एमडीपीजी कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित व्याख्यान में कहीं। उन्होंने कहा कि ज्ञान, साधना का विषय है। चिंतन, मनन का विषय है, पुस्तक का नहीं। क्योंकि पुस्तक महज सीमित ज्ञान कराती है। प्रज्ञान (पूर्ण ज्ञान) प्राप्त करने के लिए अंतभार्वों को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा की विज्ञान की आज की विकसित अवधारणाएं अतीत में ही हमारे ग्रंथो में वर्णित हैं। ऋग्वेद में भौतिक विज्ञान के सारे सार निहित हैं जबकि यजुर्वेद में रसायन विज्ञान का अद्वितीय वर्णन है। किंतु उसे समझने के लिए हमें अपने आप में समग्रता लानी होगी। प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि आर्यभट्ट से पहले शून्य का वर्णन ऋग्वेद में निहित है। ऋग्वेद में शून्य के महत्व विधिवत वर्णित हैं। आचार्यों एवं विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए सूर्य को अर्घ देना नितांत उपयोगी है। शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न रंगों के हैं और जब हम सूर्य को अर्घ देते हैं तो जल से छनकर सूर्य में निहित सात रंग( विबग्योर जो विभिन्न शक्तियों की परिचायक हैं हमारे शरीर को प्राप्त होते हैं जिससे व्यक्ति निरोगी होता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की भी व्याख्या की और कहा कि दुष्यंत के पुत्र भारत से हमारे देश का नाम भारत नहीं पड़ा बल्कि भारत का नाम भरताग्नि से है। भरताग्नि क्या है और यह केवल भारत में ही क्यों है इस पर भी उन्होंने विस्तृत प्रकाश डाला। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो शैलेंद्र कुमार मिश्र ने अंग वस्त्रम एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर प्रोफेसर पांडे को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अभिषेक सिंह एवं आभार ज्ञापन प्रो अरविंद मिश्र ने किया। कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी कुंडा आकांक्षा जोशी, प्रो किरण मिश्रा, प्रो सुधांशु त्रिपाठी, डॉ छवि नारायण पांडेय, डॉ रंजन मिश्र, डॉ देवेंद्र कुमार पांडे, डॉ संजय दुबे, डॉ अरुण कुमार मिश्र, डॉ शैलेश पांडे, प्रो प्रदीप कुमार सिंह, डॉ बलराज मिश्र, डॉ स्वामीनाथ तिवारी, डॉ रंजीत पटेल सहित महाविद्यालय के आचार्य, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद प्राध्यापकगण

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