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साइबर अपराध पर पुलिस की बड़ी कार्यवाही:संगठित साइबर ठगी के शातिर गिरोह का पर्दाफाश

109 फर्जी फर्मों के खातों से करीब 42 करोड़ 65 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन किया जा चुका है

साइबर अपराध पर पुलिस की बड़ी कार्यवाही:संगठित साइबर ठगी के शातिर गिरोह का पर्दाफास….109 फर्जी फर्मों के खातों से करीब 42 करोड़ 65 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन किया जा चुका है

गौरव तिवारी ब्यूरो चीफ प्रतापगढ़।

प्रतापगढ़। अगर आपके पास भी अनजान नंबर से कोई APK फाइल आई है या ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ज्यादा मुनाफे का लालच मिल रहा है, तो सावधान हो जाइए। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। प्रतापगढ़ क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी फर्मों और जाली दस्तावेजों के दम पर करोड़ों रुपए का काला कारोबार चला रहा था। आइए देखते हैं इस रिपोर्ट में कि कैसे इस पूरे खेल का खुलासा हुआ।”

पूरा मामला। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार व सीओ नगर आशुतोष मिश्रा ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर बताया कि पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। क्राइम ब्रांच ने संगठित रूप से चल रहे इस साइबर फ्रॉड गैंग के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान पटना के रहने वाले शाकिब खान और संदीप कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से लैपटॉप, पीओएस मशीन, छह मोबाइल, पेन ड्राइव और डिजिटल सिग्नेचर जैसी कई आधुनिक तकनीकें बरामद की हैं।इस पूरे मामले की शुरुआत 16 जुलाई को कोतवाली देहात में दर्ज एक शिकायत से हुई थी, जब डॉक्टर सुमनेश सिंह के खाते से 2.5 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली गई थी। जांच का दायरा बढ़ा तो पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई।ये शातिर अपराधी फर्जी किरायानामा,जाली उद्यम, एमएसएमई और जीएसटी दस्तावेजों के जरिए कर्मचारियों और परिचितों के नाम पर फर्जी फर्में बनाते थे। इन्हीं कागजों के आधार पर बैंक में करंट और कॉर्पोरेट खाते खुलवाए जाते थे। एक ही पते और मोबाइल नंबर पर कई-कई फर्जी फर्मों का पंजीकरण पाया गया है।शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन 109 फर्जी फर्मों के खातों से करीब 42 करोड़ 65 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन किया जा चुका है। ‘समन्वय पोर्टल’ पर ये खाते देश भर की 500 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े मिले हैं। फिलहाल, पुलिस अब अन्य राज्यों की साइबर इकाइयों के साथ मिलकर इस सिंडिकेट के बाकी गुर्गों की तलाश में जुटी है।

बाइट—-आलोक कुमार (अपर पुलिस अधीक्षक)

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