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साहूमई में पुलिस पब्लिक भिड़ंत का मामला मानिकपुर पुलिस ने 23 लोगों को आरोपी बनाकर भेजा जेल

जाम और पुलिस पर हमले की नौबत क्यों आई क्या दुधमुंहे बच्चे को मां के साथ जेल भेजना उचित आखिर कहां हुई चूक जो बढ़ गया विवाद ?

साहूमई पुलिस पब्लिक भिड़ंत का मामला, मानिकपुर पुलिस ने 23 लोगों को आरोपी बनाकर भेजा जेल

जाम और पुलिस पर हमले की नौबत क्यों आई क्या दुधमुंहे बच्चे को मां के साथ जेल भेजना उचित आखिर कहां हुई चूक जो बढ़ गया विवाद ?

 

प्रतापगढ़, थाना मानिकपुर क्षेत्र में जहरीला पदार्थ खिला कर हत्या करने का आरोप लगाकर ग्रामीणों जिस तरह का आक्रोश जताया वो एक बड़े मामले को जन्म दे दिया, जिसमें आज 9 महिलाओं समेत 23 लोगों को जेल की हवा खानी पड़ गई। पुलिस का कहना है कि युवक की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों द्वारा शव को लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर रखकर आवागमन बाधित किया गया। पुलिस ने स्थिति को संभालने का शांतिपूर्ण प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने उग्र होकर ईंट-पत्थर, लाठी-डंडों और लोहे की सरिया से पुलिस बल पर हमला कर दिया। सरकारी वाहन को भी क्षतिग्रस्त किया गया और इस हमले में कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों के पास से 23 लकड़ी के डंडे, 2 लोहे की सरिया और 1 सीयूजी मोबाइल बरामद किया गया है।

क्या था पूरा मामला जिसमें हुआ हिंसक विरोध

घटना का प्रारंभ दिनांक 30 जनवरी 2026 को हुआ जब साहूमई (बिछलहला) निवासी एक महिला ने अपने 22 वर्षीय पुत्र को धोखे से जहरीला पदार्थ खिलाए जाने और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो जाने की तहरीर दी। इस पर थाना मानिकपुर में मु0अ0सं0 24/2026 धारा 103(1) बीएनएस के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया। मृतक के शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम के बाद शव को गांव लाया गया। सूत्र बताते है कि ग्रामीण मौके पर एसपी प्रतापगढ़ को बुलाने की मांग पर अड़ गए। पुलिस शव का अंतिम संस्कार करवाने पर आमादा थी। शव वापस आने के बाद जब परिजनों और ग्रामीणों ने आक्रोश दिखाते हुए शव के अंतिम संस्कार से मना कर दिया जबकि शव के अंतिम संस्कार करवाने के लिए पुलिस परिजनों पर दबाव बना रही थी। 1 फरवरी 2026 को परिजनों और ग्रामीणों ने और पुलिस के बीच मामला तनातनी का बना तो भीड़ का आक्रोश बढ़ गया और पुलिस से भिड़ंत करने लगी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। भीड़ द्वारा पुलिस बल पर जानलेवा हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के मामले में थाना मानिकपुर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए 25 नामजद और 25-30 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया।

क्या कहती है प्रतापगढ़ पुलिस

पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक पश्चिमी  बृजनंदन राय ने बताया कि अभियुक्तों को थाना क्षेत्र के बिटियन मेला ग्राउंड के पास घटना की पुनरावृत्ति की तैयारी करते हुए मौके पर गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने पुलिस पर जानलेवा हमला किया था और सरकारी मोबाइल छीन लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि वे पुलिस थाने पर हमला करने और उसे जलाने की योजना बना रहे थे। लेकिन ग्रामीण बता रहे है कि घर में सो रहे लोगों को उठाकर थाना फूंकने का मनगढ़ंत आरोप बनाकर ग्रामीणों को फंसा रही है।

गिरफ्तार अभियुक्तों में पवन कुमार, महेश कुमार, संतोष, लक्ष्मीकांत, मोनू, पवन कुमार, सचिन, रामप्यारे, विवेक उर्फ धीरेन्द्र, मनोज, दिलीप कुमार, करमचन्द्र सरोज, जितेन्द्र शुक्ला उर्फ कप्तान, समीर यादव उर्फ अमन, रंजना, सुनीता देवी, काजल, सोमवती, अनीता, गुड्डी, पुष्पा देवी, शिवानी श्रीवास्तव और पूनम शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से 23 लकड़ी के डंडे, 2 लोहे की सरिया और 1 सीयूजी मोबाइल बरामद किया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता से अपील की गई है कि वह कानून का पालन करे और किसी प्रकार की हिंसा में शामिल न हो। लेकिन पब्लिक को कानून का मापदंड बताने वाली पुलिस ने अपने लिए भी कुछ मानक तय किए है यह किसी एक को बचाने के चक्कर में दर्जनों लोगों को दुधमुंहे बच्चों को कृष्ण जन्मस्थली का दर्शन करवा देना कितना उचित है।

Vinod Mishra

सामाजिक सरोकारो पर सीधी पकड़ और बेबाक पत्रकारिता के लिए समर्पित...ग्लोबल भारत न्यूज़ संस्थान के लिए सेवा

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