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शिक्षा के नाम पर धंधा: प्रतापगढ़ में धड़ल्ले से चल रहे बिना मान्यता के स्कूल, जिम्मेदार मौन

शिक्षा नहीं, बन गया मुनाफे का कारोबार

शिक्षा के नाम पर धंधा: प्रतापगढ़ में धड़ल्ले से चल रहे बिना मान्यता के स्कूल, जिम्मेदार मौन”

शिक्षा नहीं, बन गया मुनाफे का कारोबार

प्रतापगढ़ जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुंडा, कालाकांकर, बाबागंज, बिहार और रामपुर संग्रामगढ़ ब्लॉकों में दर्जनों ऐसे विद्यालय खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जिनके पास वैध मान्यता तक नहीं है, फिर भी वे इंटर तक की कक्षाएं चला रहे हैं।

मान्यता आठ तक, पढ़ाई इंटर तक—नियमों की खुली धज्जियां
हैरानी की बात यह है कि कई स्कूलों को केवल कक्षा आठ तक की मान्यता प्राप्त है, लेकिन वहां इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई कराई जा रही है। नियमों को दरकिनार कर बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
नोटिस पर नोटिस, लेकिन कार्रवाई अब भी शून्य
शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर नोटिस जरूर जारी किए, लेकिन उसके बाद कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा हुआ है। पिछले वर्ष भी कई स्कूलों को नोटिस दिया गया था, मगर हालात जस के तस बने हुए हैं।
शिक्षा विभाग की चुप्पी से अवैध स्कूलों के हौसले बुलंद
विभागीय ढिलाई का फायदा उठाकर अवैध स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। वे बिना किसी डर के नियमों को ताक पर रखकर संचालन कर रहे हैं।
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, अभिभावकों से मोटी वसूली
इन विद्यालयों में अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जा रही है, लेकिन न तो बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही शिक्षा का कोई मानक स्तर। अभिभावक भी मजबूरी में अपने बच्चों का दाखिला कराने को विवश हैं।

कागजों में सख्ती, जमीनी हकीकत में ढिलाई
फाइलों में सख्ती के दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह विपरीत है। कार्रवाई के अभाव में व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

एक नाम की मान्यता, दूसरे के हाथ में संचालन
कुछ मामलों में तो मान्यता किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है, जबकि संचालन कोई और कर रहा है। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जांच टीम गठित, लेकिन सवाल—क्या इस बार होगी कार्रवाई?
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार की जा रही है और जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। सत्यापन के बाद सख्त कार्रवाई का दावा भी किया जा रहा है।
गांव-गांव फैल रहा ‘फर्जी शिक्षा’ का जाल
ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहे इस ‘फर्जी शिक्षा’ के जाल ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
निष्कर्ष:
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस बार सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगा या फिर वास्तव में दोषियों पर शिकंजा कसेगा। क्योंकि यहां मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य का है।

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