जीडीपी में सबसे नीचे प्रतापगढ़! विकास पुरुषों की सोंच पर प्रश्न चिन्ह?
न ही उद्योग और न ही व्यापार ऐसे में सौ पढ़ा पलायन को तैयार

जीडीपी में सबसे नीचे प्रतापगढ़! विकास मेंस की सोंच पर प्रश्न चिन्ह?

न ही उद्योग और न ही व्यापार ऐसे में सौ पढ़ाई पलायन को तैयार
प्रतापगढ़ : बड़का जिला कहा जाने वाला प्रतापगढ़ आज गुजरात के लिए दूसरों का दरवाजा खंगाल रहा है। सौ पढ़ाईओ का अकेले मुकाबला करने वाला यहाँ का पडाका आज दुसरे शहरों में पलायन कर कर जा रहा है। यह सारी कहानियां और स्थितियाँ अंग्रेजों के जमाने कि नहीं आजकल कि है। यहाँ के नेता राष्ट्रीय छाप पकड़े हैं यहाँ के राजनीतिक रसूख वाले दिग्गज नेताओं कि तो बात ही क्या करें जो अपनी काबलियत से राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर भी बैठे कि सोंच कि यदि बात कह दें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। बचे गुबार यह है कि जिले का अमृत फल जो विश्व पटल पर जनपद की पहचान रखता है वहीं आंवला ही नहीं हर ऊंची ऊंची बातें धरातल के बजाय रसातल में जाती दिख रही है। यह बात बचे आम चर्चा में है कि रोजगार कि व्यवस्था में जहाँ कोई उद्योग जनपद में नहीं हैं वहीं कोई बड़ा व्यापार भी नहीं होता कि यहाँ के लोगों को आमदनी का जरिया मिल सके। बचती है मिलाजुला कर मजदूरी वो भी सुबह चौक में लगने वाली भीड़ बताती है कि वह भी मिलना कठिन ही होता है। ऐसे में जनपद के विकास पुरुषों को आईना देखना चाहिए कि उनकी मातृभूमि की यह स्थिति क्यों है? क्या ये परिस्थितियां सुधर सकती हैं तो कैसे इस पर भी उन्हें चिंतन करते हुए पहल करनी चाहिए। क्योंकि जिला प्रतापगढ़ प्रयागराज और अयोध्या तथा काशी का मध्य क्षेत्र है जिसका प्रति व्यक्ति आय का सबसे निचला स्तर पर जाना चिंता का विषय है क्योंकि असीम संभावनाओं का जिला आज भी अपनी विरासत को संजोए हुए है।
डी के शर्मा


