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यूपी में एसआईआर के नाम पर लगभग तीन करोड़ मतदाताओं का नाम हटना लोकतंत्र के लिए घातक- प्रमोद तिवारी

राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर के नाम पर लगभग तीन करोड़ मतदाताओं के नाम कटने को लेकर लोकतंत्र का गला घोटना करार दिया है।

यूपी में एसआईआर के नाम पर लगभग तीन करोड़ मतदाताओं का नाम हटना लोकतंत्र के लिए घातक- प्रमोद तिवारी

लालगंज, प्रतापगढ़; 7 जनवरी।

राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर के नाम पर लगभग तीन करोड़ मतदाताओं के नाम कटने को लेकर लोकतंत्र का गला घोटना करार दिया है।

उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर को लेकर पहले ही कांग्रेस ने यह आशंका व्यक्त की थी कि इस प्रक्रिया के जरिए भाजपा निर्वाचन आयोग से मिलीभगत कर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का षडयंत्र कर रही है।

उन्होने कहा कि एसआईआर के नाम पर सत्तारूढ़ बीजेपी लोकतंत्र को लगातार कमजोर करने का कुचक्र रच रही है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में लगभग दो करोड़ नवासी लाख वोट कटे हैं। उन्होने कहा कि प्रदेश में लगभग अठारह से उन्नीस प्रतिशत वोट काटे हैं।

सांसद प्रमोद तिवारी ने दावा किया है कि इनमें दो करोड़ सत्रह लाख वे मतदाता हैं जो अनुपस्थित पाये गये हैं या फिर लापता हैं। उन्होने कहा कि मतदाता सूची से नौकरीपेशा वाले तथा तमाम मजदूर वर्ग व पिछडे एवं दलित वर्ग के गरीब हैं।

उन्होने कहा कि इनमें अल्पसंख्यक फेरी लगाने वाले वे लोग भी शामिल हैं जो रोजीरोटी के सिलसिले में बाहर गये हैं और समय से आकर अपना फार्म नहीं भर सके। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा है कि एसआईआर से पहले उ0प्र0 में पन्द्रह करोड़ चौवालिस लाख तीस हजार मतदाता थे।

उन्होने कहा कि इनमें से छियालिस लाख तेईस हजार मृतक हैं और पचीस लाख सैतालिस हजार के नाम एक से अधिक स्थानों पर सूची में पाये गये थे। उन्होने कहा कि एसआईआर के बाद अब बारह करोड़ पचपन लाख छप्पन हजार पचीस मतदाता बचे हैं।

उन्होने कहा कि देश के तमाम प्रदेशों की आबादी भी तीन करोड़ नही है। उन्होने यह भी कहा है कि दुनिया के लगभग चालीस से पचास देश ऐसे है जिनकी आबादी भी तीन करोड़ नही है।

सांसद प्रमोद तिवारी ने आश्चर्य जताया है कि उ0प्र0 में लगभग तीन करोड़ मतदाताओं के नाम एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से काट दिये गये हैं। उन्होने सवालिया अंदाज में कहा है कि यह नाम क्यों काटे गये? इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं हैं।

उन्होने कहा कि ऐसी स्थिति को भांपते हुए कांग्रेस पार्टी ने सुझाव दिया था कि एसआईआर की प्रक्रिया को एक दो माह नहीं बल्कि साल दो साल चलाना चाहिए था। उन्होने कहा कि ऐसा होने पर जो लोग बाहर जाते हैं वह साल में एक या दो बार बाहर से वापस आते हैं तो उन्हें फार्म भरने का मौका मिल जाता।

उन्होने कहा कि पात्र मतदाताओं को पर्याप्त समय न देकर उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से लोकतंत्र पर आघात पहुंचाया गया है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा है कि एसआईआर के लिए पर्याप्त समय नही मिलने को लेकर मानसिक दबाव की वजह से प्रदेश में कई बीएलओ की मौतें भी हुई हैं।

उन्होने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गये हैं उनके साथ विश्वासघात और छल हुआ है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि मताधिकार का हक छीनने को लेकर भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

उन्होने कहा कि मतदाताओं का श्राप भाजपा को लगेगा और उत्तर प्रदेश से ऐसे में भाजपा का पूरी तरह सफाया होना तय है।

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि संविधान में यह खूबसूरत प्राविधान है कि एक राजा का भी एक वोट और गरीब का भी एक वोट बराबरी का दर्जा रखता है।

सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह खूबसूरत अधिकार भारतीय जनता पार्टी को कभी पसन्द नही आया और समय समय पर संविधान के साथ विश्वासघात करने पर अमादा रहा करती है।

सांसद प्रमोद तिवारी का बयान बुधवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

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