कुंडा के करेंटी प्राथमिक विद्यालय में अव्यवस्था: इंचार्ज अनुपस्थित, मिड डे मील पर सवाल
सिर्फ शिक्षा मित्र के भरोसे चल रहा विद्यालय, 31 नामांकन के बावजूद मौके पर आंगनबाड़ी बच्चे मिले; शौचालय का गेट जाम, BEO ने जांच की बात कही

कुंडा के करेंटी प्राथमिक विद्यालय में अव्यवस्था: इंचार्ज अनुपस्थित, मिड डे मील पर सवाल
सिर्फ शिक्षा मित्र के भरोसे चल रहा विद्यालय, 31 नामांकन के बावजूद मौके पर आंगनबाड़ी बच्चे मिले; शौचालय का गेट जाम, BEO ने जांच की बात कही
ग्लोबल भारत न्यूज
प्रतापगढ़ जनपद के कुंडा विकास खंड अंतर्गत करेंटी प्रथम प्राथमिक विद्यालय की जमीनी पड़ताल में शिक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। निरीक्षण के दौरान जो स्थिति देखने को मिली, वह न केवल प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ाती है।
विद्यालय में कुल दो स्टाफ की तैनाती है—एक शिक्षा मित्र और एक इंचार्ज अध्यापक। मौके पर शिक्षा मित्र अर्चना पांडेय उपस्थित मिलीं, जबकि इंचार्ज अध्यापक मोहम्मद एजाज विद्यालय में नहीं मिले। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार उनकी उपस्थिति नियमित नहीं बताई जाती, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही संभव होगी।
शिक्षा मित्र अर्चना पांडेय के अनुसार विद्यालय में कुल 31 बच्चों का नामांकन दर्ज है, लेकिन निरीक्षण के दौरान कक्षाओं में नामांकित छात्र-छात्राएं मौजूद नहीं मिले। मौके पर केवल आंगनबाड़ी के बच्चे ही दिखाई दिए, जिससे विद्यालय में वास्तविक उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। परिसर में बने शौचालय का गेट जाम स्थिति में मिला, जिसके चलते उसका उपयोग संभव नहीं है। यह स्थिति स्वच्छता और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
मिड डे मील योजना के संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। निरीक्षण के दौरान न तो भोजन बनता हुआ मिला और न ही बच्चों के लिए खाने की कोई व्यवस्था दिखाई दी। इससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर संदेह उत्पन्न होता है।
इस पूरे संबंध में जब कुंडा के खंड शिक्षा अधिकारी संजय सिंह से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय की स्थिति में सुधार और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
❗ बड़ा सवाल:
क्या जांच के बाद सुधरेगी व्यवस्था या फिर कागजों तक ही सीमित रह जाएगी कार्रवाई?


