Child Education Crisis
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Apr- 2026 -11 AprilGlobal भारत न्यूज़
कंधों पर किताबें नहीं, सपनों का बोझ—भारी बस्तों तले दबता बचपन आखिर कब तक?
कंधों पर किताबें नहीं, सपनों का बोझ—भारी बस्तों तले दबता बचपन आखिर कब तक? स्कूलों की सख्ती और सिस्टम की अनदेखी के बीच नन्हे बच्चों की मासूमियत हो रही बोझिल अभिषेक पाण्डेय ग्लोबल भारत न्यूज सुबह-सुबह जब नन्हे कदम स्कूल की ओर बढ़ते हैं, तो उनके कंधों पर सिर्फ बस्ता नहीं होता—वो बोझ होता है सपनों का, उम्मीदों का और…
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