स्वास्थ्य विभाग की एक बार फिर से थू थू एसडीएम की बेटी का लगाए एक्सपायरी इंजेक्शन
निलंबित तो दो स्वास्थ्य कर्मी हुए लेकिन बड़ा सवाल अस्पताल में क्या कर रहा था एक्सपायरी इंजेक्शन, क्या अन्य स्वास्थ्य केंदों में नहीं हो सकती एसी दवाएं ?

स्वास्थ्य विभाग की एक बार फिर से थू थू एसडीएम की बेटी का लगाए एक्सपायरी इंजेक्शन
निलंबित तो दो स्वास्थ्य कर्मी हुए लेकिन बड़ा सवाल क्या अन्य स्वास्थ्य केंदों में नहीं हो सकती एसी दवाएं ?
ग्लोबल भारत डेस्क: स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत से विभाग का नाम रोशन कर दिया है। लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य में एसडीएम की बेटी को एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाए जाने के मामले में दो फार्मासिस्टों को निलंबित कर दिया है लेकिन क्या निलंबन से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवालों का जवाब मिल गया। निलंबन कार्रवाई इसलिए चर्चा है क्योंकि वह लालगंज के उपजिलाधिकारी वाचस्पति सिंह की बेटी थी जिसे एक्सपायरी इंजेक्शन जिस मरीज को लगाया गया था। मामला जब सामने आया तो हडकम्प मच गया और विभाग ने स्टोर प्रभारी अरविंद कुमार शुक्ला और फार्मासिस्ट देव कुमार दुबे को निलंबित कर दिया।
आखिर अस्पतालों में कैसे डम्प पड़ी है मृत दवाएं
निलंबन की कार्यवाही महज खानापूर्ति ही कही जाएंगी क्यों कि बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर मियाद पूरी कर चुकी औषधियाँ अस्पताल में क्यों और कैसे पड़ी है। क्या ये नहीं हो सकता कि अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एक्सपायरी वाली दवाएं प्रयोग में की जा रही हों, चूंकि मामला हाई प्रोफाइल अधिकारी की बेटी का था इसलिए कार्रवाई हुई अन्यथा अब तक स्वास्थ्य विभाग के कटिया मार प्रयास मामले को मैनेज करने के लिए अपनी गोट बिछाना शुरू कर दिए होते और मामला दब जाता।
बड़ा सवाल ?
एसडीएम की बेटी को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने के मामले में कृत
कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यही एक्सपायरी इंजेक्शन किसी आम गरीब मरीज को लगाया गया होता तो क्या स्वास्थ्य विभाग इतनी ही तेजी से हरकत में आता? क्या किसी सामान्य मरीज की शिकायत भी उसी गंभीरता से सुनी जाती, जिस तरह प्रशासनिक अधिकारी की ओर से मामला सामने आने के बाद कार्रवाई हुई?
विभागीय आदेश के अनुसार स्टोर प्रभारी अरविंद कुमार शुक्ला पर एक्सपायरी इंजेक्शन निर्गत करने का आरोप है, जबकि फार्मासिस्ट देव कुमार दुबे पर इंजेक्शन लगाने से पहले उसकी एक्सपायरी तिथि की जांच नहीं करने का आरोप लगाया गया है। दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित करते हुए निलंबित किया गया है। लेकिन फिर प्यादे ही पिटेंगे वजीर साफ बच जाएगा क्यों कि मामला सिर्फ एक्सपायरी इंजेक्शन के प्रयोग का ही नहीं है, ये स्वास्थ्य विभाग के उस प्रोटोकॉल का उल्लंघन है जिसके प्रति जिले के आला अफसर से लेकर निलंबित किए गए दोनों कर्मचारी तक है।

