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घटिया और नकली दवाओं के निर्माण से लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहा गंभीर प्रतिकूल प्रभाव- प्रमोद तिवारी

संसद सत्र में देश के अंदर घटिया दवाओं के निर्माण को लेकर सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश में बिक रही पचास दवाईयां घटिया स्तर की बन रही हैं।

घटिया और नकली दवाओं के निर्माण से लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहा गंभीर प्रतिकूल प्रभाव- प्रमोद तिवारी

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
राज्य संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज

लालगंज प्रतापगढ़, 10 फरवरी।

संसद सत्र में देश के अंदर घटिया दवाओं के निर्माण को लेकर सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश में बिक रही पचास दवाईयां घटिया स्तर की बन रही हैं।

उन्होने ड्रग कंट्रोलर जेनरल आफ इण्डिया की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सदन में कहा कि घटिया बनने वाली दवाओं में पैरासिटामॉल से लेकर बीपी, खांसी, मल्टीविटामिन्स और कैल्शियम की दवाएं शामिल हैं।

उन्होनें कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों मरीज इन दवाओं का इस्तेमाल किया करते हैं। उन्होनें कहा कि देश में घटिया व नकली दवाओं का जाल तेजी से फैलने के कारण गरीब तबके के लोगों के स्वास्थ्य पर आघात पहुंचा रहा है।

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में घटिया दवाओं की आपूर्ति होना अधिक चुनौतियों का चिन्ताजनक हालात लिए हुए है।

बीते वर्ष 2022 के रिपोर्ट का भी सदन में जिक्र करते हुए राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि छोटे निर्माताओं द्वारा उत्पादित पन्द्रह प्रतिशत से अधिक दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में विफल रही हैं।

उन्होनें कहा कि छोटे दवा निर्माता ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा फोकस किया करते हैं। उन्होनें कहा कि घटिया दवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हुए कई प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव भी डाल रही है।

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि घटिया दवाओं से लोगों की मृत्यु तक हो जाती है। उन्होनें कहा कि एक अनुमान के अनुसार उत्पादन की जा रही दवाओं में बारह से लेकर पचीस प्रतिशत मिलावटी घटिया नकली दवा हो सकती है।

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि जनविश्वास विधेयक में 2023 में किये गये संशोधन की धारा में मानक की गुणवत्ता न होने वाली दवाईयों के सजा को जुर्माना भरने का विकल्प दिया गया है।

उन्होनें कहा कि सरकार के अनुसार इससे निर्माताओं का उत्पीड़न कम होगा जबकि इससे घटिया दवाई के निर्माण का मुददा गंभीर सजा के अभाव में महत्वहीन हो जाता है।

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि सबसे ज्यादा चिंताजनक यह है कि एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा अड़तीस प्रतिशत नकली दवाएं पायी गयी है।

उन्होनें राज्यसभा में मौजूद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए मांग उठाई कि घटिया दवाई के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाय।

वही उन्होनें सरकार से कहा कि दवा निर्माण स्तर पर पर्याप्त गुणवत्ता सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी के राज्यसभा में दिये गये वक्तव्य की जानकारी यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुई है।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

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