‘समग्र चेतना महोत्सव’ में धर्म, राष्ट्र, प्रकृति और समाज पर हुआ गहन मंथन।
बकुलाही तट पर संकट मोचन बालाजी धाम छोटी खरवई में जांबाज़ हिंदुस्तानी एवं इंडिया अगेंस्ट पॉलीथिन के संयुक्त तत्वावधान में "समग्र चेतना महोत्सव" का आयोजन हुआ।

‘समग्र चेतना महोत्सव’ में धर्म, राष्ट्र, प्रकृति और समाज पर हुआ गहन मंथन।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
प्रतापगढ़, 18 जून 2026।
बकुलाही तट पर संकट मोचन बालाजी धाम छोटी खरवई में जांबाज़ हिंदुस्तानी एवं इंडिया अगेंस्ट पॉलीथिन के संयुक्त तत्वावधान में “समग्र चेतना महोत्सव” का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में धर्म, राष्ट्र, प्रकृति और समाज जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-मंथन किया गया।
कार्यक्रम में संत-महात्माओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर समाज में जागरूकता, एकता एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित लोगों द्वारा भगवान बजरंगबली जी के पूजन से तथा अमित मौर्य एवं सुभाष तिवारी द्वारा श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा पाठ से किया गया।
इसके उपरांत संकट मोचन बालाजी धाम खरवई के अध्यक्ष योगी देवरहा जंगल बाबा ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र देकर एवं माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु शांडिल्यजी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता, सेवा, कर्तव्य और लोककल्याण की भावना का आधार है।
उन्होंने समाज को आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जोड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर छोटी मां कल्याणी देवी ने युवाओं में बढ़ती धार्मिक चेतना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं उत्थान के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में मुख्य उद्बोधन देते हुए धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडेय उर्फ अनिरुद्ध रामानुज दास जी महाराज ने वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक सनातन संस्कृति की महत्ता एवं उसकी वैज्ञानिक तथा दार्शनिक प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना विश्व बंधुत्व, प्रकृति संरक्षण और मानव कल्याण में निहित है।
आरएसएस के खंड बौद्धिक प्रमुख मांधाता के अजय प्रताप सिंह ने उपस्थित जनसमूह से अपने भीतर निहित ईश्वरत्व को पहचानने और धर्मोचित आचरण अपनाने का आह्वान किया।
जांबाज़ हिंदुस्तानी के अध्यक्ष आलोक आजाद ने सनातन परंपरा में गौ, गंगा और गीता की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण को सांस्कृतिक उत्तरदायित्व बताया।
विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद इंदुभाल त्रिपाठी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी विदेहानन्द जी महाराज ने सनातन धर्म के शौर्य, त्याग और गौरवपूर्ण इतिहास का उल्लेख करते हुए समाज को संगठित एवं जागरूक रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्र के प्रति सजग होता है, तभी वास्तविक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन इंडिया अगेंस्ट पॉलीथिन के आलोक तिवारी ने किया, जबकि आयोजन को सफल बनाने में जांबाज़ हिंदुस्तानी के अध्यक्ष आलोक आजाद की विशेष भूमिका रही।
महोत्सव में उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए पॉलीथिन जैसी प्रकृति-विनाशक वस्तुओं के यथासंभव बहिष्कार का सामूहिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर बाबा श्याम दास “संगम”, मुस्कान किन्नर, अद्वैत दशरथ तिवारी, लव सिंह गहलोत, अनुराग सिंह, नवीन बजरंगी, नागेन्द्र सिंह, त्रिभुवन सिंह “कल्लू”, शिवसागर शुक्ल, लल्लू महाराज, संदीप सिंह, राम बरन सिंह, फतेह बहादुर सिंह, विश्वनाथ प्रजापति, शिव अग्रहरि, अंशुमान सिंह स्वतंत्र, आलोक प्रताप सिंह, अरुणेश अग्रहरि, पियूष शुक्ल, शारदा, अमर बहादुर, दिवाकर दुबे “फौजी”, रवीश तिवारी, राकेश सिंह* सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक मंगलकामना एवं सात्विक महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह ने ऐसे आयोजनों को समाज में सकारात्मक चेतना, सांस्कृतिक जागरण और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।


