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निर्झर प्रतापगढ़ी ने खोजा प्राचीन पांडुलिपियां।

महाभारत कालीन यक्ष-युधिष्ठर संवाद स्थल अजगरा के सुप्रसिद्ध कवि एवं पुरातत्वविद् पं. राजेश कुमार पाण्डेय उर्फ निर्झर प्रतापगढ़ी ने कई महत्वपूर्ण प्राचीन पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें संग्रहीत किया है।

निर्झर प्रतापगढ़ी ने खोजा प्राचीन पांडुलिपियां

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
प्रतापगढ़, 21 जून।

महाभारत कालीन यक्ष-युधिष्ठर संवाद स्थल अजगरा के सुप्रसिद्ध कवि एवं पुरातत्वविद् पं. राजेश कुमार पाण्डेय उर्फ निर्झर प्रतापगढ़ी ने कई महत्वपूर्ण प्राचीन पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें संग्रहीत किया है।

इनमें सर्वाधिक पुरानी पांडुलिपि जिसकी माप -33×13 से.मी.व प्राचीनता सन् -1270 स्पष्ट है ।

इसी प्रकार अन्य पांडुलिपियों की माप क्रमशः 19×10से.मी., 25×10 से.मी., 24×11से.मी., 34.5×12से.मी., 20×14से.मी. एवं 23×15से.मी.है।

ये सभी पांडुलिपियां बादामी रंग के मटमैले जीर्ण -शीर्ण कागज पर हाथ से लिखी गई हैं। जिनकी लिपि मुड़ुवा देवनागरी है। ये कुछ को छोड़कर अस्पष्ट एवं अपठनीय हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2005 ई. में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा चलाए गए पांडुलिपियों की खोज के अभियान में भी निर्झर प्रतापगढ़ी द्वारा प्रतापगढ़ जनपद से सर्वाधिक 84 पांडुलिपियों की खोज की गई थीं, जिस योगदान पर इन्हें जिलाधिकारी प्रतापगढ़ द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।

वर्तमान समय में भी पुनः भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम् योजना के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज का अभियान चला रखा है जिसके तहत यह कार्य किया गया है।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

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