अवधी के कवि निर्झर प्रतापगढ़ी की कविताओं पर लघु शोध प्रबन्ध।
एमडी पीजी कालेज में हिंदी के प्राध्यापक डा० अरुण कुमार मिश्र के अधीन अध्ययनरत छात्रा शशि मिश्रा ने अवधी भाषा में हास्य व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर निर्झर प्रतापगढ़ी के काव्य पर लघु शोध प्रबन्ध प्रारंभ किया है।

अवधी के कवि निर्झर प्रतापगढ़ी की कविताओं पर लघु शोध प्रबन्ध।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
प्रतापगढ़, 17 मई।
एमडी पीजी कालेज में हिंदी के प्राध्यापक डा० अरुण कुमार मिश्र के अधीन अध्ययनरत छात्रा शशि मिश्रा ने अवधी भाषा में हास्य व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर निर्झर प्रतापगढ़ी के काव्य पर लघु शोध प्रबन्ध प्रारंभ किया है।
डा० मिश्र ने बताया कि निर्झर प्रतापगढ़ी केवल प्रतापगढ़ जनपद ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष में काव्य-मंचों, कैसेटों एवं विभिन्न प्रकाशनों से प्रकाशित अपनी पुस्तकों के माध्यम से अवधी एवं खड़ी बोली की लोकप्रिय कविताओं व लोकगीतों द्वारा जन मानस पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं। वह दर्जनों पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रसिद्ध कवि एवं पुरातत्वविद् डॉ.राजेश कुमार पाण्डेय उर्फ निर्झर प्रतापगढ़ी की लोकप्रियता को दृष्टिगत रखते हुए मुनीश्वर दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्रतापगढ़ के हिंदी विभाग में शशी कांति मिश्रा द्वारा उनके साहित्यिक अवदान पर लघु शोध प्रबन्ध तैयार किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि कि निर्झर प्रतापगढ़ी ही जनपद के एक मात्र ऐसे कवि हैं जिन्होंने
कविता के साथ -साथ पुरातत्व के क्षेत्र में भी विश्वस्तरीय अपनी नई खोजों के जरिए एक नया मुकाम हासिल किया है।
उन्होंने हिंदी साहित्य के महान् हस्ताक्षर राष्ट्र-कवि पं.सोहन लाल द्विवेदी, डॉ.शिव मंगल सिंह सुमन, वीर रसावतार पं.श्याम नारायण पाण्डेय, डॉ.रामकुमार वर्मा व गोपाल दास नीरज जैसी महान विभूतियों के साथ एक नहीं कई बार कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य -पाठ किया है।
एक दौर था जब अनेक आडियो कैसेट कंपनियों ने इनकी हास्य-व्यंग्य कविताओं व अवधी लोकगीतों के कई कैसेट इनके ही स्वर में रिकॉर्ड कर रिलीज किए थे जो उस समय काफी लोकप्रिय रहे।

