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तथ्य छिपाने पर सख्त हुआ उच्च न्यायालय, ठोंका 1 लाख का जुर्माना 

अमेठी की पूर्व चेयरमैन चंद्रमा देवी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका आदेश से न मचा हड़कंप

तथ्य छिपाने पर सख्त हुआ उच्च न्यायालय, ठोंका 1 लाख का जुर्माना 

 

अमेठी की पूर्व चेयरमैन चंद्रमा देवी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका, आदेश से मचा हड़कंप

 

Global भारत डेस्क: रसूख के दम पर उच्च न्यायालय को गुमराह करने के मामले में सख्त हुई कोर्ट ने अमेठी की पूर्व चेयरमैन एवं राजेश मसाला समूह से जुड़ी चंद्रमा देवी पत्नी राजेश अग्रहरि को कथित धोखाधड़ी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अर्थ दंड लगाया है। राजेश मसाला के संस्थापक राजेश ग्रहरी को बड़ा झटका लगा है। माननीय हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस राशि में ₹30 हजार वादी घनश्याम सोनी को तथा ₹70 हजार राजस्व मद में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामला उस विवादित मकान से जुड़ा है जिस पर घनश्याम सोनी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन चेयरमैन चंद्रमा देवी ने अपने रसूख का प्रयोग करके मकान को अपने करीबी लोगों के नाम ट्रांसफर करा दिया। यह मामला सुल्तानपुर कोर्ट में विचाराधीन रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इसी प्रकरण में हाल ही में निचली अदालत द्वारा चंद्रमा देवी को जेल भी भेजा गया था। इसके बाद राहत पाने के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

लेकिन सुनवाई के दौरान तथ्यों को छिपाने और न्यायालय को पूरी जानकारी न देने पर माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए याचिका खारिज कर दी और ₹1 लाख का जुर्माना ठोक दिया। हाईकोर्ट की इस कार्रवाई के बाद अमेठी की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला जिस पर सख्त हुई कोर्ट

अपने रसूख और धनबल के चलते चंद्रमा देवी पत्नी राजेश अग्रहरी ने घनश्याम सोनी ने आरोप लगाते हुए बाद दायर किया कि उसके मकान को चंद्रमा देवी ने धन्नासेठ पति की पहुंच और प्रभाव के चलते अपने किसी खास के नाम स्थानांतरित करवा लिया। निचली अदालत में उसका मुकदमा विचाराधीन है। इसी मामले में निचली अदालत के विचाराधीन किमिनल रिवीजन केस को छिपाते हुए एक मुकदमा उच्च न्यायालय 482 सीआरपीसी के तहत में कर दिया। सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि इस मामले में आपराधिक पुनर्निरीक्षण का प्रकरण विचाराधीन है। न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने कहा कि समान प्रकृति के मामले में जानकारी छिपाना न सिर्फ अनुचित है बल्कि न्यायालय के साथ गंभीर अपराध कहा जाएगा। न्यायालय का ये भी कहना है कि जो व्यक्ति न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है उसे साफ हृदय से आना चाहिए जबकि इस मामले में अंतरिम स्टे पाने के लिए याची ने न्यायालय से तथ्यों को छिपाया है। जिस जानबूझकर किए गए कृत्य की श्रेणी में रखा जाएगा। इसी आधार पर उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने चंद्रमा देवी पर 1 लाख का अर्थ दंड लगाया है। जिसमें 30 प्रतिशत धन याची को देने और शेष 70 प्रतिशत राजस्व विभाग में जमा कराने का आदेश दिया।

न्यायालय के इस दंड की धमक न सिर्फ अमेठी, सुलतानपुर बल्कि न्याय जगत में सुनाई दे रही है।

Vinod Mishra

सामाजिक सरोकारो पर सीधी पकड़ और बेबाक पत्रकारिता के लिए समर्पित...ग्लोबल भारत न्यूज़ संस्थान के लिए सेवा

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