रात 12 बजे ही प्रतापगढ़ कलेक्ट्रेट में फहरा दिया था तिरंगा 🇮🇳
मतुई नमक शायर, कहला, रुरे के स्मारक प्रेरणाप्रद

प्रतापगढ़ में रात 12 बजे ही फहरा दिया था तिरंगा
आजादी की लड़ाई का केंद्र रहा प्रतापगढ़।
प्रतापगढ़ : आजादी की लड़ाई में आज 14 अगस्त बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन था। जिस दिन आजादी के सभी दस्तावेज पर अंतिम दस्तखत हुए। इस दौरान प्रतापगढ़ राष्ट्र का गौरव रहा है यहाँ आजादी के दीवानों नें रात्रि में12 बजे ही तिरंगा फहरा दिया था।

आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों से लोहा लेने लायक क्रांतिकारियों को प्रतापगढ़ से विभिन्न प्रकार के गोला,बारूद,असलहे इत्यादि उपलब्ध हुए । जिससे उन्हें आत्म बल मिला और ऊंचे मनोबल से अंग्रेजों को मां भारती का प्रेम और आजादी का जुनून दिखाकर राष्ट्र के रणबाकुरों नें अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए। जिससे वह लड़ाई जीत ली गई जो भारतवर्ष के लिए नासूर बन चुकी थी। जब भी देश की आजादी का जिक्र होता है तो प्रतापगढ़ जनपद का नाम बड़े फक्र से लिया जाता है क्योंकि प्रतापगढ़ जनपद में न केवल आजाद चंद्रशेखर नें रहकर लोगों में देश भक्ति भरी बल्कि यहां के लाला मथुरा प्रसाद सिंह और बाबू गुलाब सिंह के सहयोग से उन्होंने गोला बारूद जुटाया और बनाया जिसे देश के क्रांतिवीर सिपाहियों को उपलब्ध करवाया। प्रतापगढ़ जनपद में हुए किसान आंदोलन को आजादी की लड़ाई का अहम आंदोलन माना गया है जो यहां के कहला गांव में हुआ था।बताया जाता है कि किसान आंदोलन के दौरान जब किसानों का यहां भारी मात्रा में जमावड़ा हुआ तो इसकी भनक अंग्रेजी हुकूमत को लगी जिससे घबराए अधिकारियों ने किसानों पर हमला करवा दिया जिससे बड़ा खून खराबा हुआ था आज इस स्थल पर स्मारक बना हुआ है जो जिले का गौरवपूर्ण इतिहास बयां करता हमें गौरवान्वित करता है । यहाँ के किसान आंदोलन नें सरकार की नींव हिला दी थी । रामचंदर किसाने को आज हम बड़े गौरव के साथ याद करते हैं जिन्होंने किसानों को एक जुट कर आजादी के दीवानों की एक मजबूत फ़ौज तैयार की। आजादी के बाद सबसे पहले झंडा प्रतापगढ़ कलेक्ट्रेट में फहराया गया था। यह भी इस जनपद के विशेष योगदान की बड़ी घटना रही।
आज भी यहाँ की माटी गौरव गाथाओं को से भरी हुई है । इस माटी में हर समय प्रेरणाप्रद आंदोलन हुए जिसे सम्पूर्ण राष्ट्र गौरव का विषय मानता है।




