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संभल में प्राचीन बावड़ी की खुदाई पर ब्रेक, ASI टीम ने खतरे की चेतावनी दी

संभल में प्राचीन बावड़ी की खुदाई पर ब्रेक, ASI टीम ने खतरे की चेतावनी दी

संभल में प्राचीन बावड़ी की खुदाई पर ब्रेक, ASI टीम ने खतरे की चेतावनी दी

संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित प्राचीन बावड़ी की खुदाई पर ब्रेक लग गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) टीम ने खतरे की चेतावनी देते हुए मजदूरों को बावड़ी की गहराई में जाने से रोक दिया है।

बावड़ी की खुदाई और साफ-सफाई का 14वां दिन था, लेकिन ASI टीम ने खतरे की चेतावनी देते हुए काम रोक दिया। ASI के अधिकारी राजेश कुमार मीणा ने बताया कि बावड़ी के अंदर की दीवारें कमजोर हैं और ये गिर सकती हैं या नीचे धंस सकती हैं।

उन्होंने बताया कि बावड़ी की दीवारें 25 फीट तक खुदाई के बाद कमजोर हो गई हैं। इसलिए, मजदूरों को बावड़ी की गहराई में जाने से रोक दिया गया है। ASI टीम ने आगे की कार्रवाई के लिए अपने लोगों को बुलाया है।

बावड़ी का इतिहास

संभल के चंदौसी इलाके में स्थित यह बावड़ी साल 1730 में राजा आत्माराम द्वारा बनवाई गई थी। यह बावड़ी लंबे समय से गुमनाम थी और इसके ऊपर मलबे के ढेर इकट्ठा थे। अब इसकी खुदाई में नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

बावड़ी की खुदाई में सामने आए लेंटर की हालत क्षतिग्रस्त है। ASI टीम ने बताया कि बावड़ी की दीवारें कमजोर हैं और ये गिर सकती हैं या नीचे धंस सकती हैं। इसलिए, मजदूरों को बावड़ी की गहराई में जाने से रोक दिया गया है।

ASI टीम की ओर से आगे की कार्रवाई के लिए अपने लोगों को बुलाया गया है। बावड़ी की खुदाई और साफ-सफाई का काम जल्द ही फिर से शुरू होगा।

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