आसमान बरसता रहा… और खेत में किसान की पूरी मेहनत चुपचाप भीगती रही
कटाई के बाद बारिश ने रोकी मड़ाई, हर बीतते दिन के साथ टूट रही उम्मीदें

आसमान बरसता रहा… और खेत में किसान की पूरी मेहनत चुपचाप भीगती रही
कटाई के बाद बारिश ने रोकी मड़ाई, हर बीतते दिन के साथ टूट रही उम्मीदें
प्रतापगढ़ जिले में मौसम की बेरुखी ने इस बार किसानों को सबसे नाजुक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक सुनहरी फसल लहलहा रही थी, वहीं अब कटाई के बाद वही फसल भीगकर खेतों में पड़ी है—और उसके पास खड़ा किसान खामोश होकर आसमान को देख रहा है।
बीते दो दिनों से हो रही बारिश ने मड़ाई की पूरी प्रक्रिया को रोक दिया है। गेहूं की फसल, जिसे किसान बड़ी उम्मीदों के साथ काटकर जमा किए थे, अब नमी से भारी हो गई है। दाने खराब होने का डर हर किसान के मन में घर कर गया है। धूप न निकलने से फसल सूख नहीं पा रही और हर गुजरते दिन के साथ नुकसान बढ़ता जा रहा है।
जिले के कुंडा, लालगंज, पट्टी समेत कई इलाकों में एक ही तस्वीर नजर आ रही है—खेतों में पड़ी भीगी फसल और उसके बीच खड़ा किसान, जो समझ नहीं पा रहा कि अब क्या करे।
कुंडा क्षेत्र के किसान रामकिशोर यादव, राकेश द्विवेदी, आशीष पांडेय, विमलेश कुमार की आंखों में चिंता साफ झलकती है। वह कहते हैं,
“सब तैयार था… बस मड़ाई करनी थी। लेकिन बारिश ने सब रोक दिया। अब फसल भीग रही है… और हम बस देखते रह गए।”
यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले के हजारों किसानों की हालत है। महीनों की मेहनत, दिन-रात की भागदौड़ और उम्मीदों से भरी खेती—सब कुछ इस वक्त मौसम के रहमोकरम पर टिका हुआ है।
खेतों में पड़ी यह भीगी फसल अब सिर्फ अनाज नहीं रह गई है। यह किसानों की उम्मीदें हैं, उनके परिवार का सहारा है, उनके सपनों की नींव है—जो हर गिरती बूंद के साथ कमजोर होती जा रही है।
फिलहाल, प्रतापगढ़ का किसान कुछ नहीं कर पा रहा…
बस आसमान की ओर देख रहा है—
कि शायद अब धूप निकल आए…
और उसकी बची-खुची उम्मीद भी सूखने से बच जाए।

