जब कर्मचारी पर टूटा तूफान का कहर, तब फरिश्ता बनकर खड़ा हुआ सीएचसी कुंडा परिवार
अधीक्षक डॉ. राजीव त्रिपाठी की पहल पर जुटी ₹1.23 लाख की मदद, उजड़े आशियाने में लौटाई उम्मीद की रोशनी

जब कर्मचारी पर टूटा तूफान का कहर, तब फरिश्ता बनकर खड़ा हुआ सीएचसी कुंडा परिवार
अधीक्षक डॉ. राजीव त्रिपाठी की पहल पर जुटी ₹1.23 लाख की मदद, उजड़े आशियाने में लौटाई उम्मीद की रोशनी
कुंडा, प्रतापगढ़। संकट की घड़ी में किसी जरूरतमंद के साथ खड़ा होना ही सच्ची इंसानियत है और इसी मानवीय संवेदना का जीवंत उदाहरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडा में देखने को मिला। सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार त्रिपाठी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर न केवल एक पीड़ित कर्मचारी के परिवार का दर्द समझा, बल्कि उसके टूटे आशियाने को फिर से खड़ा करने के लिए ऐसा मानवीय अभियान चलाया, जिसकी क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडा में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत पुष्पेंद्र दूबे निवासी ग्राम पंचायत महाराजपुर के घर की छत हाल ही में आए भीषण तूफान में पूरी तरह धराशायी हो गई थी। हादसे के बाद उनकी माता, बहन और भांजी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गई थीं। आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार की इस स्थिति ने पूरे सीएचसी परिवार को भावुक कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार त्रिपाठी एवं डॉ. रोहित सिंह ने तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक आशीष दूबे को मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लेने और मदद की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद छत निर्माण में आने वाले खर्च का आकलन किया गया।
इसके बाद डॉ. राजीव कुमार त्रिपाठी एवं डॉ. रोहित सिंह के मार्गदर्शन में सहयोग अभियान शुरू किया गया। अभियान की जिम्मेदारी संभालते हुए आशीष दूबे ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सीएचसी कुंडा परिवार एवं अन्य सहयोगियों के माध्यम से कुल ₹1,23,000 की सहायता राशि एकत्रित की।
बाद में आशीष दूबे ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर पुष्पेंद्र दूबे की माता को सहयोग राशि सौंपी और भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी किसी भी संकट की घड़ी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडा परिवार उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
इस अवसर पर अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग केवल इलाज का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का केंद्र भी है। किसी कर्मचारी या उसके परिवार पर संकट आने पर संस्थान के सभी सदस्यों का नैतिक दायित्व बनता है कि वे हरसंभव सहयोग करें।
उल्लेखनीय है कि ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक आशीष दूबे इससे पहले भी कई सामाजिक और मानवीय अभियानों में अहम भूमिका निभा चुके हैं। उनके प्रयासों से पूर्व में आशा कार्यकर्ती स्वर्गीय लक्ष्मी श्रीवास्तव एवं स्वर्गीय रीता मिश्रा के परिवारों को ₹30-30 हजार, एएनएम मनोज कुमारी के पति के निधन पर ₹30 हजार तथा ग्राम सुजौली निवासी आशा कार्यकर्ती गीता पटेल के पति के आकस्मिक निधन पर ₹40 हजार की सहायता राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
सीएचसी कुंडा परिवार की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत और सहयोग की भावना आज भी समाज में जीवित है। संकट की घड़ी में किसी के चेहरे पर उम्मीद लौटाना ही सबसे बड़ी मानव सेवा है।


