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अग्रिम जमानत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अनावश्यक गिरफ्तारी से बचाना –राम मिलन शुक्ला

अग्रिम जमानत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अनावश्यक गिरफ्तारी से बचाना –राम मिलन शुक्ला

प्रतापगढ़। भारतीय भाषा अभियान काशी प्रांत प्रतापगढ़ इकाई के आयोजकत्व में शनिवार को अधिवक्ता भवन में अग्रिम जमानत के प्रावधान एवं उसकी सुसंगतता पर हिंदी विधि व्याख्यान का आयोजन किया गया।

इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता राम मिलन शुक्ला ने कहा कि अग्रिम जमानत का प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 में था परंतु भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 के लागू होने के बाद इस प्रावधान को धारा 482 के तहत अद्यतन किया गया है, जो अग्रिम जमानत की पहुंच सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों या अनावश्यक गिरफ्तारी से बचाना है और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना है।किसी ऐसे व्यक्ति जिस पर किसी गैर-जमानती अपराध में झूठे आरोप लगने की आशंका हो,जिससे उसकी अनावश्यक गिरफ्तारी और हिरासत को रोका जा सके।अग्रिम जमानत एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी से पहले ही अदालत से जमानत मिल जाती है,यदि उसे गैर-जमानती अपराध में गिरफ्तारी का डर हो। इसके लिए व्यक्ति को सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के अंतर्गत आवेदन करना होता है। अदालत मामले की गंभीरता,अपराध की प्रकृति और आवेदक के पूर्ववृत्त को ध्यान में रखकर फैसला लेती है। इस मौके पर श्री शुक्ल अग्रिम जमानत की शर्तें पर विस्तृत जानकारी दी।कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय भाषा अभियान के जिला सहसंयोजक राजाराम सरोज व संचालन जिला सह संयोजक सतीश दुबे ने किया।

इस मौके पर प्रमुख रूप से कौशलेश त्रिपाठी,आशीष गुप्ता, अभिषेक मिश्रा,आकाश पांडेय,पंपम सिंह,शशांक शुक्ला,अरविंद पांडेय, आनन्द शुक्ला,प्रवीण तिवारी,ओम दुबे आदि अधिवक्तागण मौजूद रहें।

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