अजगरा पुरातत्व संग्रहालय में रखी प्राचीन पांडुलिपियों का परीक्षण।
भारत सरकार की ओर से चलाये जा रहे ज्ञान भारतम् अभियान के अन्तर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय -कला केन्द्र वाराणसी के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर डा० रजनी कान्त त्रिपाठी ने पुरातत्व संग्रहालय अजगरा का निरीक्षण किया।

अजगरा पुरातत्व संग्रहालय में रखी प्राचीन पांडुलिपियों का परीक्षण।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क
प्रतापगढ़, 27 अप्रैल।
भारत सरकार की ओर से चलाये जा रहे ज्ञान भारतम् अभियान के अन्तर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय -कला केन्द्र वाराणसी के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर डा० रजनी कान्त त्रिपाठी ने पुरातत्व संग्रहालय अजगरा का निरीक्षण किया।
उल्लेखनीय है कि अपनी प्राचीन विरासत विभिन्न भाषाओं व लिपियों में महान ऋषियों, विद्वानों, एवं पूर्वजों द्वारा भोज पत्र, ताम्र पत्र एवं कागज आदि पर लिखी सैकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों को सूचीबद्ध कर उनके संरक्षण के लिए एक कार्य योजना चलाई जा रही है।
इस योजना के अन्तर्गत गत दिवस वाराणसी से पधारे केन्द्र के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर डॉ. रजनी कांत त्रिपाठी ने प्रतापगढ़ जनपद के महाभारत कालीन यक्ष -युधिष्ठर संवाद स्थल अजगरा में साहित्यकार एवं पुरातत्व विद् डॉ.राजेश कुमार पाण्डेय उर्फ निर्झर प्रतापगढ़ी द्वारा संस्थापित पुरातत्व एवं लोक -कला संग्रहालय में उनके द्वारा खोजकर रखी गयी विभिन्न विषयों पर लिखी गई प्राचीन पांडुलिपियों का परीक्षण एवं अवलोकन कर छायांकन किया।
ज्ञात हो कि वर्ष -2005 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा चलाए गए खोज अभियान में निर्झर प्रतापगढ़ी ने सर्वाधिक सौ से अधिक पांडुलिपियों की खोज कर उनका संग्रह किया था जिसमें अभियान की अंतिम तिथि तक 84 पांडुलिपियां सूचीबद्ध की गई थीं।
इसके संबंध में पांडुलिपि मिशन द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से उन्हें प्रशस्ति पत्र भी मिला था ।

