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उत्तरप्रदेशलखनऊ

और अब विश्वविद्यालय की परीक्षा में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पर सवाल पूंछे गए।

राजनैतिक लोगों की देखा-देखी विश्वविद्यालय शिक्षकों में भी जाति का जहर प्रवेश कर गया है। एम ए प्रथम सेमेस्टर प्राचीन इतिहास की परीक्षा में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पूंछी गई है।

और अब विश्वविद्यालय की परीक्षा में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पर सवाल पूंछे गए।

ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क
लखनऊ, 19 फरवरी।

राजनैतिक लोगों की देखा-देखी विश्वविद्यालय शिक्षकों में भी जाति का जहर प्रवेश कर गया है। एम ए प्रथम सेमेस्टर प्राचीन इतिहास की परीक्षा में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पूंछी गई है।

विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर की उक्त परीक्षा में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पर सवाल देखकर परीक्षार्थी स्तब्ध रह गए। उनको अचंभा हुआ कि क्या जाति का जहर इस सीमा तक लोगों के दिलो-दिमाग में घुस गया है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि आक्रामकों को तो हम आक्रांता मानते आए लेकिन यशस्वी शासकों और राजाओं को हमने जाति की दृष्टि से कभी नहीं देखा और न ही उनकी जाति जानने की कभी उत्सुकता रही।

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के स्वर्णिम कार्यकाल को भला कौन नहीं जानता किन्तु हमने बस इतना ही अब तक जाना कि वह एक चरवाहा परिवार से थे और उनकी योग्यता को पहचान कर चाणक्य ने उनको राजा बनाया।

किन्तु आज हमारे अंदर जाति का जहर इतना हममें प्रवेश कर गया है कि विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित हो रही स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में प्राचीन इतिहास के एक प्रश्न में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पूछ ली गयी है।

विश्वविद्यालय की कुलपति डा. शोभा गौड़ से जब पत्रकारों ने इस मामले में उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इसे अनुचित माना और कहा कि परीक्षा नियंत्रक के माध्यम से पेपर सेटर, विषय विशेषज्ञ, माडरेटर आदि से बात करके ही वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगी और जो दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई करेंगी।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

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