समोसे की चाह बनी मौत का कारण: मानिकपुर स्टेशन पर चलती ट्रेन ने छीनी रिटायर्ड कर्मचारी की जिंदगी
ट्रेन छूटते ही दौड़े, पैर फिसला और खत्म हो गई जिंदगी; पुलिस की देरी पर उठे सवाल

समोसे की चाह बनी मौत का कारण: मानिकपुर स्टेशन पर चलती ट्रेन ने छीनी रिटायर्ड कर्मचारी की जिंदगी ही
ट्रेन छूटते ही दौड़े, पैर फिसला और खत्म हो गई जिंदगी; पुलिस की देरी पर उठे सवाल
जिंदगी और मौत के बीच कभी-कभी बस एक पल का फासला होता है… और वही एक पल 61 वर्षीय अशोक कुमार के लिए आखिरी साबित हुआ।
प्रतापगढ़ जिले के मानिकपुर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह सब कुछ सामान्य था। ट्रेन रुकी, यात्री उतरे-चढ़े, चाय-समोसे की आवाजें गूंज रही थीं। इन्हीं आवाजों के बीच अशोक कुमार भी समोसा लेने के लिए ट्रेन से नीचे उतर गए। किसे पता था कि यह उनका आखिरी फैसला साबित होगा।
समोसा लेकर जैसे ही वह लौटे, ट्रेन चल पड़ी। अपनी सीट और सफर को बचाने के लिए वह तेजी से दौड़े… चलती ट्रेन को पकड़ने की कोशिश की… लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अचानक उनका पैर फिसला और अगले ही पल वह ट्रेन की चपेट में आ गए।
प्लेटफॉर्म पर खड़े लोग सन्न रह गए। कुछ ही सेकंड में सब कुछ खत्म हो चुका था। जो आदमी कुछ पल पहले जिंदा था, अब जिंदगी की जंग हार चुका था।
घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस पहुंची और उन्हें सीएचसी कुंडा ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अशोक कुमार, प्रयागराज के राम प्रिया रोड निवासी थे। मत्स्य विभाग में सहायक पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए थे। लखनऊ से अपने घर लौट रहे थे, लेकिन यह सफर उनका आखिरी सफर बन गया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद एक और कड़वी सच्चाई सामने आई—प्रशासनिक लापरवाही। सूचना के बावजूद जीआरपी के मौके पर पहुंचने में करीब ढाई घंटे लग गए। जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम बना रहा और इसी में वक्त बीतता गया।
🗣️ क्या बोले जीआरपी चौकी इंचार्ज?
जीआरपी चौकी इंचार्ज प्रदीप सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही टीम को मौके पर भेजा गया था। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह हादसा चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान पैर फिसलने से हुआ है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इधर, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी सुलेखा, बेटा सागर और बेटी अंजलि का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में खुशियों के साथ उनका इंतजार हो रहा था, वहां अब सन्नाटा और मातम पसरा है।
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक गहरी सीख भी है—चलती ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी कभी-कभी जिंदगी की आखिरी गलती बन जाती है। वहीं, समय पर न पहुंचने वाली व्यवस्था भी कई सवाल छोड़ जाती है… जिनका जवाब शायद ही कभी मिल पाता


