ब्रेकिंग
पटना में कांग्रेस मुख्यालय सदाकांत आश्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं का हमला लोकतंत्र में काला अध्याय- प्... सीएम के अभिभाषण के दौरान कुर्सी पर सोते दिखे इंस्पेक्टर, वीडियो वायरल सीएम योगी ने प्रतापगढ़ जिले को 570 करोड़ की 116 परियोजनाओं की दी सौगात कांग्रेस नेता ने योगी से पूछा सवाल विकास केवल चुनिंदा जगहों पर क्यों बिना नकेल कसे परियोजनाओं का कोई भविष्य नहीं योगी जी अपर जिला जज ने किया कारागार का निरीक्षण विधायक सदर, डीएम एवं एसपी ने साइबर थाना भवन का भूमि पूजन एवं किया शिलान्यास गैर इरादतन हत्या के आरोप में कोर्ट ने सुनाया दस वर्ष की कारावास की सजा सीएम योगी के आगमन को लेकर भाजपा कार्यालय पर हुई बैठक कलयुगी बेटे ने पिता की हत्या की, वजह बनी पॉकेट मनी और रोज़ की डांट
उत्तरप्रदेशलखनऊ

बिजली विभाग के पांच और मुख्य अभियंता व एक अधीक्षण अभियंता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली।

उल्लेखनीय है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन पर उत्पीड़न का भी आरोप लगाते हुए पिछले एक वर्ष के दौरान ही 20 से अधिक मुख्य व अधीक्षण अभियंता वीआरएस ले चुके हैं।

बिजली विभाग के पांच और मुख्य अभियंता व एक अधीक्षण अभियंता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली।

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
राज्य संवाददाता
ग्लोबल भारत न्यूज

लखनऊ, 1 फरवरी।

उल्लेखनीय है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन पर उत्पीड़न का भी आरोप लगाते हुए पिछले एक वर्ष के दौरान ही 20 से अधिक मुख्य व अधीक्षण अभियंता वीआरएस ले चुके हैं।

बिजली कंपनियों के लगातार बढ़ते घाटे के मद्देनजर पावर कारपोरेशन प्रबंधन पहले-पहल दो डिस्काम (पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम) के 42 जिलों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारियों में जुटा है।

लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक के घाटे में पहुंच चुकी बिजली कंपनियों को अब राज्य सरकार भी वित्तीय मदद करने को तैयार नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है तमाम विरोध के बावजूद देर-सबेर बिजली कंपनियों का निजीकरण होना तय है। 

इस बीच प्रदेशवासियों को बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डाॅ. आशीष कुमार गोयल व प्रबंधन निदेशक पंकज कुमार लगातार समीक्षा बैठकों में बिजली चोरी पर कड़ाई से अंकुश लगाने के साथ ही विद्युत राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। 

विभिन्न कारणों से खराब प्रदर्शन करने वाले अभियंताओं से बैठक में ही जवाब-तलब करने के साथ ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

हालांकि, अभियंताओं का कहना है कि बैठकों में उनकी बातों पर गौर करने के बजाय प्रबंधन का उत्पीड़नात्मक रवैया रहता है। ऐसे में कोई भी स्वाभिमानी अभियंता अब नौकरी करने के बजाय वीआरएस ही लेना चाहेगा।

यही कारण माना जा रहा है कि उन मुख्य व अधीक्षण अभियंताओं द्वारा भी वीआरएस लिया जा रहा है जिनकी नौकरी अभी तीन वर्ष से भी अधिक है।

शुक्रवार को जिन पांच मुख्य अभियंताओं ने वीआरएस लिया है उनमें पूर्वांचल डिस्काम वाराणसी में तैनात संदीप बंसल, मुकेश कुमार गर्ग व शीश पाल सिंह और पश्चिमांचल डिस्काम मेरठ में तैनात रविन्द्र कुमार बंसल व अजय कुमार हैं।

इनके साथ ही पूर्वांचल डिस्काम में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत वकार अहमद ने भी शुक्रवार को वीआरएस ले लिया।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि पिछले एक वर्ष के दौरान सात मुख्य अभियंता और 13 अधीक्षण अभियंता पहले ही वीआरएस ले चुके हैं। 

कई और मुख्य व अधीक्षण अभियंताओं ने वीआरएस के लिए आवेदन भी कर रखा है। वर्मा ने कहा कि इस तरह बड़ी संख्या में अनुभवी बिजली अभियंताओं के वीआरएस लेने की जांच होनी चाहिए। उन्होंने पूर्व में बिजली दरों की सुनवाई के दौरान नियामक आयोग के सामने इस मामले को उठाया भी था।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

यह भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button