पितरों का श्राद्ध अहो सौभाग्य
पितरों के ऋण से उऋण होने और बैकुंठ हेतु चारधाम यात्रा को चले परिजन

पितरों का श्राद्ध अहो सौभाग्य

पितरों के ऋण से उऋण होने और बैकुंठ हेतु चारधाम यात्रा को चले परिजन
प्रतापगढ़ : जगत में मानव जीवन लेने से मृत होने तक विभिन्न दायित्वों का निर्वाहन करते हुए बैकुंठ धाम जाना होता है। इसके लिए सनातन धर्म में मान्यता के अनुसार परिजन चार धाम यात्रा करते हुए श्राद्ध करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान गया में पिंडदान करने से जीवन मरण के बंधन से मुक्त होकर पूर्वज बैकुंठ प्रस्थान कर जाते है। यह पितृऋण कहा जाता है जिससे उऋण होने के लिए पुत्र को यह कर्मकांड करना पड़ता है। इसे छौर कर्म कहा जाता है। जैसा कि इनदिनों पितृपक्ष चल रहा है और बहुतायत लोग गया जा रहे हैं। ऐसे में जनपद के नगरपालिका क्षेत्र के शुकुलपुर बृजेश कुमार शुक्ला अपनी पत्नी उषा देवी शुक्ला के साथ चारों धाम यात्रा को निकले तो अपने परिजनों एवं मित्रों और परिचितों के साथ भोज किया और छौर कर्म प्रारम्भ किया। इस दौरानउनके भाई राजेश कुमार शुक्ला, मनोज कुमार शुक्ला,दिनेश कुमार शुक्ला, प्रवीण कुमार शुक्ला अपने पुरे परिवार के साथ उन्हें नमन करते हुए बिदा किया।



