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मीरजापुर समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ मंत्री ने दिए जांच के आदेश

प्रयागराज में तैनाती के दौरान त्रिनेत्र कुमार सिंह पर करोड़ों के घोटाले का आरोप

मीरजापुर समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ मंत्री ने दिए जांच के आदेश

प्रयागराज में तैनाती के दौरान त्रिनेत्र कुमार सिंह पर करोड़ों के घोटाले का आरोप

प्रयागराज डेस्क, कभी प्रयागराज में तैनात रहे समाज कल्याण अधिकारी के कृत्यों की फाइल जैसे जैसे खुलेगी वैसे वैसे नए घोटालों की फाइल खुलना तय है क्यों की इस बार विभाग के मंत्री ने सीधे उक्त अधिकारी की कुंडली जांचने के लिए आदेश दे दिया है। वर्तमान में मीरजापुर में तैनात समाज कल्याण अधिकारी त्रिनेत्र कुमार सिंह के खिलाफ करोड़ों के घोटाले के आरोप में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के द्वारा जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच के लिए निदेशक समाज कल्याण को पत्र लिखकर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है और जांच रिपोर्ट 30 मई के तक उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। प्रयागराज जनपद के शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इनके द्वारा राष्ट्रीय पारिवारिक योजना के अंतर्गत करोड़ों का घोटाला किया गया है ।
प्रयागराज जनपद में तैनाती के दौरान सन 2022 में उनके द्वारा नियम को ताक पर रखकर अनैतिक तरीके से सरकारी धन का बंदर बांट किया गया जिसकी शिकायत प्रयागराज जनपद के अनुभव श्रीवास्तव के द्वारा की गई है। यही नहीं इनके कार्यकाल में पूरे जिले में अपात्र लोगों और कई मृतकों को योजनाओं का बेजा लाभ पंहुचाई गई है। अगर इनके कार्यकाल की संपूर्ण जांच हो तो कई विस्फोटक खुलासे हो सकते हैं। शिकायतकर्ता की शिकायत का संज्ञान लेते हुए समाज कल्याण मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण द्वारा निदेशक समाज कल्याण लखनऊ को जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। समाज कल्याण अधिकारी त्रिनेत्र सिंह इस समय मिर्जापुर में तैनात है और मिर्जापुर की जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन के द्वारा आइजीआरएस के निस्तारण में लापरवाही बरतने को लेकर भी 9 अप्रैल को निलंबित करने के लिए आरोप पत्र दिए गए थे लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। इससे जहां एक ओर पद पर तैनात अधिकारी पद पर बने रहते हुए क्या जांच को प्रभावित नही करवा सकता इस बात की चर्चा विभाग में हो रही है।

क्या सत्ता के गलियारों से मिल रहा संरक्षण जिसके चलते नही हो पाती कार्यवाई

सवाल उठता है की आखिर ऐसे अधिकारी को कौन संरक्षण दे रहा है जिसके चलते जिलाधिकारी मिर्जापुर के आदेश को भी अमली जामा नही पहनाया जा सका, सत्ता के गलियारों से किसका आशीर्वाद मिलता है जो ऐसे विवादित अधिकारी को किसी भी तरह की कार्यवाई से बचा लेता है। सवाल ये भी उठना लाजिमी है की क्या योगी सरकार में अधिकारी इतने पावर फुल हो गए है करोड़ों की लूट के मामले को अपने दम पर जांच की दिशा बदल देता है तो अधिकारियों का सिंडीकेट त्रिनेत्र सिंह को बचाने में लगा है। सूत्र बताते है की ये जहां जहां तैनात रहते है वहां ऐसी घटनाएं होती है जो सिस्टम को सवालों के घेरे में ला खड़ा कर देती है। फिलहाल प्रयागराज के अनुभव श्रीवास्तव के प्रयासों की सराहना होनी चाहिए जिसने इतने प्रभावशाली अधिकारी के करतूतों को उजागर करने का साहस दिखाया है।

Vinod Mishra

सामाजिक सरोकारो पर सीधी पकड़ और बेबाक पत्रकारिता के लिए समर्पित...ग्लोबल भारत न्यूज़ संस्थान के लिए सेवा

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