ब्रेकिंग
योग की असली कसौटी है भागदौड़ भरी जिंदगी में भी परमात्मा की याद में रहना: राजयोगिनी शिवानी दीदी करुण पाण्डेय बने उपाध्यक्ष पूर्वी जोन जज देवता नहीं — जनता के सेवक मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को किया जागरूक, थानाध्यक्ष धनंजय राय का हुआ सम्मान। नाले में उतराता मिला 42 वर्षीय युवक का शव, प्रतापगढ़: आसपुर देवसरा में जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, वृद्ध की पीट-पीटकर हत्या, बेटा गंभीर, दो महि... प्रतापगढ नशे के सौदागरों पर बड़ा प्रहार - 40 ग्राम MD ड्रग्स के साथ 3 तस्कर गिरफ्तार, स्विफ्ट कार जब... प्रतापगढ़ सदर सीट पर फिर दावेदारी, कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल का ऐलान - 2027 में सदर और विश्वनाथगंज से... पुस्तक मेला कार्निवाल में साहित्य और रचनात्मकता का उत्सव, 15 अक्टूबर को होगा ‘शब्द सम्मान 2026’ एम एस डी कान्वेंट स्कूल में मिशन शक्ति कार्यक्रम आयोजित।
Global भारत न्यूज़उत्तरप्रदेशदेश

हम कितना आजाद हुए स्वाधीनता दिवस पर विशेष

आजादी के आठ दशक बाद भी अभी कई कुरीतियों और अव्यवस्था और भ्रष्टाचार से आजादी बाकी

हम कितना आजाद हुए स्वाधीनता दिवस पर विशेष

आजादी के आठ दशक बाद भी अभी कई कुरीतियों और अव्यवस्था और भ्रष्टाचार से आजादी बाकी

देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, आजादी के बाद देश ने बहुत विकास किया अच्छे बुरे दिन देखे, खट्टी मीठी यादें उपलब्धियों से लेकर कीर्तिमान तक गढ़ डाले हमने लेकिन कुछ विषय आज भी ऐसे परिलक्षित हो रहें है जिनको देखने के बाद अंतर्मन में एक बात अवश्य आती है कि आखिर हम कितने आजाद हुए है।
देश आज जिस अंतर्द्वंद से गुजर रहा है इसको हर भारतीय को समझना होगा कि ब्रिलियंसी से भरा पुरा देश आज भी कई मोर्चों पर युद्ध जैसे हालातों का सामना करना पड़ जाता है। क्षेत्रीय रूढ़िवादिता, सही मायने में शैक्षिक स्तर का ह्रास होना, जातीयता की संकीर्ण सोच जैसे तमाम मुद्दे ऐसे है जिन पर मंथन करिए तो आज भी देश में कई ऐसी कुरीतियाँ है जिनसे हर भारतीय को आजादी चाहिए। राजनीति में जाति से आजादी, आरक्षण में जाति से आजादी, शिक्षा हो या सिस्टम हर तरह एक आजादी की आवश्यकता है। क्या कभी भ्रष्टाचार से आजादी मिलेगी देश को और उसके नागरिक को। राजपथ बनाए जा रहे है लेकिन एक माह के भीतर सड़के टूट रही है, इस अब अव्यवस्था से आजादी, दवाएं अस्पतालों में भेजी जा रही है स्थानीय स्तर पर भी खरीदने की छूट दी गई है लेकिन सरकारी अस्पतालों में आज भी पूरी दवाइयां नहीं मिल पाती परिणाम स्वरूप अंधी बाजार व्यवस्था का शिकार होना पड़ता है, इस अव्यवस्था से आजादी कब मिलेगी, शायद ही इस विषय पर सोचने की फुर्सत किसी के पास हो। शादी विवाह के लिए बनाई गई जातियां अब राजनीति का आधार बन गई हैंजिसके चलते अयोग्य जन प्रतिनिधि बन रहे है, इससे व्यवस्था को उनका भी बोझ ढोना पद रहा है, जनप्रतिनिधि जाति के आधार पर नहीं योग्यता के आधार पर चुने जाने चाहिए लेकिन हो उलटा रहा है, राजनीति को संकीर्ण सोच के बंधन से बाहर निकाल कर उसको भी आजाद करना चाहिए।
भारत के हर नागरिक इससे पीड़ित है लेकिन ग़ुलामी के विचारों से आजादी तभी एक सम्पूर्ण स्वरूप लिए राष्ट्र निर्माण हो पाएगा।

Vinod Mishra

सामाजिक सरोकारो पर सीधी पकड़ और बेबाक पत्रकारिता के लिए समर्पित...ग्लोबल भारत न्यूज़ संस्थान के लिए सेवा

यह भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button