हम कितना आजाद हुए स्वाधीनता दिवस पर विशेष
आजादी के आठ दशक बाद भी अभी कई कुरीतियों और अव्यवस्था और भ्रष्टाचार से आजादी बाकी

हम कितना आजाद हुए स्वाधीनता दिवस पर विशेष
आजादी के आठ दशक बाद भी अभी कई कुरीतियों और अव्यवस्था और भ्रष्टाचार से आजादी बाकी
देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, आजादी के बाद देश ने बहुत विकास किया अच्छे बुरे दिन देखे, खट्टी मीठी यादें उपलब्धियों से लेकर कीर्तिमान तक गढ़ डाले हमने लेकिन कुछ विषय आज भी ऐसे परिलक्षित हो रहें है जिनको देखने के बाद अंतर्मन में एक बात अवश्य आती है कि आखिर हम कितने आजाद हुए है।
देश आज जिस अंतर्द्वंद से गुजर रहा है इसको हर भारतीय को समझना होगा कि ब्रिलियंसी से भरा पुरा देश आज भी कई मोर्चों पर युद्ध जैसे हालातों का सामना करना पड़ जाता है। क्षेत्रीय रूढ़िवादिता, सही मायने में शैक्षिक स्तर का ह्रास होना, जातीयता की संकीर्ण सोच जैसे तमाम मुद्दे ऐसे है जिन पर मंथन करिए तो आज भी देश में कई ऐसी कुरीतियाँ है जिनसे हर भारतीय को आजादी चाहिए। राजनीति में जाति से आजादी, आरक्षण में जाति से आजादी, शिक्षा हो या सिस्टम हर तरह एक आजादी की आवश्यकता है। क्या कभी भ्रष्टाचार से आजादी मिलेगी देश को और उसके नागरिक को। राजपथ बनाए जा रहे है लेकिन एक माह के भीतर सड़के टूट रही है, इस अब अव्यवस्था से आजादी, दवाएं अस्पतालों में भेजी जा रही है स्थानीय स्तर पर भी खरीदने की छूट दी गई है लेकिन सरकारी अस्पतालों में आज भी पूरी दवाइयां नहीं मिल पाती परिणाम स्वरूप अंधी बाजार व्यवस्था का शिकार होना पड़ता है, इस अव्यवस्था से आजादी कब मिलेगी, शायद ही इस विषय पर सोचने की फुर्सत किसी के पास हो। शादी विवाह के लिए बनाई गई जातियां अब राजनीति का आधार बन गई हैंजिसके चलते अयोग्य जन प्रतिनिधि बन रहे है, इससे व्यवस्था को उनका भी बोझ ढोना पद रहा है, जनप्रतिनिधि जाति के आधार पर नहीं योग्यता के आधार पर चुने जाने चाहिए लेकिन हो उलटा रहा है, राजनीति को संकीर्ण सोच के बंधन से बाहर निकाल कर उसको भी आजाद करना चाहिए।
भारत के हर नागरिक इससे पीड़ित है लेकिन ग़ुलामी के विचारों से आजादी तभी एक सम्पूर्ण स्वरूप लिए राष्ट्र निर्माण हो पाएगा।

