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बरघाट पुल बना लेकिन पहुंच मार्ग अधूरा – ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, किया जोरदार धरना-प्रदर्शन

बरघाट पुल बना लेकिन पहुंच मार्ग अधूरा – ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, किया जोरदार धरना-प्रदर्शन

प्रतापगढ़। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के बरघाट गांव में वर्षों से बनकर तैयार पुल अब तक उपयोगी नहीं हो पाया है। वजह है – पुल का पहुंच मार्ग न बनना। ग्रामीणों का आक्रोश आज खुलकर सामने आया और सैकड़ों लोग पुल स्थल पर इकट्ठा होकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान लोगों ने जिला प्रशासन और शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जानकारी के मुताबिक, यह पुल नाबार्ड योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 10 करोड़ 5 लाख 85 हजार की लागत से स्वीकृत हुआ था। 133 मीटर लंबे इस पुल और 400 मीटर पहुंच मार्ग का शिलान्यास तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 30 जून 2020 को किया था। दिसंबर 2023 तक पुल तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन पहुंच मार्ग अधूरा छोड़ दिया गया।

नतीजा यह है कि बरघाट, सिधारी पट्टी, प्रेमधर पट्टी, दुबे पट्टी, पूरे दुर्वन, छीटपुर, दिलीपपुर और देवलहा समेत दर्जनों गांव के हजारों लोग आज भी आवागमन के लिए मजबूरन 5 से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर शिवशत घाट से होकर आते-जाते हैं। पुल बनने के बाद नाविकों ने अपनी नावें हटा लीं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर वे कई बार जिलाधिकारी से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आज आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पहुंच मार्ग नहीं बनाया गया तो वे जिला मुख्यालय पर विशाल धरना देंगे।

धरने में मौजूद प्रमुख लोगों में वीरेंद्र पांडेय, राकेश पांडेय, कृष्ण कुमार मिश्रा, सुरेश कुमार मिश्रा, विजय शंकर मिश्रा, विजय शंकर तिवारी, रामनाथ पाल, मजनू गौतम, रामधन गौतम, मुन्ना यादव, आदित्य मिश्रा, सुधांशु मिश्रा सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।

कुल मिलाकर, करोड़ों की लागत से तैयार यह पुल प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज भी ‘बेकार की इमारत’ बनकर खड़ा है।

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