ब्रेकिंग
मत्स्य पालन विभाग नें 1 लाख मत्स्य बीज गंगा नदी किया संचित  डॉ राकेश सिंह हुए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर सम्मानित एक नवम्बर को तुलसीसदन में लगेगा मेगा विधिक सहायता एवं जागरूकता शिविर विजन प्लस आई केयर एवं आप्टिकल्स सेंटर का भव्य शुभारंभ, नेत्र सेवाओं को मिलेगी नई पहचान माधव नगर, प्रयाग भाग दक्षिण में हर्षोल्लास से मनाया गया शरद पूर्णिमा उत्सव। प्रतापगढ़ में MBBS छात्र की संदिग्ध मौत,मेडिकल कॉलेज में हड़कंप; हॉस्टल के नीचे मिला शव नगर पंचायत रानीगंज में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के शुभारंभ पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। दहन नहीं — रावण की अन्त्येष्टि ! स्वर्गीय शशिधर मिश्र की पुण्यतिथि पर विराट दंगल प्रतियोगिता आयोजित हुई। जीडीपी में सबसे नीचे प्रतापगढ़! विकास पुरुषों की सोंच पर प्रश्न चिन्ह?
उत्तरप्रदेशप्रतापगढ़

नोएडा में प्रतापगढ़ के युवक की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या और नोएडा पुलिस मिलीभगत का आरोप

नोएडा में प्रतापगढ़ के युवक की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या और पुलिस मिलीभगत का आरोप

Source…… Global Bharat desk

​नोएडा। थाना कोतवाली फेस-3 क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ प्रतापगढ़ के सरायवीर भद्र गांव के युवक अतुल ओझा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, लेकिन मृतक के पिता, जो स्वयं एक अधिवक्ता हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्थानीय पुलिस और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है जिसे छिपाने की कोशिश की जा रही है।”
​
प्रतापगढ़ के सराय बीरभद्र के रहने वाले जयंती प्रसाद ओझा का आरोप है कि 4 जनवरी की रात उनके बेटे अतुल की हत्या की गई। परिजनों का दावा है कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें शव देखने तक नहीं दिया। मृतक के भाई नवीन ओझा, जो भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना परिवार की मौजूदगी के पंचनामा किया और दबाव बनाकर मूल तहरीर बदलवा दी।
​परिजनों का तर्क है कि जिस कमरे में शव मिला, उसकी छत मात्र 8 फीट ऊंची थी, जबकि अतुल का कद 6 फीट था, ऐसे में पंखे से लटककर आत्महत्या करना नामुमकिन है। आरोप है कि पुलिस और डॉक्टरों ने साठगांठ कर विसरा सुरक्षित नहीं रखा और न ही सीसीटीवी फुटेज की जांच की। अब पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की जांच SIT (विशेष जांच दल) से कराई जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

​
​आरोप 1: पुलिस ने जबरन दबाव बनाकर बदली तहरीर।
​आरोप 2: शरीर पर चोट के निशान और मुंह से झाग, फिर भी पोस्टमार्टम में अनदेखी।
​आरोप 3: मुख्य आरोपी गरिमा सिंह को बचाने की कोशिश।
​मांग: पूरे मामले की SIT जांच की जाए।

​”इस मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल जांच का विषय हैं। क्या वाकई सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है या यह मामला कुछ और है? पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए सरकार की ओर देख रहा है।

यह भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button