ब्रेकिंग
प्रतापगढ़ में समझौते के बाद भी हुआ कत्ल! 15 साल पुरानी रंजिश में सलीम की गोली मारकर हत्या, दहला मांध... प्रतापगढ़ का 'द केरल स्टोरी': 12 साल बाद 'शेर अली' से फिर संतोष शुक्ल बने, मंत्रोच्चार के बीच हुई घर... पूरे बेंदुआ में निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन हुआ। कुंडा में चरमराती कानून-व्यवस्था! जाम से जकड़ा शहर, अवैध गतिविधियों की चर्चाएं तेज—नवागत कोतवाल मनोज... उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ प्रतापगढ़ की मांधाता इकाई द्वारा विकासखंड मुख्यालय पर कार्यशाला स... करुणा शंकर मिश्र अध्यक्ष और कौशलेश त्रिपाठी बने महामंत्री CBSE बोर्ड परीक्षा: कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुआ 12वीं फिजिक्स का पेपर, शिक्षकों ने बढ़ाया छात्रों का ... संग्रामगढ़ में 3 दिन से लापता युवक का शव तालाब में मिला, इकलौते बेटे की मौत से परिवार में कोहराम प्रदेश सरकार की दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी का प्रदर्शन। और अब विश्वविद्यालय की परीक्षा में चंद्रगुप्त मौर्य की जाति पर सवाल पूंछे गए।
उत्तरप्रदेशप्रयागराज

वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को ‘साहित्यकार सत्कार आपके द्वार’ योजना में मिला ‘साहित्य रत्न सम्मान’।

'साहित्यांजलि प्रभा' द्वारा प्रवर्तित 'साहित्यांजलि प्रकाशन' प्रयागराज द्वारा इस माह का साहित्य रत्न सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को प्रदान किया गया।

वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को ‘साहित्यकार सत्कार आपके द्वार’ योजना में मिला ‘साहित्य रत्न सम्मान’।

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क
प्रयागराज, 17 दिसम्बर।

‘साहित्यांजलि प्रभा’ द्वारा प्रवर्तित ‘साहित्यांजलि प्रकाशन’ प्रयागराज द्वारा इस माह का साहित्य रत्न सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को प्रदान किया गया।

उत्कृष्ट साहित्य सर्जक की लेखनी से निसृत विचार शब्दों के रूप में जीवन के स्वर्णिम द्वार खोलने में सहायक होता है जो मनुष्य को उर्जावान बनाए रखता है । उपरोक्त उद्गार सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल जी ने उस समय व्यक्त किए जब वह साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा साहित्यकार सत्कार आपके द्वार योजना में रसूलाबाद संजय चौराहे के पास श्री जटाशंकर प्रियदर्शी के आवास पर अध्यक्षीय उद्बोधन कर रहे थे।

डॉ शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल ने कहा कि जटाशंकर प्रियदर्शी को आज साहित्य रत्न सम्मान से अलंकृत किया गया है जो अत्यंत सराहनीय है।

अपने स्वागत भाषण में डॉ राम लखन चौरसिया वागीश ने कहा कि श्री प्रियदर्शी जी को सम्मान मिलना साहित्य क्षेत्र में गौरव की बात है। शब्द और सृजनकार सदैव अमर रहते हैं वे कभी नहीं मरते इसीलिए केवल रचनाकार और ब्रह्म को सृजनकर्ता की संज्ञा दी गई है।

मौलिक विचार एवं साहित्यिक सर्जना की प्रतिनिधि पत्रिका साहित्यांजलि प्रभा द्वारा प्रवर्तित साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज इस माह का साहित्य रत्न सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार जटाशंकर प्रियदर्शी को प्रदान किया गया।

साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज के व्यवस्थापक डॉ ० भगवान प्रसाद उपाध्याय के संचालन में सम्पन्न इस आयोजन में पंडित राकेश मालवीय मुस्कान ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया और डॉ ० राम लखन चौरसिया वागीश के स्वागत के बाद रवीन्द्र कुशवाहा ने योजना पर विस्तार से जानकारी दी।

श्री कुशवाहा ने साहित्यांजलि प्रभा मासिक पत्रिका को संरक्षित संवर्धित करने की अपील की।

इस अवसर पर जटाशंकर प्रियदर्शी ने अपनी कविताओं का सस्वर पाठ किया और योजना के दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि यह पूरे देश में अपनी तरह की अनूठी पहल है।

उपस्थित सभी सम्मानित कवियों ने अपनी कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में आभार डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय ने व्यक्त किया।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

यह भी पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button